LPG Crisis: पश्चिम एशिया संकट के चलते पैदा हुए गैस और तेल के संकट को झेलने में चीन की स्थिति भारत की तुलना में क्यों मजबूत है?
अमरीका-इजरायल और ईरान की लड़ाई जल्द खत्म होने के आसार नहीं लग रहे। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही जल्दी सामान्य होने की उम्मीद भी नहीं है। इसका खामियाजा तमाम देशों के साथ भारत को भी भुगतना पड़ रहा है। फिलीपींस में राष्ट्रीय आपातकाल लग चुका है। नेपाल में आधे सिलेंडर भरे जा रहे हैं। मुंबई के होटल बंद हो रहे हैं। भारत में गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा हो गया है। सिलेंडर लेने के लिए लोग कतारों में जूझ रहे हैं। गैस पर निर्भर कई कारखाने आदि बंद हो गए हैं, या उनका उत्पादन कम हो गया है। इस वजह से मजदूरों का पलायन हो रहा है। रोज जरूरत की चीजों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। कालाबाजारी के साथ-साथ इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भारत के पास तेल-गैस का पर्याप्त बफर स्टॉक नहीं है। भारत की तुलना में चीन की स्थिति काफी बेहतर है।
चीन कहां, क्यों और कैसे बेहतर स्थिति में है, जानते हैं। पांच मानकों के आधार पर दोनों देशों की तुलना करते हैं।
2020 में बीजिंग ने एक लक्ष्य रखा था- 2025 तक EV की बिक्री 20% हो, लेकिन 2025 तक यह लक्ष्य पार होकर 50% हो गया। चीन में बिकने वाली हर दो नई कारों में से एक इलेक्ट्रिक है।
Centre for Research on Energy and Clean Air की रिपोर्ट कहती है कि 2025 में चीन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री से तेल की जो जरूरत कम हुई वह सऊदी अरब से मंगाए जाने वाले तेल के बराबर थी। सऊदी अरब चीन का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। तेल की इतनी बचत कोई छोटी बात नहीं है।
| वर्ष | चीन (CN) EV शेयर (%) | भारत (IN) EV शेयर (%) |
| 2020 | ~5% | ~0.5% |
| 2021 | ~13.5% | ~1% |
| 2022 | ~25.5% | ~2% |
| 2023 | ~35.5% | ~3.5% |
| 2024 | ~45% | ~5.5% |
| 2025 | 50% | ~8% |
भारत में 2025 में कुल EV बिक्री 23 लाख यूनिट रही, जो नई गाड़ियों के कुल रजिस्ट्रेशन का मात्र 8% है। इनमें भी ज़्यादातर दोपहिया और तिपहिया वाहन हैं। इलेक्ट्रिक कार तो महज 1.75 लाख बिकीं। वैसे कुल 4.4 करोड़ कारों की बिक्री हुई।
फर्क समझे? चीन की आधी नई कारें इलेक्ट्रिक हैं, जबकि भारत की सिर्फ 8% गाड़ियां।
यह सबसे बड़ा फर्क है। कुछ अनुमानों के अनुसार चीन के पास इतना तेल भंडार है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आने वाली तेल सप्लाई करीब 7 महीने तक भी रुक जाए तो उसका काम चलता रहेगा। वैकल्पिक कदम उठाने के लिए इतना वक्त काफी है। भारत के पास कच्चे तेल का रणनीतिक भंडारण सिर्फ 25 दिनों का (चीन में 109 दिन), और LNG का तो केवल 10 दिनों का है।
जापान अपना करीब 80% तेल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से खरीदता है। चीन ने इतनी ही हिस्सेदारी आठ अलग-अलग देशों में फैला रखी है। यानी चीन को कोई एक देश ब्लैकमेल नहीं कर सकता। अगर एक सोर्स बंद हुआ, तो दूसरे खुले हैं। रूस, सऊदी अरब, इराक, यूएई, ओमान, मलेशिया, ईरान, वेनेजुएला जैसे देशों से चीन तेल मंगवाता है। खास बात यह है कि किसी भी देश से उसका आयात 20 फीसदी से ज्यादा नहीं है। मतलब किसी देश पर उसने अपनी ज्यादा निर्भरता नहीं रखी है।
भारत अपना करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है और लगभग आधा एलपीजी भी बाहर से मंगवाता है। इसमें से आधे से ज़्यादा होर्मुज से होकर आता है।
IEEFA (Institute for Energy Economics and Financial Analysis) की रिपोर्ट कहती है कि होर्मुज के रास्ते से भारत का 50% से ज़्यादा एलएनजी और 90% एलपीजी आता है। भारत ने भी पिछले कुछ सालों में उन देशों की संख्या बढ़ाई है, जिनसे तेल आयात होता है। रूस भारत के लिए एक बड़ा तेल आयातक देश बना है। 2022 में यूक्रेन युद्ध से पहले भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 1% था। 2024 तक यह 36% हो गया। रूस के सस्ते तेल ने भारत की बड़ी मदद की। लेकिन, दिसंबर 2025 में भारत का रूस से तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में मध्य पूर्व के देशों पर भारत की निर्भरता बढ़ेगी।
चीन के पास रूस से सीधे पाइपलाइन के जरिए गैस आती है। भारत के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है। चीन में घरेलू गैस उत्पादन तेजी से बढ़ा है। 2020 से उसे ज़्यादा LNG आयात करने की जरूरत नहीं पड़ रही।
भारत का हाल अलग है। भारत जो LNG आयात करता है, उसका करीब 50 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है।
ईरान पर हमले के बाद से भारत ने कई कदम उठाए हैं, जिससे तेल-गैस की किल्लत रोकी जा सके। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन 30% बढ़ाने का आदेश दिया गया। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल हो गया। 2025 में पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग शुरू हो गई। इससे पेट्रोल के आयात में कमी आई। होर्मुज स्ट्रेट पार कर पिछले दिनों एलपीजी लेकर जहाज पहुंचे हैं और कुछ पहुंचने वाले हैं। भारत ने 27 से बढ़ा कर 42 देशों से तेल खरीदना शुरू किया है।
तो सवाल यह है कि क्या भारत संकट झेल लेगा? जवाब है, हां। लेकिन, दर्द के साथ। एलपीजी पहले ही महंगी हो गई है। पेट्रोल-डीजल भी आंशिक रूप से महंगा हो गया है। रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। महंगाई बढ़ने लगी है। इस साल के शुरुआती महीनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आयात होने वाले तेल में चीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है।
| देश / क्षेत्र | तेल आयात (मिलियन बैरल/दिन) |
| चीन (China) | 5.4 |
| भारत (India) | 2.1 |
| बाकी एशिया (Rest of Asia) | 2.0 |
| दक्षिण कोरिया (South Korea) | 1.7 |
| जापान (Japan) | 1.6 |
| बाकी दुनिया (Rest of World) | 0.6 |
| यूरोप (Europe) | 0.5 |
| अमेरिका (US) | 0.4 |