
Dharmendra Pradhan Resignation: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक विवाद के गहराते ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मंशा जताई थी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले जून में और उसके बाद 20 जुलाई की उच्च स्तरीय बैठक में वरिष्ठ मंत्रियों के सामने अपना इस्तीफा सौंपने का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, दोनों ही मौकों पर शीर्ष नेतृत्व ने उनके प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार का मानना था कि संकट के समय मंत्री का हटना जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा होगा। सरकार का ध्यान परीक्षा प्रणाली में सुधार और एनटीए (NTA) के पुनर्गठन पर था, न कि किसी राजनीतिक इस्तीफे पर।
20 जुलाई तक जो सरकार अपने मंत्री के बचाव में डटकर खड़ी थी, उसने अचानक अपना रुख क्यों बदला? इसके पीछे तीन बेहद संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारण सामने आए हैं:
20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई: चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस बल प्रयोग में कई छात्र घायल हो गए। इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने से जनआक्रोश तेजी से बढ़ गया।
डिजिटल दुष्प्रचार और सीमा पार से साजिश: डिजिटल मॉनिटरिंग में खुलासा हुआ कि भारत में भड़के छात्र आंदोलन को हवा देने के लिए 400 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया खातों (जिसमें 100 से अधिक इंस्टाग्राम अकाउंट शामिल हैं) का इस्तेमाल किया जा रहा था। इनमें से कई खाते 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी भारत विरोधी दुष्प्रचार में शामिल रहे थे।
प्रदर्शन स्थल पर अपराधियों की मौजूदगी: दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) ने 20 से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर करीब 400 ऐसे असामाजिक तत्वों की पहचान की, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था। इनमें से कुछ 20 जुलाई की हिंसा में भी शामिल पाए गए थे।
जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी, तब सरकार को अहसास हुआ कि छात्रों के वास्तविक असंतोष का फायदा देश विरोधी तत्व उठा सकते हैं। जंतर-मंतर पर स्थिति को बेकाबू होने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने दोबारा पद छोड़ने की इच्छा जताई। इस बार, राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
तत्काल बदलाव: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के महज कुछ ही घंटों के भीतर कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
यह पूरा विवाद 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के बाद शुरू हुआ था। राजस्थान के एक शिक्षक द्वारा प्रश्नपत्रों के लीक होने का दावा करने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
| तिथि | मुख्य घटनाक्रम |
| 3 मई 2026 | देश भर में 22 लाख से अधिक छात्रों ने नीट-यूजी की परीक्षा दी। |
| 12 मई 2026 | धांधली के सबूत मिलने पर परीक्षा रद्द की गई और मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा गया। |
| 21 जून 2026 | कड़े सुरक्षा घेरे में दोबारा (Re-test) परीक्षा आयोजित की गई। |
| 20 जुलाई 2026 | 'चलो संसद' मार्च में पुलिस और छात्रों के बीच झड़प; जनआक्रोश चरम पर पहुंचा। |
| 25 जुलाई 2026 | धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार; प्रल्हाद जोशी को मिला नया प्रभार। |
सीबीआई जांच और परीक्षा प्रणाली में कड़े कानून बनाने के आश्वासनों के बाद, शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने से अब इस लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन को शांत करने में मदद मिली है।