
मुंबई। सीजेपी के आंदोलन में शामिल छात्रों पर पुलिस की ओर से दर्ज मामलों को लेकर एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद सरकार और प्रतिनिधियों के बीच जिन शर्तों पर सहमति बनी थी, कार्रवाई उसी के अनुसार होनी चाहिए। मंजूरी के बाद नई शर्तें जोड़ना सही नहीं है।
मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीजेपी का आंदोलन नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर चलाया गया था। आंदोलन के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें कुछ शर्तों पर सहमति बनी थी। अब यदि सरकार नई शर्तें जोड़ रही है कि 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों का नाम हटाया जाएगा या केवल उन्हीं लोगों के नाम हटेंगे जिन पर कोई अपराध सिद्ध नहीं होगा, तो यह पहले हुए समझौते की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को तय शर्तों का पालन करना चाहिए और बाद में नियम बदलने से बचना चाहिए।
वंदे मातरम बिल पर पूछे गए सवाल के जवाब में इस्माइल ने कहा कि जब राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 सदन में पेश होगा, तब उनकी पार्टी संविधान के तहत मिले अधिकारों और अपने धर्म को मानने वाले लोगों की भावनाओं के अनुरूप अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस विषय पर सदन के भीतर अपनी बात पूरे देश के सामने रखेगी।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान का समर्थन करते हुए इस्माइल ने कहा कि ओवैसी ने व्यावहारिक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ओवैसी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि विपक्षी दल चाहें तो एआईएमआईएम उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार है। उनका उद्देश्य भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के फैसले का भी इस्माइल ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश से जुड़ा संवेदनशील मामला है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय कई दशक पहले स्थापित हुआ था और उस समय संबंधित मंजूरी की वर्तमान व्यवस्था मौजूद नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में जिला परिषद की ओर से विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिए जाने से लोगों में चिंता थी। उन्होंने कहा कि अदालत की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से राहत मिली है और मामले की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए।