नई दिल्ली

शादी करो और टैक्स बचाओ! राघव चड्ढा ने संसद में पेश किया ‘जॉइंट ITR’ का अनोखा आइडिया

Raghav Chadha: दरअसल, टैक्स बचाने के लिए शादी के सुझाव के पीछे राघव चड्ढा ने जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न का तर्क दिया है। उन्होंने संसद में समझाया कि इस व्यवस्था के तहत, यदि पति और पत्नी दोनों कामकाजी हैं, तो उन्हें अलग-अलग टैक्स फाइल करने और अलग-अलग छूट झंझट नहीं होगी। इसके बजाय, कपल अपनी आय को मिलाकर एक साथ टैक्स भर सकेंगे, जिससे उनकी कुल टैक्स देनदारी कम हो सकती है और फाइलिंग की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी, जानिए कैसे?

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Mar 16, 2026

Raghav Chadha: संसद में चर्चा के दौरान AAP सांसद राघव चड्ढा ने चुटीले अंदाज में कहा, टैक्स बचाना है तो शादी कर लो। उनके इस मजाकिया बयान के पीछे दरअसल जॉइंट ITR (Joint Income Tax Return) का एक गंभीर फॉर्मूला छिपा था। उन्होंने सदन को समझाया कि इस सिस्टम के तहत कामकाजी पति-पत्नी को अलग-अलग टैक्स भरने या अलग-अलग रिबेट (छूट) लेने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, दोनों की आय, बचत और निवेश को एक साथ जोड़कर टैक्स कैलकुलेट किया जाएगा। राघव चड्ढा के अनुसार, इस साझा व्यवस्था से पूरे परिवार की टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है और उन्हें बड़ी वित्तीय राहत मिल सकती है। अपनी इस मांग को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने सदन के सामने तीन प्रभावी उदाहरण भी पेश किए।

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परिवार के रूप में टैक्स में राहत मिलनी चाहिए

राघव चड्ढा ने बताया कि भारत में अभी केवल व्यक्तिगत आय पर टैक्स लगता है, जिससे पति-पत्नी को अलग-अलग ITR फाइल करना पड़ता है। उनकी आय को एक साथ नहीं जोड़ा जाता, जबकि असलियत में एक शादीशुदा जोड़े के घर के खर्च, भविष्य के निवेश और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारियां साझा होती हैं। चड्ढा का तर्क है कि जब जीवन की हर वित्तीय जरूरत एक है, तो टैक्स सिस्टम में उन्हें अलग-अलग मानना तर्कसंगत नहीं है। उन्हें एक परिवार के रूप में टैक्स में राहत मिलनी चाहिए।

दुनिया के देशों से सीख

राघव चड्ढा ने सदन में बताया कि दुनिया के कई विकसित देशों में पति-पत्नी को एक आर्थिक इकाई माना जाता है, जहां उन्हें मिलकर टैक्स भरने की सुविधा मिलती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत में शादीशुदा जोड़े घर के खर्चे तो मिलकर उठाते हैं, लेकिन टैक्स भरते समय सिस्टम उन्हें 'अपरिचित' मान लेता है। चड्ढा ने जोर दिया कि जब परिवार का बजट एक है, तो टैक्स की गणना भी साझा होनी चाहिए। अपनी इस बात को और स्पष्ट करने के लिए उन्होंने तीन उदाहरण भी पेश किए।

समान इनकम वाले परिवार अलग-अलग टैक्स भरते

मान लीजिए 2 परिवार एक ही शहर में रहते हैं और एक ही कंपनी में नौकरी करते हैं। एक परिवार 20 लाख कमाता है, दूसरा परिवार भी 20 लाख रुपये कमाता है। दोनों की कमाई समान है, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न अलग-अलग फाइल करते हैं। आगे समझिए कैसे।

पहला उदाहरण- एक परिवार राहुल और रिचा का है। दोनों साल के 10-10 लाख कमाते हैं। इनकम हुई 20 लाख रुपये। अब दोनों की व्यक्तिगत आमदनी 12-12 लाख से कम है, इसलिए रिबेट के कारण दोनों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।

दूसरा उदाहरण- दूसरा परिवार नमन और निशा का है। नमन साल का 20 लाख कमाते हैं। निशा ने अपनी नौकरी बच्चों का ध्यान रखने और सास-ससुर की देखभाल के लिए छोड़ दी है। अब इनकी भी फैमिली इनकम 20 लाख है, लेकिन मामला व्यक्तिगत होने के कारण इनको 192400 रुपये टैक्स भरना पड़ता है।

जॉइंट ITR से परिवारों को बड़ी बचत: उदाहरण से समझिए गणित

राघव चड्ढा ने एक उदाहरण के जरिए जॉइंट फाइलिंग के फायदों को समझाया। मान लीजिए एक शादीशुदा जोड़ा है, जहां पति साल के 18 लाख रुपये और पत्नी 6 लाख रुपये कमाती है। पूरे परिवार की कुल आय 24 लाख रुपये है। मौजूदा सिस्टम में पति को अपनी कमाई पर करीब 1.5 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता है, जबकि पत्नी की आय कम होने के कारण उसका टैक्स शून्य होता है। यानी पूरे परिवार की जेब से 1.5 लाख रुपये टैक्स में चले जाते हैं। चड्ढा का तर्क है कि यदि दोनों की आय और टैक्स छूट को मिलाकर जॉइंट फाइलिंग हो, तो परिवार की टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है और उनकी बचत बढ़ सकती है।

इनकम के साथ रिबेट भी जुड़ने से होगा फायदा

राघव चड्डा ने हाइपोथिटिकल सिचुएशन को समझाते हुए कहा- अगर इनकी इनकम और रिबेट को मिला दिया जाए, तो इनकी कुल आमदनी 24 लाख रुपये और रिबेट भी 24 लाख रुपये होगा, तो दोनों को घटाने पर इनकम टैक्स शून्य हो जाएगा। इसलिए मैं प्रस्ताव रखता हूं कि भारत में इनकम टैक्स फाइल करने का ज्वाइंट सिस्टम लाया जाए।

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