Coronavirus Crisis के बीच भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा Pakistan Imran Khan Government ने POJK पर पकड़ मजबूत करने के लिए नाकाम कोशिश की
नई दिल्ली। इमरान खान सरकार ( Imran Khan Government ) ने पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर ( POJK ) पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक परिषद के माध्यम से आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई है। हालांकि इस परिषद को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ( Former Prime Minister Nawaz Sharif ) की पार्टी ने दो साल पहले ही खत्म कर दिया था। पाकिस्तानी अखबार डॉन ( Pakistani newspaper Dawn ) के अनुसार, इस्लामाबाद ने ( pakistan-occupied jammu and kashmir ) के अंतरिम संविधान अधिनियम 1974 ( Interim Constitution Act 1974 ) के तहत संघीय सरकार और प्रांतीय सरकार के बीच "एक पुल के रूप में काम करने के लिए" पीओजेके परिषद ( POJK Council ) की स्थापना की थी। जिसके अध्यक्ष पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते थे।
संघीय सरकार ने यह सुनिश्चित किया था कि परिषद की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जांच से परे रहें। कथित तौर पर यह परिषद, "अनियंत्रित भ्रष्टाचार और पीओजेके में हर चुनाव से पहले राजनीतिक खरीद-फरोख्त का केंद्र थी।" संघीय सरकार की ओर से कार्य करते हुए इस परिषद ने इनलैंड रेवेन्यू और अकाउंटेट जनरल्स ऑफिस जैसे महत्वपूर्ण विभागों के "प्रशासनिक नियंत्रण" का आनंद लिया। परिषद इस्लामाबाद स्थित अपने भारीभरकम सचिवालय का प्रशासनिक खर्च और कुछ अन्य फंटकर खर्च चलाने तथा पाकिस्तान व पीओजेके में विकास गतिविधियों के लिए पीओजेके से वसूले जाने वाल 20 प्रतिशत आयकर और कुछ अन्य फंड को अपने पास रखती थी।
हालांकि जून 2018 में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने अपनी चुनावी घोषणा और सार्वजनिक रूप से की गई मांगों के चलते इस परिषद की "प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों" को समाप्त कर दिया था। पीएमएल-एन उस समय पीओजेके विधानसभा और परिषद दोनों में बहुमत में थी। एक हालिया बयान के अनुसार, मजेदार बात यह कि पीओजेके में पिछले साल दक्षिणी जिलों में आए एक भूकंप और कोविड-19 महामारी के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने के बावजूद 13वें संशोधन के बाद राजस्व संग्रह काफी बढ़ गया। डॉन ने अपनी रपट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि संघीय सरकार में मौजूद कुछ तत्व प्रस्तावित 14वें संशोधन के जरिए परिषद की राजकोषीय और प्रशासनिक शक्तियां फिर से बहाल किए जाने को लेकर आतुर हैं।
लेकिन गुरुवार को पीओके के प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर के प्रेस सचिव राजा मुहम्मद वासिम की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री हैदर की अध्यक्षता में बुधवार को मुजफ्फराबाद में कैबिनेट की एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें विधि एवं कश्मीर मामलों के संघीय मंत्रालयों से 22 जून को प्राप्त हुए संशोधनों के मसौदे पर तथा अन्य चीजों पर गहन चर्चा हुई।
बयान में इसे एक असाधारण बैठक बताते हुए कहा गया है कि पीओजेके कैबिनेट ने एकसुर से इस बात पर सहमति जताई है कि विधि और कश्मीर मामलों के संघीय मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए संविधान संशोधन मसौदे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति में इस्लामाबाद से प्राप्त मसौदा प्रस्तावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
बयान में कहा गया, "(पीओजेके) कैबिनेट का यह सर्वसम्मत मत है कि पाकिस्तान के साथ जम्मू एवं कश्मीर राज्य का वैचारिक संबंध कश्मीरी लोगों की अनंत इच्छाओं को दर्शाता है। यह किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या सरकार से संबंधित नहीं है, बल्कि राज्य के दोनों हिस्सों पर रहने वालों का एक आपसी अधिकार है। साथ ही यह संबद्धता पूरी तरह से पाकिस्तान के संस्थापक कायद-ए-आजम मुहम्मद अली जिन्ना की ²ष्टि के अनुरूप है।"
बयान में कहा गया है कि जम्मू एवं कश्मीर राज्य को भारत सरकार की मान्यता के दृष्टिकोण से "(इस्लामाबाद द्वारा) उठाए जाने वाले कदम (पीओजेके सरकार के साथ) आपसी विचार-विमर्श से होने चाहिए, जो दोनों तरफ के कश्मीरियों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार को और सशक्त करे।"