Rabri Devi bungalow controversy: बिहार सरकार द्वारा तीन नोटिस जारी किए जाने के बावजूद राबड़ी देवी ने फिलहाल 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। राबड़ी देवी को आवास खाली करने के लिए 15 दिनों की अंतिम मोहलत दी गई है। यदि इस समय सीमा के बाद भी आवास खाली नहीं होता है, तो सरकार क्या कदम उठाएगी? क्या राबड़ी देवी का आवास भी उसी तरह खाली कराया जाएगा, जिस तरह 2008 में उपेंद्र कुशवाहा का आवास खाली कराया गया था?
Rabri Devi bungalow controversy: पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। पिछले दो दशकों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव के परिवार की राजनीति का केंद्र रहे इस बंगले को खाली करने का अल्टीमेटम मिल चुका है। भवन निर्माण विभाग द्वारा इस संबंध में अब तक तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस आवास को खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। राबड़ी देवी ने कहा है कि वह बंगला नहीं खाली करेंगी, अगर वह (सम्राट चौधरी) चाहें तो सुरक्षा बल लाकर इसे जबरन खाली करवा लें।
फिलहाल, राबड़ी देवी को 15 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस अवधि के बाद भी राबड़ी देवी ने बंगला खाली नहीं किया, तो सरकार क्या करेगी? क्या बिहार में एक बार फिर उसी तरह सरकारी आवास खाली कराया जाएगा, जैसे साल 2008 में उपेंद्र कुशवाहा से खाली कराया गया था।
बिहार के राजनीतिक इतिहास में सरकारी बंगला खाली कराने को लेकर सबसे बड़ा विवाद 2008 में सामने आया था, जब उपेंद्र कुशवाहा को जबरन बेदखल किया गया था। बिहार में RJD सरकार के कार्यकाल के दौरान 2004 में नीतीश कुमार के करीबी होने के नाते उपेंद्र कुशवाहा को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था और उन्हें 30 बेली रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था।
इसके बाद 2005 में हुए चुनाव में कुशवाहा हार गए और 2007 में वैचारिक मतभेदों के कारण उन्हें जदयू से निष्कासित कर दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने बंगला खाली करने से इनकार कर दिया। बाद में वह शरद पवार की पार्टी NCP के प्रदेश अध्यक्ष बन गए और इसी आवास से अपनी राजनीतिक गतिविधियाँ जारी रखीं। भवन निर्माण विभाग और विधानसभा ने उन्हें आवास खाली करने के लिए कई नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने आवास खाली नहीं किया।
जब कई नोटिस मिलने के बाद भी कुशवाहा ने आवास खाली नहीं किया तो 16 मई 2008 को पुलिस की एक टीम उनके बंगले पर पहुंची। हालांकि, उस समय कुशवाहा पटना से बाहर थे। 26 जून को सुरक्षा बलों की पूरी टुकड़ी के साथ पुलिस टीम फिर पहुंची, लेकिन कुशवाहा अपनी बात पर अड़े रहे और टस से मस नहीं हुए। 22 जुलाई 2008 को पुलिस एक बार फिर उनके आवास पर पहुंची, लेकिन NCP कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा।
आखिरकार 17 अगस्त 2008 को पटना जिला प्रशासन पूरी तैयारी के साथ उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर पहुंचा। इस बार परिवार के सदस्यों के कड़े विरोध के बावजूद मजिस्ट्रेट के आदेश पर घर का एक-एक सामान जबरदस्ती बाहर निकाला गया और ट्रैक्टरों पर लाद दिया गया। उपेंद्र कुशवाहा को उस रात होटल में रुकना पड़ा, जबकि उनके घर का सामान पार्टी कार्यालय में रखना पड़ा।
साल 2005 तक राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं और उनका पूरा परिवार मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 1 अणे मार्ग में रहता था। लेकिन नवंबर 2005 में जब सरकर बदली और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो 10 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आरक्षित कोटे के तहत राबड़ी देवी को आवंटित किया गया। तब से बिहार में कई राजनीतिक बदलाव हुए लेकिन 10 सर्कुलर रोड राजद की राजनीति का केंद्र बना रहा।
लेकिन जब 2025 में एनडीए की नई सरकार बनी तो सरकारी आवासों के पुनर्वितरण के संबंध में एक नई नीति अपनाई है। इस नीति के तहत भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता के लिए निर्धारित कोटे के तहत 39 हार्डिंग रोड पर स्थित बंगला आवंटित किया। वही, 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला बिहार सरकार के पशुपालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है।
राबड़ी देवी के बंगले को खाली करने से साफ इनकार करने के बाद बिहार की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नंद किशोर राम ने RJD पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'मैं दलित समुदाय से आता हूं, शायद इसीलिए राबड़ी देवी मेरे लिए यह आवास खाली करने से मना कर रही हैं।' इस बयान ने इस मामले से जुड़े विवाद को पूरी तरह से गरमा दिया है। RJD इस पूरे कदम को राजनीतिक बदले की भावना बता रही है।
प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर 15 दिन की मोहलत खत्म होने के बाद भी राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करती हैं, तो सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं। भवन निर्माण विभाग अगर चाहे तो राबड़ी देवी को 'अनाधिकृत कब्जेदार' घोषित कर सकता है और बिहार पब्लिक प्रेमिसेस (बेदखली) अधिनियम के तहत उन्हें एक अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है। इस नोटिस में उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि उन्हें सरकारी आवास से बेदखल क्यों न किया जाए।
अगर इस नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी जिला प्रशासन और मजिस्ट्रेट को उन्हें बलपूर्वक बेदखल करने का लिखित आदेश जारी कर सकता है। इसके अलावा, निर्धारित समय सीमा के बाद राबड़ी देवी जितने भी दिन तक बंगले पर कब्जा जमाए रहेंगी, उन्हें हर दिन के हिसाब से भारी जुर्माना देना पड़ सकता है, जिसकी गणना बाजार दरों के आधार पर की जाएगी।