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अजित पवार विमान हादसा मामले में सनसनीखेज खुलासा,जीरो FIR से मची खलबली

Ajit Pawar Plane Crash Conspiracy: अजित पवार विमान दुर्घटना मामले में रोहित पवार ने बेंगलुरु में जीरो FIR दर्ज कराई है। शिकायत में विमान के रखरखाव में धांधली और पायलट के संदिग्ध रिकॉर्ड को साजिश का आधार बताया गया है।

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Mar 24, 2026
अजित पवार प्लेन क्रैश केस में बड़ा अपडेट (Photo: IANS)

Conspiracy: महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) अजित पवार की विमान दुर्घटना (Plane Crash) में मौत के मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ (Shocking Twist) आ गया है। अजित पवार के भतीजे रोहित पवार (Rohit Pawar) ने बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन (Police Station) में एक जीरो FIR (Zero FIR) दर्ज कराई है, जिसमें दावा किया गया है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं बल्कि उन्हें रास्ते से हटाने की एक गहरी आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) थी। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज यह मामला अब राजनीति और जांच एजेंसियों (Investigation Agencies) के गलियारों में सनसनी मचा रहा है।

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सफेद झूठ या बड़ी लापरवाही? (Technical Negligence)

रोहित पवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त बॉम्बार्डियर लीयरजेट 45 विमान (VT-SSK) पूरी तरह से असुरक्षित था। DGCA के ऑडिट का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस विमान के रखरखाव के रिकॉर्ड (Maintenance Records) के साथ छेड़छाड़ की गई थी। विमान की इंजन ओवरहालिंग 5,000 घंटों पर अनिवार्य थी, लेकिन कथित तौर पर इसने 8,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे कर लिए थे। बावजूद इसके, इसे उड़ान भरने की अनुमति दी गई, जो सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा था।

पायलट का विवादित अतीत और संदिग्ध व्यवहार (Pilot Controversy)

शिकायत में मुख्य पायलट सुमित कपूर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि कपूर का इतिहास शराब के सेवन (Alcohol Violations) के कारण विवादित रहा है और उन्हें पहले भी निलंबित किया जा चुका था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्घटना से ठीक पहले मूल क्रू (Original Crew) को आखिरी वक्त पर बदल दिया गया था। साथ ही, यह भी दावा किया गया है कि पायलट के नाम पर हाल ही में एक बड़ी बीमा पॉलिसी (Life Insurance) ली गई थी, जो साजिश की ओर इशारा करती है।

लैंडिंग के समय के वेदर डेटा में हेरफेर (Weather Anomaly)

बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दृश्यता (Visibility) को लेकर भी विरोधाभास सामने आया है। नियमों के मुताबिक, विजुअल फ्लाइट रूल्स के तहत 5 किलोमीटर से कम दृश्यता में लैंडिंग वर्जित है, लेकिन उस दिन धुंध के बावजूद क्लियरेंस दिया गया। दुर्घटना के अंतिम पलों में कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में को-पायलट का घबराहट भरा शोर तो सुनाई दिया, लेकिन मुख्य पायलट पूरी तरह शांत रहा, जिसने किसी भी आपातकालीन स्थिति (Emergency Call) की सूचना नहीं दी।

महाराष्ट्र पुलिस की चुप्पी और बेंगलुरु का सहारा (Legal Battle)

रोहित पवार का आरोप है कि उन्होंने इस साजिश की शिकायत पहले मुंबई के मरीन ड्राइव और बारामती पुलिस स्टेशन में करने की कोशिश की थी, लेकिन वहां उनकी बात नहीं सुनी गई। पुणे CID भी इसे केवल एक 'आकस्मिक मृत्यु' (Accidental Death) के रूप में देख रही थी। इसी वजह से उन्हें कर्नाटक के बेंगलुरु में शरण लेनी पड़ी। अब इस जीरो एफआईआर के जरिए पूरे मामले की स्वतंत्र आपराधिक जांच की मांग की जा रही है।

महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया

इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति के गठन की मांग की है, जबकि सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक लाभ के लिए लगाया गया आरोप बता रहा है। अब सबकी निगाहें बेंगलुरु पुलिस पर टिकी हैं कि वे इस मामले के दस्तावेज महाराष्ट्र पुलिस को कब ट्रांसफर करते हैं और क्या DGCA तथा विमानन कंपनी VSR वेंचर्स के अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लॉगबुक में हेरफेर और इंजन की लिमिट खत्म होने की बात सच साबित होती है, तो यह भारत के विमानन इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट-क्रिमिनल गठजोड़ साबित हो सकता है।

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