राष्ट्रीय

‘असली TMC’ के दावे पर कानूनी पेंच, बागी सांसदों की मांग पर क्या फैसला लेंगे स्पीकर?

TMC Split: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद 'असली TMC' के रूप में मान्यता मांगने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने वाले हैं। जानिए दलबदल कानून, 22 सांसदों के दावे और पूरे विवाद का कानूनी पेच।

4 min read
Jun 14, 2026
असली TMC, TMC Rebellion, TMC Rebel MPs, Mamata Banerjee, Om Birla, TMC Crisis, Dal Badal Law, Kakoli Ghosh Dastidar, Saayoni Ghosh, TMC Split
ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष और ममता बनर्जी (फोटो - आईएएनएस, एएनआई)

TMC Crisis Legal Angle Speaker Om Birla: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शुरू हुई बगावत अब संसद तक पहुंच गई है। पार्टी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर खुद को 'असली TMC' के रूप में मान्यता देने की मांग करने वाले हैं। बागी खेमे की सांसद काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि उनके साथ अब 22 सांसद हैं। ऐसे में नजर इस बात पर टिकी है कि बागी सांसदों की इस मांग पर लोकसभा अध्यक्ष क्या फैसला लेते हैं।

दिल्ली में बागी सांसदों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी सांसदों की बैठक हुई, जिसमें सायोनी घोष, प्रसून बनर्जी समेत कई सांसद पहुंचे। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे भी वहां मौजूद रहे। दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी पार्टी को एकजुट रखने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन लगातार सामने आ रहे राजनीतिक और कानूनी संकट उनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

22 सांसदों का दावा, स्पीकर के सामने रखेंगे 'असली TMC' की मांग

बागी सांसदों का समूह सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करेगा। काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि अब उनके साथ 22 सांसदों का समर्थन है। इससे पहले उन्होंने 20 सांसदों के समर्थन की बात कही थी। बाद में 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी सामने आया था।

बागी सांसद संसद में अलग बैठने की व्यवस्था और खुद को 'असली TMC' के रूप में मान्यता देने की मांग करने जा रहे हैं। इसी मांग ने पूरे विवाद को राजनीतिक के साथ-साथ कानूनी मोड़ भी दे दिया है।

दल-बदल कानून में कहां फंसता है मामला?

बागी सांसदों की मांग के बाद अब चर्चा दल-बदल कानून की भी हो रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10वीं अनुसूची के तहत किसी अलग गुट को मान्यता मिलने के लिए पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों या विधायकों का समर्थन होना जरूरी माना जाता है।

TMC के मामले में विधानसभा में 80 विधायकों में से 58 विधायक बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं। वहीं लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसदों के बागी खेमे के साथ होने का दावा किया जा रहा है। बागी पक्ष का तर्क है कि उनके पास दोनों सदनों में दो-तिहाई से ज्यादा समर्थन है।

इसी आधार पर बागी नेता अलग पहचान की मांग कर रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी के पास होता है।

अंतिम फैसला स्पीकर का, कोर्ट भी पहुंच सकता है मामला

बागी सांसदों की मांग पर अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना होगा। यही कारण है कि सोमवार की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि स्पीकर कोई फैसला लेते हैं तो ममता बनर्जी का गुट उसे अदालत में चुनौती दे सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि स्पीकर के सामने रखे जाने वाले दावों और दस्तावेजों पर क्या रुख अपनाया जाता है।

सायोनी-माला दिल्ली पहुंचीं, बढ़ीं अटकलें

जादवपुर सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय रविवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंचीं। दोनों नेताओं के नाम बागी खेमे के साथ जोड़े जा रहे हैं।

दिल्ली पहुंचने पर सायोनी घोष से जब पक्ष बदलने की अटकलों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी। सही समय आने पर ही बोलूंगी।"

इस बीच ममता बनर्जी ने सायोनी घोष को युवा तृणमूल के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। माला रॉय को भी पार्टी के महिला संगठन की जिम्मेदारी से हटाया गया है।

'असली पार्टी' की लड़ाई में क्यों याद आ रही है शिवसेना की बगावत?

TMC में जारी घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में 2022 में हुई शिवसेना की बगावत से भी की जा रही है। जून 2022 में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद मामला विधानसभा अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग तक पहुंचा था।

बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को असली शिवसेना माना था और विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग खारिज कर दी थी। इसी दौरान शिवसेना का चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को मिला था। राजनीतिक विश्लेषक TMC के मौजूदा संकट की तुलना उसी घटनाक्रम से कर रहे हैं।

कानूनी नोटिस से बढ़ा दबाव

राजनीतिक संकट के बीच काकोली घोष दस्तीदार के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय और सोनाली गुहा को कानूनी नोटिस भेजा है।

बैद्यनाथ का कहना है कि उन्होंने अपने लिए या अपनी मां के लिए बारासात विधानसभा सीट से कभी टिकट नहीं मांगा था। उन्होंने संबंधित नेताओं से कथित तौर पर दिए गए बयानों को वापस लेने और सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

ममता के पास कितनी ताकत बची?

बागी खेमे के दावों के अनुसार, TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद अलग हो चुके हैं। ऐसे में लोकसभा में ममता बनर्जी के पास केवल 8 सांसद बचते हैं। राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसदों में से 4 इस्तीफा दे चुके हैं, जिसके बाद वहां संख्या 9 रह गई है।

विधानसभा में भी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है। चुनाव में जीती गई 80 सीटों में से 58 विधायक बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं। इस हिसाब से ममता बनर्जी के पास 22 विधायक बचते हैं। अब पूरा मामला लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है। बागी सांसदों के 'असली TMC' होने के दावे पर क्या फैसला होता है।