
अभिनेता जितेंद्र ने किए बप्पा के दर्शन (Photo Source- Instagram/Ektarkapoor)
Jeetendra Last Wish: बॉलीवुड के दिग्गज स्टार जितेंद्र(Jeetendra) हाल ही में गणेशोत्सव के मौके पर भगवान गणपति का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। खराब स्वास्थ्य के बावजूद बप्पा के लिए अपनी अटूट आस्था और आयोजकों के प्यार के कारण वह खुद को दर्शन करने से नहीं रोक पाए। बप्पा के दर्शन के बाद जितेंद्र ने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने कई बातें बताई। उन्होंने बताया कि मरने से पहले वह क्या चाहते हैं। साथ ही उन्होंने अपने बचपन की यादों और संघर्ष के दिनों के बारे में भी दिल खोलकर बात की।
82 साल के अभिनेता जितेंद्र ने ANI संग खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बप्पा के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "देखिए, पहली बात तो यह कि बप्पा मुझे बुलाते हैं, मैं खुद नहीं आता। दूसरी बात, निंबालकर जी (आयोजक) का प्यार और अपनापन है जो वह मुझे इतने आदर से याद करते हैं। आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन बप्पा के दरबार में आने का फैसला मैं टाल नहीं सकता था।"
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने बप्पा से अपने लिए क्या मांगा, तो अभिनेता ने बेहद भावुक कर देने वाली अपनी आखिरी इच्छा का जिक्र किया जितेंद्र ने कहा, "मैं जब तक जियूं, अपने दो पैरों पर चलना चाहता हूं। मेरी एकमात्र यही प्रार्थना है कि मैं मरते दम तक बप्पा के दर्शन करता रहूं, भले ही इसके लिए मुझे स्ट्रेचर पर ही क्यों न आना पड़े।"
इसके साथ ही अपने बच्चों बेटी एकता कपूर और बेटे तुषार कपूर के बारे में बात करते हुए जितेंद्र ने कहा कि उन्होंने भगवान से केवल उनके लिए सुख-शांति, स्वास्थ्य और लोगों के अपार प्यार की मन्नत मांगी है।
अपने बचपन और संघर्ष के दिनों को याद करते हुए जितेंद्र ने बताया कि उनके घर में पिछले 52 सालों से मुंबई में गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। वह जिस चार मंजिला इमारत में 17 साल रहे, वहां 100 परिवार रहते थे और वह अकेले पंजाबी परिवार थे। बाकी सभी महाराष्ट्रीयन और कोंकणी थे, जिसके चलते उनकी मां भी मराठी बोलने लगी थीं और उनका पालन-पोषण पूरी तरह मराठी संस्कृति में हुआ।
उन्होंने याद करते हुए कहा कि बचपन में दिवाली या गणपति पर मिलने वाला बूंदी का प्रसाद वह जेब में रखकर एक-एक दाना खाते थे। उस दौर में पूरे बिल्डिंग में सिर्फ उनके घर पंखा हुआ करता था, जो तब बड़ी लग्जरी माना जाता था। जितेंद्र ने कहा कि जो आत्म-संतोष, शांति और सादगी उस दौर में थी, वह आज की बड़ी-बड़ी गाड़ियों और एसी (AC) वाले कमरों में भी नहीं है।
Updated on:
22 Sept 2026 09:51 am
Published on:
22 Sept 2026 09:45 am
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