
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के दौरान राहुल गांधी सड़क पर लेट गए, जिसके बाद पुलिसकर्मियों को उन्हें उठाकर वहां से हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। बता दें कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज के विरोध में राहुल गांधी लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च कर रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरना दे रहे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को वहां से हटाने के लिए मौके पर पुलिस अधिकारी पहुंचे। इस दौरान राहुल गांधी खड़े थे और उनके हाथों में सफेद प्लास्टिक की पट्टी बंधी नजर आ रही थी। एक पुलिस अधिकारी उन्हें हाथ पकड़कर खींचने का प्रयास कर रहा था।
इस दौरान राहुल गांधी और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। राहुल गांधी काफी देर तक सड़क पर ही डटे रहे और हटने से इनकार कर दिया। वहीं समर्थक और कांग्रेसी नेता जमकर नारेबाजी करते रहे।
हालांकि मौके से राहुल गांधी को हटाना पुलिस के लिए इतना आसान नहीं रहा। वे अपने समर्थकों के साथ जमीन पर लेट गए। पुलिसकर्मी उनका हाथ पकड़कर खींचने का प्रयास करते रहे, लेकिन कांग्रेसी नेता और उनके समर्थक उन्हें रोकने का प्रयास करते रहे।
आखिरकार लंबे प्रयासों के बाद दिल्ली पुलिस ने जवानों ने राहुल गांधी को घेर लिया और उठा लिया। बता दें कि राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से मार्च करते हुए लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के निकट पहुंचे थे।
हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि हम छात्रों के खून का हिसाब मांगने प्रधानमंत्री के घर आए हैं। युवाओं की गुनहगार मोदी सरकार जवाबदेही और संसद में चर्चा से भाग नहीं सकती। छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगता है कि वह बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने और उनके खिलाफ क्रूरता के लिए नरेंद्र मोदी, अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्हें कई पुलिसकर्मियों ने घेर लिया और फिर विपक्ष के दूसरे नेताओं के साथ पुलिस की गाड़ी में ले जाया गया। यह विरोध प्रदर्शन संसद तक छात्रों के मार्च में पुलिस के दखल के एक दिन बाद हुआ। इससे पहले राहुल गांधी ने प्रश्न-पत्र लीक मामले पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ राजधानी में पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने के लिए अपने धरने में शामिल होने का आह्वान किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के अधिकारों और उनकी जायज मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि खरगे ने कहा कि इस बुजदिल तानाशाह सरकार को लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर जवाब देना होगा। मोदी और शाह हमारे युवाओं के गुनहगार हैं, उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा। राहुल गांधी को जबरन धरना स्थल से उठाने को कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शर्मनाक बताया। उन्होंने एक्स पर पुलिस कार्रवाई का एक फोटो शेयर करते हुए लिखा 'मोदी की तानाशाही देखिए। विपक्ष के नेता के साथ ऐसा सुलूक किया जा रहा है। शर्मनाक!' उन्होंने कहा कि यह भी नहीं बताया जा रहा है कि गांधी को हिरासत में लेकर किस थाने में ले जाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास के समक्ष धरने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पवन खेड़ा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, सांसद नासिर हुसैन, मणिकम टैगोर, इमरान मसूद, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पार्टी नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा , राजीव शुक्ला, अमरिंदर सिंह राजा बराड़, गुरदीप सिंह सप्पल तथा बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।
इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिले। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा पेपर लीक पर संसद में चर्चा की मांग पर अड़ी रही। कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि पार्टी अपनी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रखेगी, हालांकि जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार थी और आरोप लगाया कि बाद में कांग्रेस ने मंत्री के इस्तीफे को शर्त बना दिया।