
West Bengal TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों हलचल का माहौल है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी में नाराजगी की शुरुआत पार्षद स्तर से हुई थी, जो बाद में विधायकों तक पहुंची और अब सांसदों के बीच भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से पार्टी के भीतर से अभिषेक बनर्जी को लेकर सभी बागी विधायक और सांसद सवाल उठा रहे हैं। पहले 60 पार्टी विधायक बागी हुए उसके बाद लगभग 20 सांसदों के भी पार्टी छोड़ने और बीजेपी ज्वाइन करने की चर्चा तेज है। इस घटनाक्रम पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है। किसी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है तो किसी ने इसे बीजेपी की पुरानी रणनीति बताई है।
TMC में हो रही भगदड़ पर विपक्षी नेता और राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि अगर हम इसे सिर्फ टीएमसी या ममता जी के लिए संकट मानते हैं, तो हम एक बहुत बड़े सवाल को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह टीएमसी नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिएसंकट है। इस लोकतंत्र में अब ऐसा लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोगों ने 2024 में किसे चुना। एक बार जब आप सत्ता में आ जाते हैं और आपके पास अधिकार, संसाधन और सरकारी मशीनरी होती है, तो आप 'एक देश, एक पार्टी' वाली सोच के साथ आगे बढ़ते हैं। उन्होंने अंत में जोड़ा कि मेरा मानना है कि जो कोई भी इसे सिर्फ टीएमसी के लिए संकट के तौर पर देखता है, वह ईमानदारी नहीं बरत रहा है। असल में, यह हमारे लोकतंत्र के लिए संकट है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगातार बीजेपी पर हमलावर रहते हैं। टीएमसी में टूट होने पर भी उन्होंने बीजेपी को घेरा है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं फिर से कहता हूं कि नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र का गला घोंटने की परंपरा शुरू की है। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की यह परंपरा रही है,डराना-धमकाना और पार्टियों को तोड़ना। लंबे समय से यह तरीका वह अपना रही है। यही तरीका अब TMC के साथ अपनाया जा रहा है। वे बंगाल में पहले ही 60 विधायकों को तोड़ चुके हैं और अब सांसदों को निशाना बना रहे हैं। जो सांसद और विधायक टीएसमी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े और जीते, उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने अंत में जोड़ा कि आखिरकार, आप टीएमसी के चुनाव चिह्न और ममता बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव जीते थे। अगर आप पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो आपको इस्तीफा देना ही होगा।
आपको बता दें कि कुछ महीने पहले ही आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर कर लिया था। जिसमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक सहित कई नेता शामिल थे। इस गुट का नेतृत्व राघव चड्ढा ने किया था।
शिवसेना(UBT) के सांसद संजय राउत ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर किसी को बेईमानी और धोखेबाजी की बीमारी लग जाए, तो वे कुछ भी कर सकते हैं। हमने महाराष्ट्र में ऐसा देखा है। बागी सांसदों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर इन लोगों ने ममता बनर्जी को धोखा देने का मन बना लिया है, तो आप उन्हें रोक नहीं सकते। उन्हें एक चुनौती देनी चाहिए, जो रहना चाहते हैं, वे रहें, जो जाना चाहते हैं, वे चले जाएं। हमने भी ऐसा ही किया था।