राष्ट्रीय

Manipur Violence: नागा-कुकी संघर्ष के पीछे की राजनीति, ड्रग्स और जमीन की लड़ाई

मणिपुर एकबार फिर हिंसा की आग में जल उठा है। इस बार नागा और कुकी समुदाय के लोगों के बीच हिंसक झड़प हो रही है। इसके पीछे ड्रग्स और जमीन की लड़ाई बड़ी वजह है। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
May 24, 2026
Manipur
मणिपुर हिंसा - (प्रतीकात्मक तस्वीर- ANI)

Manipur Violence: पिछले तीन सालों से पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत राज्य मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। हिंसा के चलते मणिपुर में एन बीरेन सिंह ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। लगभग 1 साल तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहा। बीते फरवरी महीने में फिर से नई सरकार का गठन हुआ। 2023 में हाईकोर्ट के एक फैसले के चलते कुकी और मैतेई के बीच हिंसा हुई थी। वहीं, अब ड्रग्स और जमीन की लड़ाई के चलते नागा और कुकी समुदाय में हिंसा भड़क उठी है।

नागा और कुकी समुदाय में हिंसक झड़प

नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव इतना बढ़ चुका है कि छह नागा पुरुष नौ दिनों से लापता हैं, 14 कुकी लोग अभी भी बंधक हैं और सैकड़ों ट्रक हाईवे पर फंसे पड़े हैं। आम लोगों की जिंदगी थम सी गई है। फरवरी 2025 में उखरूल जिले के लितान-सरेइखोंग इलाके में एक नशे में हुई मारपीट ने जो आग लगाई, वो आज पूरे मणिपुर को जला रही है। यह झगड़ा धीरे-धीरे उखरूल, कांगपोकपी और कामजोंग जिलों तक फैल गया है। मार्च में 21 नागा यात्रियों को कुकी स्वयंसेवकों ने कथित तौर पर अगवा किया। उसी दिन दो कुकी लोगों की लाशें जंगल में मिलीं। अप्रैल महीने के अंत तक बड़े पैमाने पर गोलीबारी और घर जलाने की घटनाएं हो चुकी थीं।

हिंसा की आग इंडो-म्यांमार बॉर्डर तक फैल चुकी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा की ये आग इंडो-म्यांमार बॉर्डर तक फैल चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक कामजोंग जिले के नामली, चोरो और वांगली में कुकी लोगों ने हमले किए। वहीं, इन हमलों में म्यांमार से ऑपरेट करने वाली कुकी नेशनल आर्मी के संलिप्तता की खबरें भी सामने आ रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार के लड़ाके मणिपुर के अंदर ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

हिंसा के पीछे ड्रग्स की तस्करी रुट पर कब्जा

उधर, पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस नई हिंसक झड़प के पीछे ड्रग्स की तस्करी का रास्ता और जमीन की लड़ाई है। अधिकारियों ने कहा कि मणिपुर में 2023 के हिंसा से पहले मोरेह बॉर्डर (कुकी बहुल) से नशे का सामाना आता-जाता था, लेकिन अब यह पूरी तरह बाधित हो चुका है। अब ये सामान कामजोंग जिले के सीमावर्ती इलाकों से पार करता है। यह इलाका नागा बहुल है। ऐसे में कुकी ड्रग्स लॉर्ड को इस बात की चिंता है कि कहीं इस अवैध धंधे पर नागा ड्रग्स लॉर्ड कब्जा न जमा ले।

नागा समुदाय को है इस बात का डर

वहीं, नागा समुदाय को शक है कि कुकी गुट उखरूल से कांगपोकपी तक एक लगातार कुकी-बहुल पट्टी बनाना चाहते हैं। सिनाकेइथेई गांव इसी वजह से बार-बार हमलों का निशाना बन रहा है, क्योंकि यह कुकी बस्तियों के बीच बसा एक नागा गांव है। NSCN-IM की जवाबी कार्रवाइयां इसी डर की वजह से तेज हुई हैं।

इधर, सुरक्षा एजेंसियों की निगाह इस बात पर भी गई है कि नए सीएम वाई. खेमचंद सिंह जब भी किसी अहम दौरे पर जाने वाले होते हैं, उससे ठीक पहले कोई बड़ी हिंसक घटना हो जाती है। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इम्फाल घाटी में ऐसे राजनीतिक खिलाड़ी हैं जो CM को नाकाम करना चाहते हैं।

Updated on:
24 May 2026 01:27 pm
Published on:
24 May 2026 01:25 pm
Also Read
View All