Iran-Israel war: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव भारत के इंटरनेट और उद्योगों के लिए खतरा बन रहा है। केबल डैमेज होने पर इंटरनेट सेवाएं, बैंकिंग और कारोबार प्रभावित होंगे, साथ ही एल्यूमिनियम सेक्टर पर भी दबाव बढ़ रहा है।
Iran–Israel War: दुनिया के नक्शे पर छोटा दिखने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भारत के लिए बड़ा डिजिटल खतरा बनता जा रहा है। होर्मुज में बढ़ता तनाव अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया को भी प्रभावित कर सकता है। दुनिया का करीब 99% इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। ये केबल्स एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ती हैं। अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है तो सेवाएं ठप पड़ जाएंगी जिसका ऑनलाइन कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
भारत के लिए यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से गुजरने वाले कई बड़े नेटवर्क सीधे देश को जोड़ते हैं।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने जोखिम बढ़ा दिया है। अभी तक केबल पर सीधा हमला नहीं हुआ है, लेकिन सैन्य गतिविधियों के कारण खतरा बढ़ गया है। ज्यादातर केबल नुकसान मछली पकड़ने या जहाज के एंकर गिरने से होता है। लेकिन जब युद्ध जैसी स्थिति हो, तो ऐसे हादसे और बढ़ जाते हैं। अगर ये केबल्स डैमेज होती हैं तो असर कई स्तर पर दिखेगा
समस्या सिर्फ केबल टूटने की नहीं है, बल्कि उसे ठीक करना और मुश्किल हो सकता है। मरम्मत जहाजों को सुरक्षा खतरा, बीमा और परमिशन में देरी वहीं समुद्री इलाके में काम करना मुश्किल होता है। इस वजह से इंटरनेट बाधित होने पर उसे सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। कई लोग सोचते हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट इसका विकल्प हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। स्टारलिंक (Starlink) जैसे सिस्टम अभी इतने बड़े स्तर पर डेटा ट्रैफिक संभालने में सक्षम नहीं हैं और लागत भी ज्यादा है।
इस युद्ध का असर सिर्फ इंटरनेट तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत का एल्यूमिनियम उद्योग भी दबाव में आ गया है।एल्यूमिनियम की कमी का असर सीधे ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा स्क्रैप आयात से पूरा करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट की करीब 30% हिस्सेदारी है। मौजूदा हालात में उत्पादन 20 से 40% तक घट गया है, स्क्रैप की कीमतें करीब 30% बढ़ गई हैं और कई फैक्ट्रियों में कच्चे माल की कमी देखने को मिल रही है।