'गाय काटने की बात तो भूल जाओ, अब गौमाता पर उंगली उठाने की इजाजत भी किसी को नहीं मिलेगी!' पश्चिम बंगाल के पशु वध कानून को चुनौती देने वाले हुमायूं कबीर के बयान पर भड़के जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने खुलेआम फांसी की सजा की मांग।
Bengal Animal Slaughter: एजेयूपी (AJUP) चीफ हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल के पशु वध कानून को चुनौती देने और 'कुर्बानी जारी रहने' के बयान पर देश का सियासी पारा गरमा गया है। इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने हुमायूं कबीर को सीधे फांसी देने की मांग की है। कानपुर में उन्होंने कहा, 'यह नया भारत है, अब गौमाता पर उंगली उठाने की भी इजाजत नहीं होगी। एक भी गाय कटी तो अंजाम गंभीर होंगे।' संत ने आरोप लगाया कि कबीर ने न कुरान पढ़ी है न हदीस, वे सिर्फ मुस्लिमों को गुमराह कर बंगाल की शांति बिगाड़ रहे हैं।
जगद्गुरु ने कहा कि 'यह राष्ट्र सनातन का है। आपको इसी भावना के अनुरूप आचरण करना होगा। गायों की हत्या या बलि के बारे में तो भूल ही जाइए। अब तो आपको गाय पर उंगली उठाने की भी अनुमति नहीं होगी। यदि एक भी गाय की हत्या हुई, तो इसके परिणाम अत्यंत गंभीर होंगे।' जगद्गुरु ने कहा 'मैं पश्चिम बंगाल सरकार से मांग करता हूं कि ऐसे व्यक्ति को फांसी पर लटका दिया जाए। ऐसे लोगों को फांसी होनी चाहिए।'
जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य ने 'नया भारत' का हवाला देते हुए हुमायूं कबीर और उनकी राजनीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने देश के सनातन ताने-बाने को याद दिलाते हुए ऑन-कैमरा जो कहा, उसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जगद्गुरु ने हुमायूं कबीर पर निशाना साधते हुए कहा कि 'ये लोग खुद को समझते क्या हैं कि ऐसी फूट डालने वाली राजनीति कर रहे हैं, इन्हें फांसी पर क्यों नहीं लटकाया जा रहा है? उन्होंने कहा 'यह नया भारत है। अगर आप यहां किसी को भड़काने या गलत विचार फैलाने की कोशिश करेंगे, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
स्वामी सतीशाचार्य यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर अपनी गंदी राजनीति के चक्कर में खुद मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं और बंगाल की शांति भंग कर रहे हैं। कबीर की समझ पर सवाल उठाते हुए संत ने कहा कि 'मुझे लगता है कि हुमायूं कबीर ने न तो कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है और न ही वे कुरान या हदीस पढ़ते हैं। वे मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं और बेवजह बंगाल की शांति भंग कर रहे हैं।'
अब जरा सिक्के का दूसरा पहलू भी देख लीजिए कि यह पूरा विवाद आखिर शुरू कहां से हुआ। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट, 1950' के तहत पशु वध को लेकर एक पब्लिक नोटिस जारी किया था। इस सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाते हुए एजेयूपी (AJUP) चीफ हुमायूं कबीर ने साफ कह दिया था कि सरकारी पाबंदियों के बावजूद कुर्बानी का सिलसिला नहीं रुकेगा।
हुमायूं कबीर ने सरकार और प्रशासन को खुली चुनौती दी थी। उन्होंने साफ-साफ कहा था कि सरकार एक नियम बना सकती है जिसमें मुसलमानों से बीफ न खाने को कहा जाए, लेकिन धार्मिक कुर्बानी जारी रहेगी। हम किसी भी आपत्ति को नहीं सुनेंगे। इस परंपरा को सदियों पुराना बताते हुए हुमायूं कबीर ने कहा यह एक ऐसी परंपरा है जो 1400 वर्षों से चली आ रही है, और जब तक दुनिया रहेगी, तब तक जारी रहेगी।