
Bihar Tender Scam: बिहार के हाई-प्रोफाइल टेंडर स्कैम और भ्रष्ट ठेकेदार रिशु श्री के साथ कथित मिलीभगत के मामले में दो सीनियर IAS अधिकारी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने IAS योगेश कुमार सागर और IAS अभिलाषा शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए सरकार से ऑफिशियल परमिशन मांगी है। SVU ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से मिले गोपनिए दस्तावेजों, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड और अब तक इकट्ठा किए गए दूसरे सबूतों के आधार पर सरकार से गाइडेंस मांगा है।
सरकार इन दो IAS अधिकारियों को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट देने में गड़बड़ी और करप्शन के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री के साथ उनकी कथित मिलीभगत के आरोप में पहले ही सस्पेंड कर चुकी है। SVU सूत्रों के मुताबिक, योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा के अलावा कई दूसरे सीनियर IAS अधिकारी भी सीधे जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। SVU सभी सबूत तेजी से इकट्ठा कर रही ताकि आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में एक मजबूत और पक्की चार्जशीट फाइल की जा सके।
घोटाले की अलग-अलग कड़ियों को एक साथ जोड़ने के लिए एसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में SVU की एक स्पेशल टीम मंगलवार को सहरसा पहुंची थी। जहां जांच टीम ने सहरसा नगर निगम के ऑफिस में साल 2023 और 2024 के दौरान किए गए टेंडर, सप्लाई और पेमेंट प्रोसेस से जुड़े सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स की अच्छी तरह से जांच की। सूत्रों के मुताबिक, यह जांच तत्कालीन नगर आयुक्त मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल (जनवरी 2024 से दिसंबर 2024) से जुड़ी है, जिनके समय नगर निगम द्वारा कई सामग्रियों की अवैध खरीद की गई थी।
जांच से पता चला है कि रिशु श्री से जुड़ी चार शेल कंपनियों पैंथर यूनिट इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन सॉल्यूशन, रिलायबल एंटरप्राइजेज, और एम ऑफ पीपल ने सहरसा नगर निगम द्वारा जारी किए गए टेंडर्स में हिस्सा लिया था। इनमें से, पैंथर यूनिट इंफ्रास्ट्रक्चर को 14.21 करोड़ रुपये की लागत से 125 हाई-मास्ट लाइट सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। हैरानी की बात है कि उस समय मार्केट रेट को पूरी तरह नजर अंदाज किया गया था और एक हाई-मास्ट लाइट की कीमत लगभग 7.5 लाख रुपये बढ़ा दी गई थी। इसके अलावा स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने ट्राइसाइकिल और डस्टबिन की खरीद से जुड़ी कैश बुक और पेमेंट रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जो इस स्कैम में अहम सबूत होंगे।
हाल ही में, स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने कॉन्ट्रैक्टर रिशु श्री के पटना के मीठापुर स्थित घर पर छापा मारा था। जिसमें भारी मात्रा में कैश, करोड़ों की ज्वेलरी और कई डिजिटल डिवाइस बरामद हुए थे। इस जांच में यह पता चला कि रिशु श्री सरकारी टेंडरों को मैनेज करने के लिए सिस्टम में नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों को भारी-भरकम रिश्वत देता था।
रिशु श्री ने अर्बन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट, बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट और रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी टेंडर को मैनेज करने के लिए 8 से 9 परसेंट का तय कमीशन बांटता था। जो अधिकारी टेंडर दिलाने में उसकी मदद करते थे, उन्हें रिशु श्री अपने खर्च पर विदेश की सैर कराता था। इसके अलावा, इन अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके वह असली खर्चों को बहुत ज़्यादा दिखाकर बढ़े हुए सरकारी बिलों को मंज़ूरी दिलाने में कामयाब रहा।
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) भी इस टेंडर घोटाले के पीछे के फाइनेंशियल साम्राज्य को खत्म करने के मकसद से एक जांच कर रही है। ED की रडार पर वर्तमान में 15 ऐसी संदिग्ध कंपनियां हैं, जिन्हें पूरी तरह से भ्रष्ट और अवैध तरीके से ठेकों का आवंटन किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, अर्बन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट की नोडल एजेंसी बुडको ने इन कंपनियों को काम का बड़ा हिस्सा दिया था। इसके अलावा उन्होंने वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट से भी करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट हासिल किए।
ED की जांच में यह भी पता चला है कि इनमें से कई कंपनियों को इन टेंडर अलॉटमेंट से पहले ही ब्लैकलिस्ट या डिबार (बैन) किया जा चुका था। इसके बावजूद उस समय के अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं, जिससे ये कंपनियां झूठे और धोखाधड़ी वाले डॉक्यूमेंट्स के आधार पर टेंडर हासिल कर पाईं। ED ने अब डिटेल्ड डिटेल्स और पेमेंट के बारे में जानकारी मांगी है।