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Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी पहुंचे CID ऑफिस, फर्जी सिग्नेचर केस में होनी है पूछताछ

CID के दफ्तर अभिषेक बनर्जी पहुंचे हैं। सीआईडी कई बार उन्हें नोटिस जारी कर चुकी है। कोर्ट के आदेश पर अभिषेक सीआईडी दफ्तर पहुंचे हैं। फर्जी सिग्नेचर केस में उनसे पूछताछ होनी है।

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Jun 11, 2026
abhishek banerjee
अभिषेक बनर्जी। (फोटो-ANI)

TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी में टूट के बीच जांच एजेंसी भी लागातर अभिषेक बनर्जी पर एक्शन ले रही है। इसी सिलसिले में CID के दफ्तर अभिषेक बनर्जी पहुंचे हैं। सीआईडी कई बार उन्हें नोटिस जारी कर चुकी है। कोर्ट के आदेश पर अभिषेक सीआईडी दफ्तर पहुंचे हैं। फर्जी सिग्नेचर केस में उनसे पूछताछ होनी है।

क्या है पूरा मामला?


दरअसल, यह पूरा विवाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़ा हुआ है। चुनाव में टीएमसी को मिली बड़ी राजनीतिक चुनौती के बाद विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर भेजे गए एक लेटर पर सवाल उठाए गए थे। इसी पत्र को लेकर अब जांच चल रही है। दरअसल, अभिषेक बनर्जी पर यह आरोप है कि विधायकों का फर्जी सिग्नेचर उनके समर्थन के लिए लिया गया था। जिसके बाद इस मामले की शिकायत विधानसभा स्पीकर से की गई थी।

तीन बार समन, फिर भी नहीं हुए थे पेश


सीआईडी ने इस मामले में अभिषेक बनर्जी को तीन बार नोटिस जारी किया था। जांच अधिकारियों के अनुसार, वह किसी भी समन पर पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे। पहले स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया गया, जबकि बाद में वह दिल्ली चले गए। उस दौरान उन्हें विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों और इंडिया गठबंधन से जुड़ी बैठकों में सक्रिय देखा गया, जिससे जांच एजेंसी ने उनकी अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई थी। मामला जब अदालत पहुंचा तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के बाद उन्होंने सीआईडी के समक्ष पेश होने का फैसला किया और गुरुवार को भवानी भवन पहुंचकर अधिकारियों के सवालों का सामना किया।

क्या है फर्जी सिग्नेचर विवाद?


विवाद उस लेटर को लेकर है जो विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। आरोप है कि विपक्ष के नेता के तौर पर शोभन देव चट्टोपाध्याय के नाम की सिफारिश करते हुए विधायकों की सहमति का दावा किया गया था। हालांकि बाद में आरोप लगा कि कुछ विधायकों के वास्तविक हस्ताक्षरों की जगह केवल उनके नाम बड़े अक्षरों में लिखे गए थे।
इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसके बाद जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी गई।

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Updated on:
11 Jun 2026 06:46 pm
Published on:
11 Jun 2026 06:14 pm