
Shivchandra Ram Resignation: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और एससी-एसटी प्रकोष्ठ (SC/ST Cell) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान शिवचंद्र राम भावुक भी नजर आए और उनकी आंखें भर आईं।
शिवचंद्र राम के इस्तीफे के बाद जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे तो शिवचंद्र राम ने कहा कि पार्टी ने उनके साथ नाइंसाफी की है। बातचीत के दौरान वह काफी भावुक दिखे और रोने लगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वह इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते और उचित समय पर अपनी बात विस्तार से रखेंगे। इस्तीफे के बाद अलग-अलग तरह की चर्चाएं होने लगी हैं। कई लोग इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने से शिवचंद्र राम नाराज चल रहे थे। पार्टी नेतृत्व से उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उन्हें उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि इसी फैसले से असंतुष्ट होकर उन्होंने संगठन से दूरी बनाने का निर्णय लिया। RJD ने विधान परिषद चुनाव के लिए सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद से ही शिवचंद्र राम की नाराजगी की चर्चा तेज हो गई थी।
बातचीत के दौरान पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने कहा, 'साल 1990 से ही लालू प्रसाद के प्रति समर्पित रहे हैं। लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के प्रति आभारी है, राजद ने उन्हें विधायक और मंत्री बनाया, लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया।'
शिवचंद्र राम ने केवल एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि उन्होंने पार्टी में अपने सभी पदों को छोड़ने की घोषणा की है। इसे RJD के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते रहे हैं। उनके इस्तीफे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी के अंदर नेताओं की नाराजगी बढ़ रही है।
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पार्टी के MLC उम्मीदवार को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए थे। अब शिवचंद्र राम के इस्तीफे ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। यह घटनाक्रम पार्टी संगठन के भीतर चल रही हलचलों की ओर इशारा करता है। फिलहाल इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।