Odisha food Poising News : ओडिशा में चिकन करी और पालक खाने से तीन लोगों की मौत पहेली बनी है। इसको लेकर जांच चल रही है। आइए, डॉ. हिमांशु गुप्ता, सीनियर फिजिशियन से समझते हैं फूड पॉइजनिंग क्या है और कैसे बच सकते हैं?
3 Dead after having Palak and Chicken Curry : चिकन करी और पालक खाने से एक ही परिवार के तीन की मौत की खबर सामने आई है। ये घटना ओडिशा के ढेंकानाल जिले की बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने एक साथ पालक और चिकन करी खाई थी जिसके बाद तबीयत बिगड़ने लगी। इसके उन्हें अंगुल जिला अस्पताल (DHH) में भर्ती कराया गया। मगर, डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, अभी तक माना जा रहा है कि मौत की वजह फूड पॉइजनिंग है। साथ ही इस दर्दनाक मामले की जांच चल रही है। पर क्या सच में पालक और चिकन करी से मौत हो सकती है? आइए, तथ्यों के हिसाब से इसे समझने की कोशिश करते हैं। साथ ही जानते हैं कि किस तरह की चीजों से फूड पॉइजनिंग का खतरा अधिक होता है और कब फूड पॉइजनिंग से मौत हो सकती है?
डॉ. हिमांशु गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, जयपुर कहते हैं, फूड पॉइजनिंग, जिसे साइंस की भाषा में 'फूडबोर्न/ खाद्य जनित बीमारी' (Foodborne Illness) भी कहा जाता है, जो एक ऐसी स्थिति है जो दूषित, सड़ा हुआ या विषैला भोजन खाने से होती है।
जब हम ऐसा भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला या ई. कोलाई), वायरस, परजीवी या उनके द्वारा छोड़े गए टॉक्सिन्स मौजूद होते हैं, तो यह हमारे पाचन तंत्र को संक्रमित कर देते हैं।
आईसीएमआर (ICMR-Foodnet) और एनसीडीसी (NCDC) के अनुसार, भारत में फूड पॉइजनिंग के 32.7% मामलों का मुख्य कारण अनाज और फलियों (Grains & Beans) का गलत भंडारण या दूषित होना पाया गया है।
सीडीसी (CDC) की जानकारी के अनुसार, साल्मोनेला बैक्टीरिया किसी भी दूसरे बैक्टीरिया की तुलना में अधिक फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है। यह बेहद खतरनाक बैक्टीरिया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये साल्मोनेला बैक्टीरिया का मुख्य सोर्स है- चिकन, मांस, मछली आदि।
साथ ही पालक जैसी पत्तेदार सब्जियां में भी साल्मोनेला या परजीवी अधिक हो सकते हैं। इसलिए, पालक से भी फूड पॉइजनिंग का खतरा अधिक रहता है।
जर्नल ऑफ एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी (Journal of Applied Microbiology) के अनुसार, किचन में उपयोग होने वाले कटिंग बोर्ड और स्पंज, बैक्टीरिया के सबसे बड़े अड्डे हैं। यदि इन्हें गर्म पानी और कीटाणुनाशक से साफ न किया जाए, तो ये एक ही दिन में साल्मोनेला और कैंपिलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया को पूरे किचन में फैला सकते हैं।
इसको लेकर डॉ. हिमांशु कहते हैं कि पालक और चिकन दोनों ही फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ाने वाले फूड्स में से हैं। क्योंकि, साल्मोनेला बैक्टिरिया दोनों में अधिक पाए जाते हैं। अगर आप दोनों का सेवन एक साथ करते हैं तो ये जानलेवा साबित हो सकता है। जैसा कि हमने ओडिशा में देखा है।
डॉ. हिमांशु कहते हैं कि जैसे ही हम गलत खाना खाते हैं तो फौरन शरीर संकेत देता है। कई बार हम लोग इसे इग्नोर करते हैं। ऐसे में कई बार शरीर खुद से ठीक कर देता है पर कई बार ये जान भी ले लेता है। इसलिए, भोजन खाने के कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। अगर ये लक्षण दिखें तो फौरन सावधान हो जाएं-
डॉ. हिमांशु कहते हैं कि फूड पॉइजनिंग से जान जाने का खतरा कम है। हां, अगर आप इस बात को नजरअंदाज करते हैं तो ये जानलेवा बनता है। जैसे- अगर 3 दिन से ज्यादा दस्त रहे, मल में खून आए या बहुत तेज बुखार (102°F से अधिक) हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके लिए घरेलू नुस्खे पर निर्भर ना रहें।