
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्होंने साफ कहा है कि लोग उनके अनशन की चिंता करने के बजाय 20 जुलाई को होने वाले शांतिपूर्ण संसद मार्च में शामिल हों। इस बीच उनकी सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो में कहा कि उनकी तबीयत पहले जैसी नहीं है, लेकिन उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत है। उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में उनका साथ देना चाहते हैं तो 20 जुलाई को संसद तक निकाले जाने वाले शांतिपूर्ण मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से ही आगे बढ़ाया जाएगा।
उधर, वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी। इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के सामने मामला आया था, लेकिन बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण सरकारी वकील अदालत में मौजूद नहीं हो सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई गुरुवार के लिए तय कर दी।
हाईकोर्ट ने याचिका की प्रति अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि मामले पर जल्द सुनवाई हो सके।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अदालत से कहा कि एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी का पूरे देश के सामने अपनी जान जोखिम में डालना बेहद दुखद स्थिति है। उन्होंने अदालत से केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि वे सोनम वांगचुक से बातचीत करें और उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। याचिका में जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फोर्स फीडिंग की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
इस बीच वांगचुक की सेहत को लेकर देशभर में चिंता बढ़ती जा रही है। साहित्य, कला, सिनेमा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भी उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई लंबी है और देश को आगे भी उनके नेतृत्व और आवाज की जरूरत रहेगी।
हालांकि इन सभी अपीलों के बावजूद सोनम वांगचुक अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने एक बार फिर लोगों से कहा कि उनकी सेहत की चिंता करने के बजाय 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें। अब सभी की नजरें आज होने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां उनकी सेहत और आगे की कार्रवाई को लेकर अहम फैसला सामने आ सकता है।