
नई दिल्ली। पाकिस्तान में एक चुनावी चिन्ह चर्चा का विषय बना हुआ है। पाक में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव में ‘जीप’ के चिन्ह पर कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं। हैरानी की बात यह कि जिन उम्मीदवारों को यह चुनाव चिन्ह दिए गए है वह एक ही पार्टी से अलग हुए उम्मीदवार हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज) से अलग हुए कई उम्मीदवार इस चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसे लेकर विशेषज्ञों ने संदेह भी जताया है।उनका कहना है कि यह मुख्य पार्टी को हराने की बड़ी साजिश है। इन निर्दलीय उम्मीदवारों में सबसे लोेकप्रिय नासिर अली हैं जो नवाज के सबसे करीबी माने जाते हैं। उन्हे पार्टी का संकटमोचक समझा जाता था। मगर नवाज पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया।
सोची समझी रणनीति
सियासी जानकारों का मानना है कि बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों को एक चुनाव चिन्ह देना, वो भी सभी पीएमएल-एन का टिकट वापस करने वाले हैं, यह महज इत्फाक नहीं हो सकता है। पाकिस्तान में एक सोची-समझी रणनीति के तहत जीप समूह का गठन किया गया है। यह पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज) के सामने पीएमएलएन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नासिर) को खड़ा करने की साजिश रची जा रही है। इससे शरीफ की पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा।
आईएसआई की चाल
नवाज शरीफ खुद ‘जीप’ समूह के गठन पर संदेह जता चुके हैं। उनका कहना है कि इस तरह से पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे आईएसआई की चाल करार दिया है। नवाज का आरोप है कि उम्मीदवारों को आईएसआई के दफ्तर में बुलाकर उन्हें धमाया जा रहा है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ें। इस तरह से उनकी पार्टी के वोट को काटा जाएगा। नवाज की बेटी मरीयम का कहना है कि जो लोग जीप पर मुहर लगाएंगे वह अदृश्य ताकतों की जीत पर मुहर लगाएंगे।