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Explainer : व्हाट्सएप ग्रुप, ‘गेस पेपर’ और 135 सवालों की मैचिंग, आखिर कैसे रचा नीट पेपर लीक का चक्रव्यूह, समझें पूरा नेक्सस

NEET UG 2026: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, नासिक पुलिस की कार्रवाई में सामने आया 'सीकर कनेक्शन'। जानिए कैसे सॉल्वर गैंग ने 135 सवालों की मैचिंग कर तोड़े 22 लाख छात्रों के सपने और अब क्या करेगी सीबीआई।
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May 12, 2026
NEET Paper Leak
नीट का पेपर लीक होने का मामला। ( फोटो: CHATGPT)

NTA: एक छात्र के लिए किसी कांपिटिटिव एग्जाम की तैयारी करना और उसके बाद पेपर लीक होना बहुत बड़ा दर्द है। यह एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। रुपया पैसा खर्च होने के अलावा रातों को जाग-जाग कर अपने भविष्य के सुनहरे ख्वाब देखने वाले युवाओं के सपने तब टूट जाते हैं, जब पेपर आउट हो जाता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से 12 मई को नीट-यूजी 2026 (NEET-UG) परीक्षा रद्द करने के फैसले से देश भर के 22 लाख से अधिक मेडिकल छात्रों की मेहनत बेकार गई और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। बरसों की तपस्या और तनाव भरे माहौल के बाद परीक्षा का रद्द होना किसी सदमे से कम नहीं है। इधर 3 मई को आयोजित इस परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर और पुख्ता सुबूत मिलने के बाद सरकार ने न केवल परीक्षा रद्द कर दी है, बल्कि मामले की सीबीआई को जांच सौंप दी है।

हर पेपर लीक होने पर जांच सौंपना महज एक सामान्य प्रशासनिक प्र​क्रिया

असल में परीक्षा रद्द होने की पूरी क्रोनोलॉजी समझने की जरूरत है। दरअसल गत 3 मई को देशभर के हजारों केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन किया गया। हालांकि, परीक्षा समाप्त होने के कुछ घंटों बाद ही कुछ टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। इसके बाद 4 से 10 मई तक धीरे-धीरे अलग-अलग राज्यों से अनियमितताओं और सॉल्वर गैंग के पकड़े जाने की खबरें आने लगीं। इसी बीच महाराष्ट्र के नासिक में पुलिस ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया। जबकि 11 मई को छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी तेज हुआ। माहौल गर्माने और पुख्ता सुबूत सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय और NTA के उच्चाधिकारियों की आपात बैठक बुलाई गई। वहीं 12 मई को NTA ने अपनी गलती मानते हुए आधिकारिक तौर पर परीक्षा रद्द करने की घोषणा की और केंद्र सरकार ने इस राष्ट्रव्यापी घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए सीबीआई जांच करवाने के आदेश दे दिए। सवाल यह नहीं है कि मामले की जांच सौंप दी गई है। हर पेपर लीक होने पर जांच सौंपी जाती है। यह एक सामान्य प्रशासनिक प्र​क्रिया है, जो विरोध को शांत करने के लिए तात्कालिक कदम मात्र हो कर रह जाती है। यक्ष प्रश्न यह है कि ये पेपर लीक ही क्यों होते हैं और इनकी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध क्यों नहीं किए जाते।

नासिक पुलिस की कार्रवाई और 'सीकर कनेक्शन'

यह बात संतोषजनक है कि इस पूरे घटनाक्रम में नासिक पुलिस की कार्रवाई ने टर्निंग पॉइंट का काम किया। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कुछ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके पास परीक्षा से एक रात पहले ही प्रश्न पत्र और आंसर-की पहुंच चुकी थी। जब इन आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो इस सिंडिकेट के तार राजस्थान के प्रमुख कोचिंग हब 'सीकर' से जुड़े मिले। यह 'सीकर कनेक्शन' इस बात की ओर इशारा करता है कि यह कोई स्थानीय या छोटी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराज्यीय रैकेट है। ऐसे संकेत भी मिले हैं कि इसमें कुछ बड़े कोचिंग माफिया, शिक्षा प्रणाली के अंदर के भ्रष्ट अधिकारी और पेशेवर बिचौलिये शामिल हो सकते हैं। सीबीआई अब सीकर से लेकर नासिक तक फैले इस पूरे डार्क नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। अब अहम बात यह है कि जब संकेत और सुबूत मिल ही गए हैं तो सरकार को आइंदा पेपर लीक होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना चाहिए।

सरकार को पेपर सुरक्षा के लिए क्या प्रबंध करने चाहिए ?

दरअसल लगातार हो रहे पेपर लीक ने NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने होंगे। इसके लिए डिजिटल लॉक और रियल-टाइम ट्रैकिंग के बारे में सोचना होगा। इसके अलावा प्रश्न पत्रों के ट्रंक में जीपीएस ट्रैकिंग और स्मार्ट डिजिटल लॉक लगाए जा सकते हैं, जो परीक्षा शुरू होने से महज 15 मिनट पहले केंद्र अधीक्षक के बायोमेट्रिक और मुख्यालय से भेजे गए ओटीपी के माध्यम से ही खुलें। अगर मुमकिन हो तो हाइब्रिड परीक्षा मॉडल अपनाया जाए, जहां पेपर डिजिटल रूप से एन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में भेजा जाए और केंद्र पर ही सुरक्षित तरीके से डिक्रिप्ट होकर छात्रों के कंप्यूटर या टैब पर खुल सकें। सरकार को शिक्षा माफियाओं में खौफ पैदा करने के लिए न केवल कुसूरवारों की पूरी संपत्ति जब्त करना चाहिए, बल्कि आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का भी गठन करना चाहिए।

परीक्षा की नई तारीख की जल्द घोषणा होना चाहिए

बहरहाल,अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा ? NTA को जल्द से जल्द नई परीक्षा तिथि (Re-NEET) की स्पष्ट घोषणा करनी चाहिए ताकि असमंजस की स्थिति खत्म हो। छात्रों को इस निराशाजनक समय में अपना धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना होगा। यह लड़ाई लंबी है, लेकिन छात्रों को अपनी तैयारी को धीमा नहीं पड़ने देना है, क्योंकि अंततः उनका चयन उनकी योग्यता और दोबारा होने वाली परीक्षा के प्रदर्शन पर ही निर्भर करेगा।

Updated on:
12 May 2026 09:43 pm
Published on:
12 May 2026 09:42 pm
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