मथुरा में 2019 में गठबंधन हो भी जाता है, तो भी हेमा मालिनी को हराना विपक्षियों के लिए आसान नहीं होगा।
मथुरा। उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट और नूरपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली है, लेकिन यदि लोकसभा चुनाव 2019 की बात की जाए, तो हेमा मालिनी सुरक्षित हैं। जिस तरह कैराना में गठबंधन के साथ चुनाव हुआ, उस हिसाब से मथुरा में 2019 में गठबंधन हो भी जाता है, तो भी हेमा मालिनी को हराना विपक्षियों के लिए आसान नहीं होगा।
यहां देखें कैसे सुरक्षित हैं हेमा
कैराना में भारतीय जनता पार्टी को तब हार मिली, जब सपा, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने रालोद प्रत्याशी को समर्थन दे दिया। अब जरा लोकसभा चुनाव 2014 के परिणामों पर नजर डाली जाए, तो हेमा मालिनी को जितने वोट मिले थे, उस हिसाब से तीनों दल एकत्र होकर भी होमा मालिनी को नहीं हरा सकते हैं।
2014 का चुनाव परिणाम
बीजेपी हेमा मालिनी को मिले 5,74, 633 वोट। अब रालोद प्रत्याशी जयंत चौधरी की बात की जाए, तो उन्हें 2 लाख 43 हजार 890 मत मिले। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी योगेश कुमार को 1 लाख 73 हजार 572 मत मिले, वहीं सपा से चंदन सिंह को 36 हजार 673 मत मिले थे। इस हिसाब से यदि रालोद, बसपा और सपा के मतों को जोड़ दिया जाए, तो कुल मत 4 लाख 54 हजार 225 मत होते हैं। यानि तीनों दल मिल भी जाएं, तो हेमा मालिनी से इस सीट को झटकने के लिए 1 लाख 20 हजार 408 मत की आवश्यकता पड़ेगी।
ये भी पढ़ें - भाजपा विधायक चौधरी उदयभान सिंह ने बताया, भाजपा क्यों जीतेगी कैराना लोकसभा उपचुनाव