
Bankipur By Election Voting:बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए आज (30 जुलाई) मतदान जारी है। हालांकि वोटिंग की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही। सुबह 9 बजे तक केवल 4.61 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में इसी समय तक 7.12 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं, सुबह 11 बजे तक मतदान प्रतिशत बढ़कर 11.50 फीसदी पहुंच गया। कम मतदान के बावजूद एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही। बड़ी संख्या में 'Gen Z' यानी युवा मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे। खास बात यह रही कि इस वर्ग में युवतियों की भागीदारी सबसे अधिक देखने को मिली। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस बार Gen Z का वोट किसके पक्ष में जाएगा? हाल ही में यही युवा वर्ग NEET पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरा था।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र वीआईपी और युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या के लिए जाना जाता है। इसी क्षेत्र में पटना यूनिवर्सिटी, एनआईटी पटना, बीएन कॉलेज, साइंस कॉलेज, एएन कॉलेज, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थान, बड़े कोचिंग सेंटर और छात्रावास स्थित हैं। हर साल हजारों छात्र पढ़ाई के लिए यहां आते हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 3.79 लाख मतदाता हैं। इनमें लगभग 1.20 से 1.35 लाख मतदाता 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हैं। यानी कुल मतदाताओं का लगभग एक-तिहाई हिस्सा युवा है। यही वजह है कि इस चुनाव में Gen Z को सबसे बड़ा निर्णायक फैक्टर माना जा रहा है।
युवा मतदाताओं की अच्छी भागीदारी के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या बांकीपुर इस बार कोई नया राजनीतिक संदेश देगा। हालांकि मतदान करने के बाद अधिकांश युवा मतदाता खुलकर किसी पार्टी के समर्थन में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि उन्होंने विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान किया है।
NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों ने युवाओं को पहले की तुलना में अधिक राजनीतिक रूप से सक्रिय किया है। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। इन आंदोलनों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पूरे बिहार में चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार युवा मतदाताओं की भूमिका अहम हो सकती है। उनका कहना है कि यह वर्ग जाति और धर्म से इतर शिक्षा, रोजगार और बेहतर शासन जैसे मुद्दों पर मतदान कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती है। हालांकि इसका लाभ किस दल को मिलेगा, इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
साथ ही बिहार का चुनावी इतिहास यह भी बताता है कि हर आंदोलन या जनाक्रोश सीधे वोटों में बदल जाए, यह जरूरी नहीं होता। इसलिए Gen Z का रुझान चुनाव परिणामों पर कितना असर डालेगा, इसका जवाब 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही साफ हो सकेगा।