
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को 28 साल के भरत भूषण तिवारी के हुए एनकाउंटर को लेकर बवाल मचा हुआ है। वैसे तो पुलिस इस घटना को जवाबी कार्रवाई बता रही है, लेकिन जनता की नजर में भरत तिवारी एक नायक के तौर पर उभरते दिख रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि एनकाउंटर के कई दिनों बाद भी लोग उस जगह पर आ रहे हैं जहां भरत तिवारी को गोली मारी गई थी। हद तो तब हो गई जब वहां पहुंचे एक युवक ने घटनास्थल की मिट्टी को अपने गमछे में बांधा और अपने साथ ले गया। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बिलौटी गांव के उस खेत में, जहां यह मुठभेड़ हुई थी, दर्जनों युवा इकट्ठा हैं। जिसमें से एक युवक जमीन पर बैठकर वहां की मिट्टी को समेट रहा है और सिर झुकाकर आशीर्वाद ले रहा है।
जब उस युवक से पूछा गया कि वह इस मिट्टी को गमछे में बांधकर कहां ले जा रहा है और इसका क्या करेगा, तो युवक ने कहा, "इस मिट्टी को हम अपने साथ ही रखेंगे सर। यह मिट्टी हमें हमेशा इस बात की याद दिलाती रहेगी कि वो एक शेर था। यह कोई अंधभक्ति नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारी सच्ची मोहब्बत थी। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता था जो गरीबों और मजलूमों के हक की लड़ाई के लिए जीता-मरता था। आज व्यवस्था ने उसे मार दिया, लेकिन उसकी यादें इस मिट्टी के जरिए हमारे बीच जिंदा रहेंगी।"
युवक ने आगे कहा कि भले ही आज सत्ता के रसूख के कारण इस एनकाउंटर को सही ठहराने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन सबको उसके कर्मों का फल भुगताता है। युवक ने कहा, "आज आपने एक बेकसूर मां से उसका बच्चा छीन लिया। आपने सोचा कि एक एनकाउंटर करके आप सबको डरा देंगे? समाज सजा न दे, शासन-प्रशासन सजा न दे, लेकिन ऊपर वाला सब देख रहा है। कर्मा हमेशा वापस लौटता है। सोच लीजिएगा, आज जिसने भी यह बुरा किया है, भगवान एक दिन ऐसा वक्त लाएगा कि आपके सामने खाना रखा रहेगा, आपके पास उंगलियां भी होंगी, लेकिन आप उस खाने को अपने मुंह तक नहीं उठा पाएंगे।"
इस पूरे घटना की स्क्रिप्ट 16 जून को शुरू हुई थी, जब भरत तिवारी ने फेसबुक पर लाइव आकर हाथ में अवैध हथियार लहराते हुए व्यवस्था को चुनौती दी थी और कहा था कि सरेंडर नहीं, युद्ध होगा। इसके बाद जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची तो उसने थानाध्यक्ष पर ही कट्टा तान दिया, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।
17 जून की सुबह जब एसटीएफ और पुलिस की भारी टीम बिलौटी गांव के बधार में उसे घेरने पहुंची, तो भरत तिवारी फिर से फेसबुक पर लाइव आया। परिजनों और वायरल वीडियो के दावों के मुताबिक, एनकाउंटर से ठीक पहले भरत तिवारी ने पुलिस के कहने पर अपनी पिस्टल दूर फेंक दी थी और आत्मसमर्पण करने का इशारा किया था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने उसके पैरों और घुटनों के ऊपर गोलियां दाग दीं, जिससे इलाज के लिए पटना ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों और जनाक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और संदेहास्पद पहलुओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाने के लिए पटना हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच कराई जाएगी, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।