आठवी पास युवक ने अपने अपने दसवी पास दोस्तों के साथ मिलकर नोएडा के बड़े इंजीनियर को ठग लिया। इन्हाेंनेे इंजीनियर काे लंदन में संपत्ति दिलाने का झांसा दिया और 60 लाख रुपये ठग लिए।
नोएडा. सेक्टर 36 स्थित साइबर अपराध थाना पुलिस (Noida Police) ने लंदन में 12.5 मिलियन पाउंड की संपत्ति वारिस बनाने के नाम पर एक आईटी इंजीनियर से 60 लाख रुपये ठगने के तीन आरोपियों ( cyber criminal ) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके फर्जी कागजात पर खुलवाए गए बैंक खातों में जमा 13 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं। पुलिस ने आरोपियों से वारदात में प्रयोग तीन मोबाइल, एक सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और दिल्ली के एक समाचार पत्र का पहचान पत्र बरामद किया है।
अकीलुद्दीन, अनीस और अस्लीम खान नाम के तीन युवकों ने फर्जी ईमेल भेज कर ग्रेनो वेस्ट निवासी तुषार वार्ष्णेय आईटी इंजीनियर से 60 लाख रुपये ठग लिए। साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक रीता यादव ने बताया कि तरुण वार्ष्णेय ने साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी थी कि उनके पास आठ जनवरी 2019 को लंदन के कथित वकील ब्रुज ऐडी के नाम से ईमेल आया था। ईमेल में लिखा था कि स्वर्गीय ब्रज वार्ष्णेय निवासी लंदन की सपरिवार सड़क हादसे में वर्ष 2005 में मौत हो गई थी। गोत्र मिलने पर मृतक का नॉमिनी बनने के लिए तरुण को प्रस्ताव दिया गया। नॉमिनी बनने के बाद मृतक के खाते में 12.5 मिलियन पाउंड उनके खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। कथित वकील ने कहा कि रकम का 50 प्रतिशत हिस्सा उसे देना होगा। इस तरह पीड़ित आरोपी के झांसे में आ गया। आरोपियों ने उससे 60 लाख रुपये ठग लिए।
साइबर क्राइम ( cyber crime ) थाने की प्रभारी निरीक्षक रीता यादव ने बताया कि मामले की जांच के बाद पता चला कि बरेली का एक गिरोह है जो इस तरह से फर्जी मेल भेजकर लोगों से ठगी कर रहा है। जांच के दौरान पुलिस ने बरेली के गांव तिलयापुर, थाना सीवी गंज से अकीलुद्दीन, अनीस अहमद और असलीम खान को गिरफ्तार कर लिया। इनमें अकीलुद्दीन और अनीस दसवीं पास है जबकि असलीम खान आठवीं पास है। पुलिस गिरोह के अन्य आरोपियों के बारे में पता लगा रही है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आरोपी बरेली के दंतिया गांव के रहने वाले जाबिर और राशिद से आईडी व अन्य दस्तावेज लेकर आधार कार्ड में नाम-पता बदलवा कर हरियाणा, पंजाब से लेकर अन्य राज्यों में बैंक खाते खुलवाते हैं। उनका एटीएम, पासबुक, चेक बुक, रजिस्टर मोबाइल नंबर अपने पास रख लेते हैं। इसके बदले में प्रति बैंक खाते बीस हजार रुपये देते थे। जाबिर और राशिद ने इस गिरोह के लिए करीब 95 बैंक खाते खुलवाए हैं। पुलिस को अभी 25 खातों में 13 लाख मिले हैं जिन्हें फ्रीज करा दिया गया है। इसके अलावा आरोपियों के पास से 3 मोबाइल, 5 डेबिट कार्ड, प्रेस कार्ड समेत अन्य कागजात मिले हैं।