CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम विवाद पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया और COEMPT को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए।
CBSE-OSM Controversy: CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। परीक्षा परिणामों और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की खबरों के बीच कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 'CBSE ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि सिस्टम से समझौता किया गया था।'
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में कहा कि 'CBSE लंबे समय तक अपनी OSM प्रणाली में साइबर सुरक्षा संबंधी कमजोरियों से इनकार करता रहा, लेकिन अब बोर्ड ने खुद माना है कि सिस्टम से समझौता हुआ है।' उन्होंने पूछा कि इस मामले में ठेकेदार कंपनी COEMPT के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा कि 'ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में साइबर सुरक्षा से जुड़ी कमियों से हफ्तों तक इनकार करने के बाद, CBSE ने आखिरकार मान लिया है कि इस सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगी है। ऐसा लगता है कि CBSE और शिक्षा मंत्रालय में COEMPT के संरक्षकों को पहले से ही इस बात का अंदाजा था कि COEMPT इस काम के लिए उपयुक्त नहीं होगा।' जयराम रमेश ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अगस्त साल 2025 में जारी RFP में CBSE के पास यह अधिकार था कि काम ठीक से न करने वाले विक्रेताओं को ब्लैकलिस्ट कर सके।
जयराम ने लिखा कि 'अगस्त 2025 के अपने RFP में, CBSE ने उन वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार अपने पास रखा था जो प्रभावी ढंग से काम पूरा नहीं कर पा रहे थे। सितंबर में, CBSE ने एक शुद्धिपत्र जारी किया, जिसके जरिए उसने इन वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने का अपना ही अधिकार वापस ले लिया। यह COEMPT को बचाने की एक समझ से परे और सरकार-समर्थित कोशिश है। और यह तब शुरू हो गई थी जब COEMPT को आधिकारिक तौर पर कॉन्ट्रैक्ट मिला भी नहीं था।' कांग्रेस नेता ने इस मामले को लाखों छात्रों के हितों से जुड़ा बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई।
जयराम ने अपने पोस्ट में कहा कि 'देश को मंत्री प्रधान को और कितने समय तक झेलना पड़ेगा? उनके मंत्रालय की देखरेख में टेंडरों में बहुत बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं, जिनकी वजह से लाखों छात्रों की मानसिक शांति छिन गई है। मंत्री प्रधान तो अहंकार और अक्षमता की साक्षात मिसाल हैं। वे देश के प्रति अपनी किसी भी जिम्मेदारी से ऊपर अपने राजनीतिक एजेंडे को ही प्राथमिकता देने पर अड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री को कभी भी खुद या अपने सहयोगियों के लिए ईमानदारी या नैतिकता का कोई पैमाना तय करने के लिए नहीं जाना गया है। लेकिन मंत्री प्रधान को अपने 'राजधर्म' का पालन करते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।'
हालांकि CBSE ने इससे पहले इन आरोपों को खारिज किया था। 27 मई को जारी एक बयान में बोर्ड ने कहा था 'CBSE ने Coempt Edutech को कॉन्ट्रैक्ट देने के संबंध में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। ये आरोप गलत और गुमराह करने वाले हैं, और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। CBSE ने इस एजेंसी को कॉन्ट्रैक्ट देते समय सामान्य वित्तीय नियम के प्रोटोकॉल का पूरी सख्ती से पालन किया है।
CBSE ने 28.08.2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षा साल 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए RFP जारी किया था, और यह कॉन्ट्रैक्ट एक योग्य बोलीदाता को दिया।' इस बीच बोर्ड ने यह भी कहा है कि वह OnMark पोर्टल में मौजूद संभावित कमजोरियों पर लगातार नजर रख रहा है। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक टीम भी तैनात की गई है।