India ने France को 114 राफेल जेट खरीदने का प्रस्ताव भेजा है। करीब 3.25 लाख करोड़ की इस मेगा डील में 50% विमान भारत में बनाने की योजना है।
India-France Rafale Jet Deal: भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने फ्रांस को करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के मेगा डील के लिए अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। इस डील के तहत भारत 114 अत्याधुनिक राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है। खास बात यह है कि इनमें से 94 विमान भारत में ही बनाए जाने की योजना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत अपनी वायुसेना में लड़ाकू विमानों की भारी कमी का सामना कर रहा है।
भारतीय वायुसेना में लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी चल रही है। इस गैप को भरने के लिए सरकार लगातार आधुनिक 4.5 जनरेशन प्लस राफेल जैसे विमान शामिल करने पर जोर दे रही है। अब तक भारत और नौसेना मिलकर 62 राफेल विमान का ऑर्डर दे चुके हैं। अगर यह नया 114 विमानों का सौदा पूरा होता है तो कुल संख्या 176 तक पहुंच जाएगी। नौसेना ने भी 31 और राफेल विमान लेने की इच्छा जताई है, जिससे यह संख्या 200 से भी ज्यादा हो सकती है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार राफेल विमान फ्रांस के बाहर बनाए जाएंगे। फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन (Dassault Aviation) भारत की एक कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन करेगी। इस योजना के तहत करीब 50 प्रतिशत तक स्थानीय निर्माण (localisation) का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत में रक्षा उत्पादन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह अनुरोध पत्र (Letter of Request) पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय की एक्विजिशन विंग (Acquisition Wing) ने फ्रांस सरकार को भेजा है। अब फ्रांसीसी पक्ष की तरफ से अगले 2 से 3 महीनों में जवाब आने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत तेज होगी और अगले एक साल के भीतर इस डील को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जून के मध्य में फ्रांस दौरे की संभावना है। इस यात्रा के दौरान राफेल डील पर भी चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह दौरा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने साल 2024 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक बड़ा अध्ययन किया था, जिसका मकसद वायुसेना की क्षमता को मजबूत करना था। इसके बाद डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (Defence Acquisition Council) ने लगभग चार महीने पहले वायुसेना के 114 राफेल खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।
रक्षा सचिव ने बयान में इस प्रोजेक्ट को लेकर कहा था कि 'पहली बार 'मेक इन इंडिया' के तहत, फ्रांस के बाहर राफेल का निर्माण किया जा रहा है। यह एक सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते द्वारा समर्थित है, जिसमें कोई बिचौलिया नहीं है और परियोजना में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। G2G समझौते के तहत इसमें स्थानीयकरण (localisation) का स्तर भी काफी ऊंचा है, और भारतीय हथियारों तथा प्रणालियों को इसमें एकीकृत करने का पूरा अधिकार भी दिया गया है।
इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं हैं। यह हमें लड़ाकू विमानों को अपेक्षाकृत तेजी से अपनी सेना में शामिल करने में भी सक्षम बनाता है। क्योंकि पहले राफेल मरीन विमान साल 2028 से आने शुरू हो जाएंगे। उसके बाद, कुछ समय बीतने पर यानी अब से लगभग साढ़े तीन साल बाद वायु सेना के लिए निर्धारित पहले राफेल विमान भी आने शुरू हो जाएंगे।