
Sanjay Singh on BJP: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट और नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विपक्षी दलों को तोड़ने की राजनीति कर रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तो सिर्फ दाऊद इब्राहिम का बीजेपी में आना बाकी रह गया है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय सिंह ने कहा कि TMC में जो कुछ हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि एक और राज्यसभा सांसद ने इस्तीफा दे दिया है और यह पूरा घटनाक्रम विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
AAP सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का सिद्धांत 'डराओ, धमकाओ और पार्टियां तोड़ो' बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना, एनसीपी और आम आदमी पार्टी को तोड़ने का काम किया और अब तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाया जा रहा है।
संजय सिंह ने कहा, "कोई ऐसा विपक्षी दल नहीं बचा है जिसे तोड़ने की कोशिश बीजेपी और मोदी सरकार ने न की हो।"
बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए संजय सिंह ने कहा कि जिन नेताओं को बीजेपी पहले भ्रष्टाचार और बेईमानी का प्रतीक बताती है, बाद में उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लेती है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जिसे ये लोग बेईमान और भ्रष्टाचारी बताते हैं, बाद में उसी को अपनी पार्टी में शामिल कर लेते हैं। अब तो बीजेपी में सिर्फ दाऊद इब्राहिम का आना बाकी रह गया है, बाकी सब आ चुके हैं।"
संजय सिंह ने TMC में चल रहे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि अगर देश ने इस तरह की राजनीति के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो चुनाव और जनप्रतिनिधियों की भूमिका का महत्व खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा, "टीएमसी के साथ जो किया जा रहा है, वह लोकतंत्र का गला घोंटने की कार्रवाई है। अगर देश इसके खिलाफ नहीं जागा तो फिर चुनाव, सांसद और विधायक जैसी संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।"
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।