LPG Crisis in India: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का भारत पर बड़ा असर पड़ा है। भारत का LPG आयात आधा हो गया। महंगाई बढ़ गई। अब लोगों को इस बात की चिंता है कि क्या महंगाई और बढ़ेगी या स्थिति सुधरेगी। पढ़ें पूरी खबर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) ईरान (Iran) और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है। जो वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का चोक पॉइंट बनकर इस युद्ध में उभरा है। यहां से करीब 25 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई वैश्विक स्तर पर होती है। पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों के साथ हुई। इसके बाद से इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। पहले जहां 130-140 जहाज प्रतिदिन गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इस बंदिश से दुनिया के कई ऊर्जा आयातक देशों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत का कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) सप्लाई प्रभावित हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा असर एलपीजी पर पड़ा है।
भारत अपनी एलपीजी खपत का करीब 60% आयात के जरिए पूरा करता है, और इन आयातों का 90% होर्मुज जलडमरूमध्य से आता था। यानी यह जलडमरूमध्य भारत की कुल एलपीजी खपत का लगभग 54% हिस्सा संभालता था। एलएनजी के मामले में, जहां भारत अपनी आधी जरूरत आयात से पूरी करता है, वहां 55-60% सप्लाई इसी रास्ते से आती थी। कच्चे तेल में करीब 40% आयात इसी मार्ग से होता था।
युद्ध के चलते एलपीजी आयात आधा हो गया
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों (अप्रैल-फरवरी) में भारत का औसत मासिक एलपीजी आयात करीब 20 लाख टन था। मार्च में यह घटकर 11 लाख टन रह गया और अप्रैल में और गिरकर 9.5 लाख टन हो गया। भारत की सालाना एलपीजी खपत 33 मिलियन टन से थोड़ी ज्यादा है, यानी रोजाना करीब 90,000 टन। जिसमें कि इसमें 60% आयात पर निर्भर है।
केंद्र की मोदी सरकार ने वैश्विक स्थिति को देखते हुए कई कदम उठाए। LPG की कमी के कारण औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों के लिए LPG की सप्लाई सीमित करनी पड़ी, ताकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी न हो। घरेलू LPG सिलेंडर रिफिल बुकिंग के बीच कम से कम गैप को भी बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही घरेलू रिफाइनरियां इंपोर्ट में हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने के लिए घरेलू LPG उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ा रही हैं। कंपनियां अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे दूसरे इलाकों से LPG कार्गो हासिल करने की होड़ में लगी हैं। इसके साथ ही, भारत सरकार कूटनीतिक कोशिशों के जरिए कुछ हद तक खाड़ी में फंसे अपने 9 LPG टैंकरों को भी निकालने में कामयाब रही।
केप्लर के मैनेजर (मॉडलिंग एंड रिफाइनिंग) सुमित रितोलिया ने कहा कि आने वाले कुछ महीनों तक एलपीजी आयात की तंगी बनी रहने की संभावना है। मध्य पूर्व आपूर्ति में संकट के कारण स्थिति संवेदनशील है। हालांकि मार्च और अप्रैल में भारत ने ईरान और खाड़ी देशों के साथ समन्वय से कुछ चयनित कार्गो सुरक्षित कर लिए। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि मई में आयात बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा सप्लाई आने वाली है। लेकिन इस बढ़ोतरी और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद कुल आपूर्ति वातावरण निकट भविष्य में तंग ही रहने वाला है, जो भारत की कुल एलपीजी मांग पर असर डाल रहा है।