AAP vs Modi: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के संसाधनों की कटौती की अपील पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या देश भारी आर्थिक मंदी की चपेट में है।
AAP vs Modi: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के संसाधनों की कटौती की अपील पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या देश भारी आर्थिक मंदी की चपेट में है और क्या सरकार 'आर्थिक आपातकाल' की तैयारी कर रही है। देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी मुद्रा बचाने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के सुझावों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को जनता के सामने स्पष्ट किया जाए।
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री की अपील को असामान्य बताते हुए कहा कि नागरिकों से खाने-पीने, घूमने-फिरने और सोना खरीदने में कटौती करने के लिए कहना बेहद चौंकाने वाला है। उन्होंने पूछा, क्या देश किसी बड़े आर्थिक जाल में फंस गया है? आज तक इतिहास में ऐसी अपील कभी नहीं की गई। प्रधानमंत्री जी को बताना चाहिए कि आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और देश के हालात इतने खराब क्यों हैं?
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पेट्रोल और डीजल मंहगा होने की आशंका जाहिर की और प्रधानमंत्री की ओर से की गई अपील को लेकर उनपर तंज कसा। संजय सिंह ने कहा, प्यारे देशवासियों चुनाव तक मोदी जी ने आपका बोझ उठाया, चुनाव खत्म आपका इस्तेमाल खत्म। अब देशभक्ति के नाम पर लाइन में लग जाओ। गैस महंगी हो गई अब पेट्रोल डीजल भी मंहगा होगा। आप देश भक्ति के नाम पर पेट्रोल डीजल गैस का इस्तेमाल न करो, सोना न खरीदो, खाने के तेल का भी इस्तेमाल न करो। लेकिन मोदी जी अपनी रैलियों में लाखों लोगों को भर-भर के लाएंगे। विदेश यात्राएं करेंगे, खूब तेल फूकेंगे, उनके लोग सोना तो क्या पूरे देश की सम्पतियां खरीद लेंगे लेकिन आप फटीचर बने रहिए। और हां अगर आपने मोदी जी की मंहगाई बर्दाश्त नहीं की तो अंधभक्त और गोदी मीडिया आपको पाकिस्तानी घोषित कर देगा।
दरअसल, यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री के पेट्रोल-डीजल की बचत और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए दिए गए सुझावों के बाद शुरू हुआ है। विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक विफलता के तौर पर देख रहा है, जबकि सरकार इसे भविष्य की बचत और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है।