West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव से पहले हुमायूं कबीर ने मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग उठाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। ओवैसी के साथ गठबंधन के बाद कबीर ने कहा कि अब डिप्टी सीएम नहीं, बल्कि सीएम पद के लिए आवाज उठाएंगे।
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन के बाद जन उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब बंगाल में मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग को लेकर आवाज उठाई जाएगी।
आईएएनएस से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा कि वह पहले भी राज्य में मुस्लिम उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन अब जब एआईएमआईएम उनके साथ है तो उनकी पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए भी दावेदारी पेश करेगी। उन्होंने कहा, ''हम पहले डिप्टी सीएम की बात कर रहे थे, लेकिन अब हम चाहते हैं कि बंगाल का नेतृत्व मुस्लिम समुदाय से हो।''
कबीर ने अपने बयान में राज्य की मुस्लिम आबादी का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में करीब 37 फीसदी मुस्लिम आबादी है और चुनावी सूची में उनकी हिस्सेदारी भी अहम है। ऐसे में इस समुदाय को शीर्ष नेतृत्व में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
हुमायूं कबीर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में राज्य की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रामनवमी जैसे आयोजनों को राजनीतिक रूप दिया गया, जिससे समाज में विभाजन पैदा हुआ।
कबीर ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर भी अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि वे भी वोट बैंक की राजनीति कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू वोटों को साधने के लिए मंदिर निर्माण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में नए राजनीतिक गठबंधनों और तीखी बयानबाजी के बीच चुनावी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अलग-अलग दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प होता नजर आ रहा है। एक ओर नए गठबंधन बनने से वोट बैंक में बदलाव की संभावनाएं बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बयान चुनावी ध्रुवीकरण को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ये नए राजनीतिक समीकरण, गठबंधन और बयानबाजी मतदाताओं के रुख को किस हद तक प्रभावित करते हैं और आखिरकार चुनाव नतीजों में इसका क्या असर दिखाई देता है।
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