
Rajya Sabha Election 2026: मध्य प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक मुकाबला अब बड़े संवैधानिक और राजनीतिक विवाद में बदल गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय के बाहर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता धरने पर बैठ गए और पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र पर हमला बताया है।
जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल और सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग पहुंचे थे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें आयोग के अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। कांग्रेस ने अपनी तरफ से वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था।
हालांकि चुनाव अचानक दिलचस्प तब हो गया जब बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतार दिया। इसके बाद क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ की आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने का फैसला किया।
बीजेपी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। पार्टी का आरोप था कि उन्होंने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने शपथपत्र और नामांकन दस्तावेजों में नहीं दी।
रिटर्निंग ऑफिसर ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा और दस्तावेजों की जांच के बाद नामांकन निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि उम्मीदवार ने फॉर्म-26 में संबंधित न्यायिक मामले का उल्लेख नहीं किया, जिससे शपथपत्र अपूर्ण माना गया।
रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, इससे मतदाताओं को उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाती और निर्वाचन आयोग के नियमों का उल्लंघन होता है।
कांग्रेस ने फैसले को पूरी तरह राजनीतिक बताया है। पार्टी का कहना है कि जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, वह कोई आपराधिक मामला नहीं है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, तेलंगाना की अदालत से केवल एक नोटिस जारी हुआ था और मामले में अभी न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही किसी तरह का दोष सिद्ध हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि केवल एक नोटिस के आधार पर राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
मीनाक्षी नटराजन ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी शुरू से ही तीसरी सीट जीतने के लिए राजनीतिक रणनीति पर काम कर रही थी और नामांकन रद्द कराया जाना उसी योजना का हिस्सा है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी।
पटवारी ने कहा कि कानूनी और चुनावी आरोपों को लेकर कांग्रेस के विशेषज्ञों ने अपना पक्ष मजबूती से रखा था, लेकिन इसके बावजूद नामांकन रद्द कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि "जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम है। समझ से परे है कि विधानसभा सचिव की जिम्मेदारी निभाने वाले एक चुनाव अधिकारी ने बीजेपी के एजेंडे को राजनीतिक रूप कैसे दे दिया।"
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में चुनाव आयोग का रुख किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे अपनी आपत्ति और कानूनी पक्ष आयोग के सामने रखना चाहते थे।
जयराम रमेश जब चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचे तो उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने आयोग के बाहर धरना शुरू कर दिया। कुछ नेताओं ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'लोकतंत्र की हत्या' की जा रही है।
चुनाव आयोग के बाहर धरने में शामिल कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन बिना किसी ठोस आधार के निरस्त किया गया है।
पायलट ने कहा, "हमारे उम्मीदवार का चुनाव बिना किसी आधार के रद्द कर दिया गया। लोकतंत्र में अगर हम चुनाव आयोग के पास नहीं जाएंगे तो और कहां जाएंगे?" अदालत का रुख करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी। पायलट ने पूरे घटनाक्रम को 'लोकतंत्र की खुली हत्या' बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और निष्पक्ष फैसला देना चाहिए।
दूसरी ओर बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया है। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नामांकन पत्र में जरूरी जानकारी छिपाई गई थी और रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के तहत फैसला लिया है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी को न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। वहीं मंत्री राकेश सिंह ने भी इसे 'सत्य की जीत' करार देते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी अधूरी और भ्रामक थी।