
पश्चिम बंगाल से जो तस्वीर सामने आ रही है, वो कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं। चार एजेंसियों के एग्जिट पोल में से किसी ने भी कांग्रेस को 5 से ज्यादा सीटें नहीं दी हैं। Matrize और P-Marq ने तो शून्य का अनुमान लगाया है। People's Pulse ने 1 से 3 सीटें दी हैं।
एग्जिट पोल से साफ पता चलता है कि बंगाल में लड़ाई सीधे टीएमसी और भाजपा के बीच सिमट गई है। कांग्रेस ने न टीएमसी से हाथ मिलाया, न लेफ्ट से। नतीजा ये कि वो इस चुनावी मैदान में कहीं दिखती ही नहीं। राजनीति में अकेले चलने की कीमत कभी-कभी बड़ी होती है, और बंगाल में कांग्रेस यही कीमत चुका रही है।
असम में हिमंत बिसवा सरमा की सरकार तीसरी बार आती दिख रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक BJP गठबंधन को 68 से 100 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस 22 से 36 सीटों पर अटकी दिखती है। बहुमत का आंकड़ा 64 है।
कांग्रेस ने गौरव गोगोई को आगे किया था, जो दिवंगत मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं। पार्टी को उम्मीद थी कि नया चेहरा नई हवा लाएगा, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे उस उम्मीद पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
अब बात करते हैं उस हिस्से की जहां से कांग्रेस के लिए अच्छी खबरें आ रही हैं। केरल में यूडीएफ यानी कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनती दिख रही है।
Axis My India ने UDF को 78 से 90 सीटें दी हैं। People's Pulse का अनुमान 75 से 85 और Matrize का 70 से 75 है। तीनों एजेंसियां UDF को बहुमत के आंकड़े 71 से ऊपर रख रही हैं।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का तीसरी बार सरकार बनाने का सपना टूटता दिख रहा है। LDF को 55 से 65 सीटें मिलने का अनुमान है, जो 2021 के 99 सीटों के मुकाबले बड़ी गिरावट है।
VD सतीशन मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। केरल में 9 अप्रैल को 78।23 फीसदी मतदान हुआ, जो 1987 के बाद सबसे ज्यादा है।
तमिलनाडु में DMK गठबंधन की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। Matrize ने DMK+ को 122 से 132 और People's Pulse ने 125 से 145 सीटें दी हैं। कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा है और करीब दो दर्जन सीटों पर उसने किस्मत आजमाई है।
पुडुचेरी में तस्वीर उलट है। वहां एनडीए आगे दिख रहा है। People's Pulse ने NDA को 15 से 19 और Axis My India ने 16 से 20 सीटें दी हैं। कांग्रेस-DMK गठबंधन 6 से 11 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है।
कांग्रेस की तस्वीर साफ है। जहां दक्षिण में जीत की उम्मीद दिख रही है, वहीं उत्तर-पूर्व में हाशिये पर है। एक ही पार्टी, एक ही दिन, लेकिन दो बिल्कुल अलग नतीजे। सवाल यह है कि क्या दक्षिण की जीत पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा दे पाएगी?