
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (X PHOTO)
PM Modi PRAGATI Meeting:नई दिल्ली में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लंबित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि विकास कार्यों में देरी अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी, क्योंकि इससे न सिर्फ लागत बढ़ती है बल्कि जनता के अधिकारों पर भी असर पड़ता है। रेलवे, बिजली, सड़क और अन्य क्षेत्रों से जुड़े 9 राज्यों के 7 बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के दौरान पीएम मोदी ने अधिकारियों और राज्यों को तय समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए।
अब केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल बिठाने वाले इस डिजिटल प्लेटफॉर्म 'प्रगति' पर पीएम मोदी का कड़ा रुख देखने को मिला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सीधे देश को बताया कि 'कल के 'प्रगति' सत्र के दौरान 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन कार्यों में रेलवे, बिजली और सड़क संपर्क जैसे क्षेत्र शामिल थे। इसके अलावा, बंदरगाहों, स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और अन्य सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।'
बैठक में पीएम मोदी ने साफ-साफ कहा कि किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट में देरी होने से न केवल उसकी लागत बढ़ जाती है, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली जरूरी सुविधाएं भी समय पर नहीं मिल पातीं। इसका सीधा नुकसान देश के विकास और जनता के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने सख्त लहजे में मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को प्रो-एक्टिव होने और डेडलाइन के अंदर काम खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
बिजली क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों, आवासीय सोसायटियों और सरकारी संस्थानों में रूफटॉप सोलर (छतों पर लगने वाले सोलर पैनल) को मिशन मोड में बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका मकसद साफ है, घरों का बिजली बिल कम हो और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले। इसके अलावा उन्होंने एक क्रांतिकारी आइडिया देते हुए कहा कि नहरों के नेटवर्क का नए तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाए जाने चाहिए, जिससे न केवल जमीन की बचत होगी बल्कि पानी का वाष्पीकरण (इवापोरेशन) भी कम होगा और क्लीन एनर्जी पैदा होगी।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken Betwa Link Project) की समीक्षा के दौरान पीएम मोदी ने इसे पूरे देश के लिए एक नजीर बताया। उनका मानना है कि केन-बेतवा प्रोजेक्ट को अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करना चाहिए, ताकि आपसी सहयोग, समय पर क्लीयरेंस और टेक्नोलॉजी की मदद से पानी के विवाद सुलझाए जा सकें। राज्यों से कहा गया है कि वे नदी जोड़ने और जल संरक्षण के ऐसे और मौके तलाशें।
स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 (Swachh Bharat Mission 2.0) को लेकर पीएम मोदी का रुख बेहद आक्रामक दिखा। उन्होंने साफ कहा कि यह मिशन सिर्फ बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके जमीनी नतीजे दिखने चाहिए। उन्होंने राज्यों को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रोसेसिंग प्लांट और गोवर्धन (GOBARdhan) प्लांट के काम में तेजी लाने को कहा है।
इसके साथ ही, महाराष्ट्र के वधावन पोर्ट (Vadhavan Port) को लेकर भी बड़ा विजन सामने रखा गया, जिसे सिर्फ एक बंदरगाह नहीं बल्कि देश का फ्यूचर-रेडी लॉजिस्टिक्स गेटवे बनाया जा रहा है। बैठक की शुरुआत में ही कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि पीएम मोदी के निर्देशों के बाद अब राज्य स्तर पर भी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की हर महीने समीक्षा शुरू कर दी गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन से हुई है।
Published on:
28 May 2026 08:57 pm
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