
नई दिल्ली। भारत में हर दिन सड़कों पर बने गड्ढों की वजह से औसतन 10 लोगों की मौत हो जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017 में गड्ढों ने 3579 जिंदगियां खत्म कर दी, मौजूदा साल में तो हाल और भी खराब है। 2016 में यह आंकड़ा 2324 ही था। कश्मीर से कन्याकुमारी तक सड़कें गड्ढों से अटी पड़ी है। कई जगह तो हालात इतने बुरे हैं कि ऐसा लगता है जैसे सड़कों में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़क है।
आतंकियों से ज्यादा खतरनाक गड्ढे
चौंकाने वाली बात ये है कि गड्ढ़ों से मरने वालों की संख्या आतंकी घटनाओं में मरने वालों से करीब साढ़े तीन गुनी है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2017 में नक्सली और आतंकी घटनाओं में करीब 803 लोगों की जान गई थी।
सबसे बेहाल उत्तर प्रदेश
राज्य सरकारों की तरफ से केंद्र को दिए गए 2017 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में गड्ढों की वजह से सबसे ज्यादा 987 लोगों की जान गई। इसके बाद महाराष्ट्र (726), हरियाणा (522) और गुजरात (228) का नंबर है। गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं का कुल सड़क दुर्घटनाओं में एक बड़ा हिस्सा है। 2016 में भी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र क्रमशः पहले और दूसरे नंबर पर थे। हालांकि 2016 में तीसरे और चौथे नंबर पर रहे ओडिशा और आंध्र प्रदेश इस बार लिस्ट से बाहर हैं।
संसद के हंगामों में अटका सुधार
केंद्रीय सड़क मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मोटर व्हीकल्स संशोधन बिल में इस तरह के प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है। मोटर व्हीकल्स संशोधन बिल संसद की कार्रवाई सुचारू ढंग से न चल पाने के कारण लंबे समय से संसद में अटका हुआ है।