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पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं वाले MEA के बयान पर मचा बवाल, शशि थरूर ने उठाए सवाल

Citizenship Proof in India: विदेश मंत्रालय (MEA) के पासपोर्ट को लेकर दिए गए बयान के बाद देश में बहस तेज हो गई है। शशि थरूर ने इसे भ्रम पैदा करने वाला बताया, जबकि सरकार ने इसे सिर्फ कानूनी स्पष्टीकरण कहा है।
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Updated: 26 Jun 2026, 1:38 PM IST
Shashi Tharoor on Passport
पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं वाले बयान पर शशि थरूर का प्रहार

Proof of Indian CitizenshipControversy: भारत में पासपोर्ट को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में Ministry of External Affairs (MEA) ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे व्यावहारिक स्पष्टीकरण मान रहे हैं, तो कुछ इसे आम नागरिकों के लिए भ्रम पैदा करने वाला कदम बता रहे हैं।

MEA ने क्या दिया बयान?

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पासपोर्ट 1967 के पासपोर्ट अधिनियम के तहत जारी किया जाता है। इसके अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि केवल मौजूदा कानून की व्याख्या है। यानी पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण देना।

शशि थरूर की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कानून में भले ही ऐसा प्रावधान हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उनका तर्क है कि पासपोर्ट जारी करने से पहले गहन पुलिस वेरिफिकेशन होता है। दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद ही पासपोर्ट दिया जाता है। इसलिए आम लोग इसे नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण मानते हैं। थरूर के अनुसार, इस तरह के बयान लोगों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकते हैं।

सुप्रिया श्रीनेत ने जारी किया वीडियो

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर वीडियो जारी करते हुए सरकार से सवाल किए, मोदी सरकार का कहना है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है। क्या भारत का पासपोर्ट गैर-भारतीयों को भी जारी किया जाता है?

आधार कार्ड पर भी उठे सवाल

इस बहस के बीच आधार कार्ड की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है। थरूर ने पहले के सुप्रीम कोर्ट फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब पासपोर्ट और आधार दोनों ही नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं, तो आम नागरिक अपनी नागरिकता साबित कैसे करेगा? यह सवाल अब एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन गया है।

UIDAI और प्रणाली में सुधार की मांग

Unique Identification Authority of India को लेकर भी सुझाव सामने आए हैं। थरूर ने कहा कि पहचान प्रणाली को और स्पष्ट बनाने की जरूरत है। उनका सुझाव है कि गैर-नागरिकों और नागरिकों के लिए अलग पहचान ढांचा हो। दस्तावेजों की स्पष्ट श्रेणियां तय की जाएं। प्रशासनिक भ्रम और गलत व्याख्या को रोका जाए।

नागरिकों की पहचान बना मुद्दा

यह विवाद सिर्फ पासपोर्ट या आधार तक सीमित नहीं है। असल मुद्दा भारत में नागरिकता पहचान प्रणाली की स्पष्टता को लेकर है। आज की स्थिति में कई दस्तावेज पहचान के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन नागरिकता का निर्णायक प्रमाण क्या है इस पर अभी भी बहस जारी है।

Updated on:
26 Jun 2026, 1:38 PM IST
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