
नई दिल्ली। केंद्र और राज्य में बैठी सरकारें भले विकास के पथ पर अग्रसर होने का दंभ भरती हों, लेकिन अब भी देश के कई इलाके विकास तो दूर मूलभूत सुविधाओं से भी पूरी तरह वंचित हैं। खास तौर पर देश का भविष्य कहे जाने वाले नौनिहाल शिक्षा के लिए कितना जूझ रहे हैं, इसकी बानगी देश के पूर्वोत्तर राज्य असम में देखने को मिली। यहां स्कूल जाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को एल्युमिनियम के बर्तनों में बैठकर नदी पार करनी पड़ती है।
जी हां अपनी जान को जोखिम में डालकर ये बच्चे शिक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने जाते हैं। क्योंकि स्कूल जाने के लिए इनके पास एक पक्की सड़क नहीं है। सरल रास्ता नहीं है। ऐसे में एल्युमिनियम के बर्तनों में बैठकर नदी पार करके प्राइमरी स्कूल जाना पड़ता है। बच्चों के इस तरह स्कूल जाने का वीडियो असम के बिश्वनाथ जिले से सामने आया है। वीडियो के सामने आते ही ये सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
इस मामले में बिश्वनाथ के विधायक प्रमोद बोर्थकुर ने कहा कि वह इस तरह के हालात देखकर शर्मसार हैं। उन्होंने कहा, 'उस एरिया में कोई भी पीडब्ल्यूडी रोड नहीं है। मुझे नहीं पता कि सरकार ने कैसे एक टापू पर सरकारी स्कूल बना दिया। हम स्टूडेंट्स के लिए नाव की व्यवस्था कर सकते हैं। मैं जिलाधिकारी से स्कूल को कहीं और शिफ्ट करने के लिए भी कहूंगा।
बहरहाल विधायक महोदय ने मामले के प्रकाश में आने के बाद ही सही चिंता तो जताई लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था का ही भरोसा दिया। पक्की व्यवस्था को लेकर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़ी एक कहानी में बताया गया है कि बचपन में स्कूल जाने के लिए वे नदी को तैर कर पार करते थे। शिक्षा पाने के लिए उनके इस प्रयास की कहानी हर बच्चे ने सुनी होगी। लेकिन असम में ये कहानी एक बार फिर साकार हो रही है। जान को जोखिम में डालकर ही सही सुनहरा भविष्य बुनने के लिए बच्चों की हिम्मत की जितनी दाद दी जाए कम है।