
Kumar Vishwas Vrindavan Owaisi: मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास अपनी पत्नी डॉ. मंजू शर्मा के साथ दो दिनों के लिए वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने भक्ति और अध्यात्म का आनंद तो लिया ही, साथ ही देश के बड़े मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। डॉ. विश्वास अपनी पत्नी डॉ. मंजू शर्मा के साथ वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने वात्सल्य ग्राम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शिरकत की और इसके बाद आम पर्यटकों की तरह ई-रिक्शा में बैठकर वृंदावन की कुंज गलियों का भ्रमण किया।
वात्सल्य ग्राम के समविद् गुरुकुलम में शनिवार को एक कार्यक्रम हुआ। इसमें कुमार विश्वास और पद्मविभूषण साध्वी ऋतंभरा ने मिलकर लेखक देवेंद्र शुक्ल की नई किताब 'साध्वी ऋतंभरा और राम जन्मभूमि आंदोलन' का विमोचन किया।
इस अवसर कुमार विश्वास ने कहा कि यह पुस्तक राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को आम जनता तक ले जाने वाला एक बहुत अच्छा जरिया है। उन्होंने भगवान राम के सीधे-सरल और मर्यादा वाले जीवन के बारे में भी बात की। वहीं, साध्वी ऋतंभरा ने मंदिर निर्माण और भोजशाला आंदोलन के पुराने दिनों के अपने संघर्षों को याद किया।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा भोजशाला संबंधी फैसले को असंवैधानिक बताने के सवाल पर कुमार विश्वास ने सीधी बात कहीं। उन्होंने कहा कि 'ओवैसी साहब एक पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं। मेरी उनसे प्रार्थना है कि वे देश की संस्कृति और अपने कुलवंश के इतिहास को गहराई से पढ़ें। अगर वे चार पीढ़ी पीछे का इतिहास देखेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि वे भी इसी महान परंपरा का हिस्सा हैं और उनके पूर्वज भी इसी धरती को नमन करते थे।'
कुमार विश्वास ने आगे कहा कि देश में रहने वाले अल्पसंख्यक भाइयों का डीएनए भी भगवान राम और कृष्ण का ही है। कुछ सौ साल पहले किन्हीं परिस्थितियों के कारण भले ही मत और पूजा पद्धति बदल गई हो, लेकिन मूल रूप से वे इसी भारत भूमि का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम के बाद कुमार विश्वास पूरी तरह भक्ति के रंग में डूबे दिखे। वे अपनी पत्नी के साथ ई-रिक्शा में बैठकर सबसे पहले प्रसिद्ध रंगजी मंदिर गए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे यमुना किनारे पहुंचे, जहां हो रहे हरिनाम संकीर्तन (भजन) को सुनकर उन्होंने इसका खूब आनंद लिया। ई-रिक्शा में बैठे कुमार विश्वास को देखने के लिए वहां उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ जमा हो गई।
धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर आए कोर्ट के फैसले की तारीफ करते हुए कुमार विश्वास ने इसे न्यायसंगत और सौभाग्य का पर्व बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि काशी और मथुरा जैसे देश के दूसरे गौरवशाली स्थानों पर भी आगे चलकर ऐसे ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।