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ओपिनियन: NEET Exam पर इस ऐलान से 22 लाख बच्चों के साथ हुई नाइंसाफी की भरपाई नहीं होगी प्रधान जी

NEET paper leak 2026: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि 2027 से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन होगी। कमिटी के पुराने सुझाव के बावजूद अमल न होने से 22 लाख छात्रों का नुकसान हुआ। मंत्री ने अब गड़बड़ी बर्दाश्त न करने का वादा किया है, लेकिन पिछले वर्षों की घटनाएं इस वादे पर सवाल उठाती हैं।

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May 15, 2026
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। (फोटो- IANS)

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 15 मई को कहा कि अगले साल से राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा यानि नीट (National Eligibility cum Entrance Test या NEET) कंप्यूटर के जरिए करवाई जाएगी। उन्होंने यह बात तब कही जब इस बार यह परीक्षा दोबारा करवानी पड़ रही है। इसका कारण है पर्चा लीक हो जाना।

ऑनलाइन परीक्षा करवाए जाने का सुझाव एक कमिटी ने पहले ही दिया था, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। एनटीए का कहना है कि उसके पास इस पर अमल की सुविधा नहीं है और इस बारे में फैसला सरकार को लेना है। अब सरकार ने फैसला तो ले लिया है, लेकिन 22 लाख से ज्यादा छात्रों के साथ खिलवाड़ हो जाने के बाद। इस फैसले से इन बच्चों के नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी।

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प्रधान ने 2027 से नीट परीक्षा ऑनलाइन कराए जाने की घोषणा करते हुए यह भी कहा कि परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन, अगर सच में ऐसा होता तो पेपर लीक होता ही नहीं, क्योंकि ऐसी गड़बड़ी 2024 में भी हुई थी। फिर भी 2026 में हुई।

एनटीए की साख पर पहले से रहे हैं सवाल

मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का सपना लिए 22 लाख से ज्यादा बच्चे 3 मई को हुई परीक्षा में शामिल हुए थे। लेकिन, पेपर लीक होने की बात सामने आई और परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने फिर से परीक्षा कराने का ऐलान कर दिया। 21 जून को इसकी तारीख दी गई है।

यह अपने आप में बड़ा मामला है, क्योंकि 2024 में भी पेपर लीक का मसला उठा था। 2024 में सफल हुए टॉप 100 छात्रों में से 67 को फुल मार्क्स आए थे। 2023 में केवल दो छात्रों को पूरे अंक हासिल हुए थे। जांच से पता चला कि करीब 13 लाख में से 155 छात्रों ने पर्चा लीक का फायदा उठाया था। तब छात्रों ने दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी, लेकिन एनटीए ने नहीं माना था। एनटीए की साख पर तब भी बड़ा बट्टा लगा था।

इस विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई थी। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन को इसका प्रमुख बनाया गया था। कमिटी ने अक्तूबर 2024 में रिपोर्ट दी और कहा कि कागज-कलम से परीक्षा लेने की व्यवस्था खतरनाक है, कंप्यूटर बेस्ड मॉडल (सीबीटी) अपनाना चाहिए। एनटीए द्वारा ली जानी वाली जेईई परीक्षा के लिए भी कमिटी का यही सुझाव था।

कमिटी ने यह भी कहा कि पेन-पेपर टेस्ट (पीपीटी) मॉडल को चलाना है तो इसमें परीक्षा केन्द्रों तक टेस्ट पेपर डिजिटल रूप में सुरक्षित पहुंचाया जाए और वहीं प्रिंट करा कर छात्रों को दिया जाए। इससे छपाई और सेंटर तक पहुंचाने के दौरान पर्चा लीक होने का खतरा कम हो जाएगा। एनटीए ने इन सुझावों पर अमल नहीं किया।

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