
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अपने बयानों के जरिए चर्चा में रहने वाले भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं की सोशल मीडिया रैंकिंग को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तंज कसा है। जुलाई महीने में सोशल मीडिया पर प्रवक्ताओं की एक्टिविटी से जुड़ी एक लिस्ट में भाजपा के शहजाद जय हिंद आठवें स्थान पर रहे, जबकि पहले सात स्थान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं के नाम हैं। इसी को लेकर पूनावाला ने कहा कि इन नेताओं की अधिक प्रतिक्रिया का एक कारण दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों का उनके साथ लगातार जुड़ना और अपनी असहमति जाहिर करना भी है। बता दें कि यह लिस्ट databeings की ओर से जारी की गई थी।
दरअसल जुलाई 2026 में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं की सोशल मीडिया पर कुल प्रतिक्रियाओं के आधार पर एक सूची जारी की गई। इसमें कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत 27.02 लाख से अधिक सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं के साथ पहले स्थान पर हैं। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह दूसरे और राष्ट्रीय जनता दल की प्रियंका भारती तीसरे स्थान पर हैं। कांग्रेस के पवन खेड़ा चौथे और आलोक शर्मा पांचवें स्थान पर हैं। सूची में भाजपा के शहजाद जय हिंद 5,55,968 प्रतिक्रिया के साथ आठवें स्थान पर हैं।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा के संबित पात्रा 5,10,988 प्रतिक्रिया के साथ नौवें स्थान पर हैं। सूची को शेयर करते हुए लिखा गया कि भाजपा में सबसे ऊपर रहने वाले प्रवक्ता आठवें स्थान पर है। पोस्ट में शहजाद को भाजपा का सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला प्रवक्ता बताया और पार्टी को सोशल मीडिया पर प्रदर्शन और बेहतर करने की जरूरत बताई। इस पर पूनावाला ने जवाब देते हुए कहा कि पहले सात स्थानों पर कांग्रेस और अन्य दलों के प्रवक्ता इसलिए हैं क्योंकि राइट विंग विचारधारा से जुड़े लोग उनके साथ बड़ी संख्या में जुड़ते हैं और अपनी बात रखते हैं। उनका कहना था कि यदि इस तरह की पोस्ट को हटा दिया जाए तो इन प्रवक्ताओं की रैंकिंग 30वें स्थान तक पहुंच सकती है।
गौरतलब है कि हाल ही में शहजाद पूनावाला ने एक्स प्रोफाइल पर बायो-अपडेट कर भाजपा का जिक्र हटा लिया था। इससे उनके भाजपा छोड़ने की चर्चा तेज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने पुराने इंटरव्यूज के कई क्लिप्स री-शेयर किए थे, जिनमें वे सक्रिय राजनीति को अलविदा कहने की बात कर रहे थे। बता दें कि शहजाद ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। साल 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने वंशवाद के खिलाफ खुलकर बगावत कर दी थी। इसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। कांग्रेस छोड़ने के बाद वे बीजेपी में शामिल हुए थे।