
Sapna Choudhary Case Moradabad: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में हरियाणवी डांसर सपना चौधरी से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने थाना सिविल लाइन से विस्तृत आख्या तलब करने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान संबंधित थाने से पूर्ण रिपोर्ट उपलब्ध न होने पर न्यायालय ने सख्त नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 जून तक हर हाल में पूरी आख्या प्रस्तुत की जाए।
मामले के अनुसार, 11 जून 2019 को मुरादाबाद रेलवे स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में सपना चौधरी के मंच प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र हो गई थी। आरोप है कि इस दौरान माहौल उत्तेजित हो गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इस घटना में कई दर्शकों के घायल होने की बात भी सामने आई थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम के दौरान देर रात तक डीजे बजता रहा, जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और ध्वनि प्रदूषण संबंधी दिशा-निर्देशों की अवहेलना हुई। इसके साथ ही सरकारी संसाधनों और धन के दुरुपयोग के भी आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद शहर में जाम जैसी स्थिति उत्पन्न होने की बात कही गई है।
इस पूरे मामले को लेकर गायत्री नगर निवासी डॉक्टर रामेश्वर दयाल तुरैहा ने पहले थाना सिविल लाइन के प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन आरोप है कि उचित कार्रवाई न होने पर उन्होंने अपने अधिवक्ता वैभव अग्रवाल के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया।
मामले की सुनवाई एसीजेएम कोर्ट संख्या-5 में चल रही है, जहां आज की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस रिपोर्ट की अनुपलब्धता पर गंभीर रुख अपनाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विस्तृत आख्या आवश्यक है, इसलिए थाना सिविल लाइन को तय समय सीमा के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मामले की सुनवाई के अंत में अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि थाना सिविल लाइन से विस्तृत आख्या हर हाल में 30 जून तक पेश की जाए। न्यायालय ने संकेत दिया कि रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की अगली दिशा तय की जाएगी और यदि समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो आगे की प्रक्रिया में और सख्त रुख अपनाया जा सकता है। अब सभी पक्षों की निगाहें इस अंतिम समयसीमा पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जांच किस स्तर तक आगे बढ़ती है और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।