पटना

शिक्षक भर्ती आंदोलन को लेकर 16 दिन जेल में रहे छात्र नेता, बाहर आकर बोले- अंदर हथौड़े जैसी लाठियां बरसाईं

Dilip Kumar BPSC TRE 4: बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा के विज्ञापन और सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर 8 मई को हुए आंदोलन के बाद गिरफ्तार किए गए छात्र नेता दिलीप कुमार करीब 16 दिन बाद जेल से रिहा हो गए हैं। जमानत पर बाहर आते ही दिलीप कुमार ने बिहार सरकार और जेल प्रशासन पर कई आरोप लगाए। 

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May 25, 2026
छात्र नेता दिलीप कुमार

Dilip Kumar BPSC TRE 4: बिहार में BPSC TRE-4 (शिक्षक भर्ती परीक्षा) के नोटिफिकेशन और सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र नेता दिलीप कुमार कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आ चुके हैं। करीब 16 दिनों तक न्यायिक हिरासत (जेल) में रहने के बाद रिहा हुए दिलीप कुमार ने बाहर आने के बाद बिहार सरकार और जेल प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं। दिलीप कुमार ने जेल के भीतर कैदियों जैसा क्रूर व्यवहार और थर्ड डिग्री प्रताड़ना दिए जाने का दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके साथ किसी खूंखार देशद्रोही या आतंकवादी जैसा सलूक किया गया।

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50 हजार अभ्यर्थी सड़कों पर थे, हमें अपराधियों की तरह हाजत में ठूंसा

छात्र नेता दिलीप कुमार ने 8 मई को पटना में हुए प्रदर्शन को याद करते हुए बताया कि वह आंदोलन ऐतिहासिक था और पूरे पटना में करीब 50,000 से अधिक शिक्षक अभ्यर्थी अपनी जायज मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से सड़क पर उतरे थे। प्रशासन ने अभ्यर्थियों की आवाज दबाने के लिए चार बार बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया।

दिलीप ने कहा, 'हम तो बैरिकेडिंग के पास पहुंचे भी नहीं थे कि पुलिस ने हमें घसीटकर और पैर से मारकर अरेस्ट कर लिया। मेरे साथ तीन अन्य छात्र नेताओं शहबाज आलम, शशि शेखर आराध्या और नवीन कुमार सिंह को गांधी मैदान थाने की हाजत में रात 11 बजे से इस तरह बंद रखा गया, जैसे हम लोग कोई खूंखार अपराधी या क्रिमिनल हों। हमारा गुनाह सिर्फ इतना था कि हम रोजगार की मांग कर रहे थे। उस रात हम में से किसी को नींद नहीं आई।'

जेल के अंदर चलीं हथौड़े जैसी लाठियां

दिलीप कुमार ने जेल के अंदर जो कुछ भी हुआ, उसकी दास्तां सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने उन पर झूठी हिंसा भड़काने की साजिश का आरोप मढ़कर जेल के भीतर बुरी तरह टॉर्चर किया। दिलीप कुमार ने कहा, '20 मई की सुबह अचानक जेल प्रशासन के लोग और बाहरी पुलिस फोर्स हमारे पास आई। बिना किसी बात के उन्होंने हम पर अंधाधुंध थप्पड़ और हथौड़े जैसी लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। मुझे, शहबाज और शशि शेखर को बुरी तरह पीटा गया। मेरे पैर, कमर और सिर पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद हमें सामान्य बैरक से निकालकर दो दिनों (20 और 21 मई) तक सेल (अंध कोठरी या कालकोठरी) में बंद करके रखा गया।'

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को याद दिलाए पुराने दिन

छात्र नेता का गुस्सा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी फूटा। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनके पुराने राजनीतिक संघर्ष के दिन याद दिलाते हुए तीखा सवाल किया। दिलीप कुमार ने कहा, 'सम्राट चौधरी जी, आज आप बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर बैठे हैं। जरा वो दिन याद कीजिए जब आप भी डाकबंगला चौराहा पर आंदोलन करते थे और पुलिस की लाठियां खाते थे। उस समय आप हमारे आंदोलनों का समर्थन करते थे, लेकिन आज आपको क्या हो गया कि आपके राज में हक मांगने वाले युवाओं को जेल के अंदर कालकोठरी में बंद करके पीटा जा रहा है? हमसे किस बात का बदला लिया जा रहा है?'

चंदा चोरों और फर्जी छात्र नेताओं की खोली पोल

दिलीप कुमार ने जेल जाने के पीछे पटना के कुछ स्वघोषित और फर्जी छात्र नेताओं की एक साजिश का भी पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि जब वे लोग जेल के अंदर थे, तब बाहर कुछ दलाल और फर्जी डिग्री बेचने वाले नेताओं ने दिलीप कुमार के नाम का इस्तेमाल कर छात्रों को इमोशनली ब्लैकमेल करना और चंदा वसूली का धंधा शुरू कर दिया।

दिलीप ने कहा, 'ये चंदा चोर और दलाल नेता चाहते थे कि बाहर ऐसा उग्र माहौल बने जिससे पुलिस प्रशासन को यह शक हो जाए कि दिलीप कुमार जेल के अंदर से ही आंदोलन की साजिश रच रहा है। इसी कंफ्यूजन के कारण प्रशासन ने जेल के अंदर हम पर लाठियां बरसाईं। ये दलाल चाहते थे कि हम जेल में सड़ते रहें ताकि ये लोग अपनी दुकान चला सकें। मैं छात्रों से अपील करता हूं कि ऐसे फर्जी नेताओं और शिक्षा माफियाओं से पूरी तरह सावधान रहें।'

20,000 की वैकेंसी पर खुश नहीं, एक-एक लाठी का हिसाब होगा

सरकार और शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए उस बयान पर, जिसमें कहा गया है कि सरकार 20,000 पदों पर वैकेंसी जारी कर रही है, दिलीप कुमार ने कहा कि बिहार के शिक्षक अभ्यर्थी इस ऊंट के मुंह में जीरा जैसी भर्ती से बिल्कुल खुश नहीं हैं। बीपीएससी के पास पहले ही 46,000 से अधिक सीटों की अधियाचना (रोस्टर) आ चुकी थी, इसलिए सरकार को पूरे पदों पर ही विज्ञापन जारी करना होगा।

दिलीप कुमार ने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए कहा, 'हमें पुलिस की लाठियों और जेल की कालकोठरी का कोई डर नहीं है। हमारे साथ महात्मा गांधी, भगत सिंह और जेपी की प्रेरणा है। क्रांति का रास्ता जेल से ही होकर गुजरता है। हम प्रशासन से अनुमति लेकर शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से लाखों युवाओं के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। बिहार का युवा अपनी पीठ पर लगी एक-एक लाठी का हिसाब लोकतांत्रिक तरीके से लेगा।'

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