
नई दिल्ली। चुनावी साल से ठीक पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक अच्छी खबर आई है। अमरीका की एक शोध संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या तेजी से कम हो रही है। हैरान करने वाली बात ये है कि प्रत्येक मिनट में 44 लोग गरीबी रेखा के ऊपर निकल रहे हैं। बताया जा रहा है कि दुनिया में गरीबी घटने की ये सबसे तेज दर है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा भारत
अमरीकी शोध संस्था ब्रूकिंग्स के ब्लॉग, फ्यूचर डेवलपमेंट की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10 साल में दक्षिणी एशिया के देशों जैसे- भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और फिलिपींस की जनता की आय तेजी से बढ़ रही है। जिसके चलते दुनिया में गरीबों की संख्या में कमी आई है। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर हो रहा है लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत और चीन में गरीबों की घटती संख्या का असर तेजी से देखा जा रहा है।
2030 तक ना के बराबर रह जाएंगे गरीब
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 तक देश में तीन फीसदी से कम ही लोग गरीबी रेखा के नीचे रह जाएंगे। वहीं 2030 तक मुफलिसी में जी रहे लोगों की संख्या न के बराबर हो जाएगी। हांलाकि भारत में गरीबी को लेकर आई ये रिपोर्ट भारत सरकार के आंकड़ों से मेल नहीं खाती है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि गरीबी नापने के लिए दोनों ने अगल-अलग पैमाने तय किए होंगे, जिसकी वजह से आंकड़ों में अतंर देखने का मिल रहा है।
आर्थिक विकास कार्यक्रम कर रहे असर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2011 के बीच भारत गणराज्य में गरीबों की संख्या घटी है। 38.9 फीसदी से घटकर ये आबादी 21.2 फीसदी पर पहुंच गई। आर्थिक जानकारों ने कहा है कि देश में तेजी से चलाए जा रहे आर्थिक विकास कार्यक्रमों के चलते गीरीबों की संख्या में कमी देखी जा रही है। इसके अलावा कहा गया है कि वर्ष 2011 में भारत के लोगों की क्रय क्षमता प्रति व्यक्ति 1.9 डॉलर थी।
नाइजीरिया दुनिया का सबसे गरीब देश
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वक्त दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोगों की आबादी अफ्रीकी देश नाइजीरिया में रहती है। मई 2018 के आखिरी तक यहां बेहद गरीबों की संख्या करीब 8.7 करोड़ दर्ज की गई है। वहीं भारत से बिल्कुल उलट नाइजीरिया में प्रत्येक मिनट लगभग छह लोग गरीबी रेख के नीचे जा रहे हैं।