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एक्साइज पॉलिसी केस: ‘अब न्याय की उम्मीद नहीं’, अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में पेश होने से किया इंकार

Excise Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी है। उसमें उन्होंने कोर्ट में पेश होने से मना कर दिया है। आगे उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलेंगे।
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Updated: 27 Apr 2026, 1:39 PM IST
Excise Policy Case
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में पेश होने से किया इंकार

Excise Policy Case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति से जुड़े मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखा है। आपको बता दें कि काफी समय से इस मामले की कोर्ट में सुनवाई हो रही है, जिसके चलते केजरीवल काफी चर्चा में रहे हैं। इस पत्र में उन्होंने साफ लिखा कि उनकी इस मामले में न्याय की उम्मीद खत्म हो गई है और इसी के चलते उन्होंने कोर्ट में पेश नहीं होने का फैसला भी लिया है। इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में जस्टिस की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।

पत्र में क्या लिखा?

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में साफ लिखा कि वह दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई में न तो खुद पेश होंगे और न ही किसी वकील के जरिए अदालत में मौजूद होंगे। उन्होंने लिखा कि अब उन्हें जज से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही है, इसलिए उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट का रास्ता रखा खुला

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि यह फैसला उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानूनी रास्ता पूरी तरह छोड़ नहीं रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखा है। इसका मतलब है कि अब यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच सकता है।

केजरीवाल की याचिका हुई खारिज

20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका में केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस स्वर्णकांता इस केस की सुनवाई नहीं करें और मामला किसी दूसरी बेंच को दे दिया जाए। कोर्ट में जस्टिस पर आरोप लगाए गए कि वह RSS से जुड़े कार्यक्रमों में जा चुकी हैं, इसलिए उन्हें डर है कि उन्हें इस केस में सही और निष्पक्ष फैसला नहीं मिलेगा।

इस याचिका पर सुनवाई लगभग एक घंटे चली, जिसके बाद अदालत ने साफ कहा कि बिना पक्के सबूत के किसी जज पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ शक या डर के आधार पर जज खुद को केस से अलग नहीं कर सकते, क्योंकि इससे न्याय प्रक्रिया पर गलत असर पड़ता है।

जिरह का वीडियो बना विवाद

रिक्यूजल याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल एक नए विवाद में घिर गए। दरअसल, अदालत में हुई जिरह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पूरे मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। सुनवाई में केजरीवाल के साथ उनके कुछ साथियों, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और पत्रकार रवीश कुमार का भी नाम सामने आया। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि जिरह से जुड़ा यह वायरल वीडियो तुरंत हटाया जाए, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

Updated on:
27 Apr 2026, 1:39 PM IST
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