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Jaggi Murder Case: सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को राहत नहीं, 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई, बोले- न्यायपालिका पर पूरा विश्वास

Jaggi Murder Case: रामअवतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व विधायक अमित जोगी की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई।
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Apr 20, 2026
Jaggi Murder Case
जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी दोषी करार ( Photo - Patrika )

Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिल पाई है। मामले में अब 23 अप्रैल को सुनवाई होगी, जो जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष निर्धारित की गई है। फिलहाल अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्थिति यथावत रखने के निर्देश दिए हैं।

Jaggi Murder Case: दो फैसलों को चुनौती, साथ होगी सुनवाई

अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो आदेशों को चुनौती दी है। पहला आदेश केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को अपील की अनुमति देने से जुड़ा है, जबकि दूसरा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले से संबंधित है, जिसमें उन्हें हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है।

सिब्बल ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अमित जोगी की ओर से दलील देते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा निर्णय दिया। उन्होंने इसे न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में आश्वासन दिया था कि गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत समाप्त होने से पहले याचिका पर सुनवाई की जाएगी।

Jaggi Murder Case: पीड़ित पक्ष भी रहा मौजूद

मामले की सुनवाई के दौरान मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की ओर से भी उनके वकील उपस्थित रहे और उन्होंने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट का फैसला और सजा

इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को अपने फैसले में CBI जांच के आधार पर अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही उन्हें 23 अप्रैल से पहले आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

सोशल मीडिया पर जताया भरोसा

अमित जोगी ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी स्पेशल लीव पिटिशन और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उन्होंने अपनी कानूनी टीम कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग का आभार जताते हुए न्यायपालिका पर पूरा भरोसा व्यक्त किया।

Jaggi Murder Case: अब 23 अप्रैल पर नजर

अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। इसी दिन यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमित जोगी को कोई राहत मिलती है या उन्हें अदालत के आदेश के अनुसार सरेंडर करना पड़ेगा।

2007 में हो गए थे बरी

जग्गी हत्याकांड को लेकर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान 31 मई 2007 अमित जोगी बरी घोषित हुए थे। रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को ​सभी आरोपी से मुक्त करते हुए बरी किया था। इस फैसले के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया था। अब इस मामले में अंतिम फैसला अमित जोगी के खिलाफ आया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र समेत कई लोग हत्या और साजिश में शामिल

प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में मामले में असंतोष जताने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की जांच में आरोप लगाए गए कि अमित ऐश्वर्य जोगी (पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र) और अन्य कई लोग हत्या और साजिश में शामिल थे। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इसके खिलाफ संबंधित पक्षों ने हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की।

Jaggi Murder Case: कौन थे राम अवतार जग्गी?

राम अवतार जग्गी एक कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े प्रभावशाली नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी जॉइन की थी, तब जग्गी को पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी गई थी। करीब दो दशक पुराने इस मामले में अब अदालत का अंतिम फैसला आया है।

Updated on:
20 Apr 2026 02:11 pm
Published on:
20 Apr 2026 02:11 pm
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