अंबरनाथ में चुनाव बाद बने भाजपा-कांग्रेस गठबंधन पर शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह विचारधारा के खिलाफ है। उन्होंने माना कि यह गठबंधन उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत करने वाला है।
महाराष्ट्र की राजनीति में 'अंबरनाथ मॉडल' ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। गुरुवार को एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अंबरनाथ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए गठबंधन को अपनी विचारधारा के खिलाफ बताया। शिंदे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने भी उठाया है।
अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद सत्ता से दूर रखे जाने पर एकनाथ शिंदे ने कड़ा रुख अपनाया है। जब शिंदे से पूछा गया कि क्या अंबरनाथ में भाजपा द्वारा कांग्रेस से हाथ मिलाये जाने उन्हें ‘पीड़ा’ महसूस हुई है, तो उन्होंने कहा, "हां बिल्कुल, यह हमारी विचारधारा के विरुद्ध है। मैंने इस संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है। उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। अगर भाजपा की सत्ता अंबरनाथ में बनी भी है तो हमें दुख नहीं है, क्योंकि हम सब महायुति का हिस्सा है।"
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा, “मैं सत्ता के लिए और कुर्सी के लिए नहीं लड़ता हूं, मेरा एजेंडा है विकास, जनता का विकास करना और महाराष्ट्र को आगे बढ़ाना।“ उन्होंने स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सिखाया था कि शिवसेना कभी कांग्रेस के साथ नहीं जाएगी। इससे पहले उनकी पार्टी ने इस गठबंधन को 'अवसरवादी' करार दिया है।
उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ किसी भी तरह के मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया। फडणवीस ने कहा, यह फैसला स्थानीय स्तर पर हुआ है, लेकिन अंबरनाथ में भी भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) एक साथ होनी चाहिए थी। फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया गया है, कांग्रेस के सारे पार्षद अब भाजपा में आ गए है। यह सब राज्य नेतृत्व की मर्जी से नहीं बल्कि स्थानीय पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा लिया गया निर्णय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिंदे के साथ उनके संबंध बेहतर हैं और गठबंधन में कोई दरार नहीं है।
20 दिसंबर को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के परिणामों ने सबको चौंका दिया था। 60 सीटों वाली परिषद में, शिंदे सेना बहुमत से मात्र 4 कम 27 सीटें, बीजेपी 14 सीटें, कांग्रेस 12 सीटें, एनसीपी (अजित पवार) 4 सीटें और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीतीं।
दिलचस्प बात यह है कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए बीजेपी ने धुर विरोधी कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास आघाडी' बनाई, जिसे एक निर्दलीय का समर्थन मिलने पर संख्या बल 32 हो गया। जिसके बाद भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल अंबरनाथ नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं।
इस गठबंधन के बाद कांग्रेस की राज्य इकाई ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने सभी 12 नवनिर्वाचित नगरसेवकों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया। बुधवार की रात ही इन सभी निलंबित पार्षदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया, जिससे अंबरनाथ की राजनीति पूरी तरह बदल गई है।