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Cherry Angioma Symptoms : चेरी एंजियोमा क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण, खतरे और आधुनिक इलाज की पूरी जानकारी

Cherry Angioma Symptoms : क्या आपके शरीर पर भी चेरी जैसे लाल दाने उभर रहे हैं? यह 'चेरी एंजियोमा' हो सकते हैं। इसके होने की मुख्य वजह क्या है? इसके क्या लक्षण होते हैं? क्या यह आपके जान को जोखिम में डाल सकता है? क्या है इसका इलाज? इन सभी सवालों के जवाब डॉ.पुनीत अग्रवाल से जानिए।

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May 27, 2026
शरीर पर अचानक दिखने वाले लाल डॉट्स क्या हैं? (Photo AI Generated)

Cherry Angioma Symptoms: आज के समय में त्वचा से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याएं भी हमें तनाव में डाल देती हैं। अक्सर आपने गौर किया होगा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की त्वचा पर, खासकर छाती, पीठ या पेट पर छोटे-छोटे चमकीले लाल रंग के दाने या डॉट्स उभर आते हैं। कई बार लोग इन्हें साधारण मंसा (Wart), तिल या कोई गंभीर स्किन इंफेक्शन समझ लेते हैं। त्वचा पर दिखने वाले इन चमकीले लाल दानों को 'चेरी एंजियोमा' कहा जाता है। इसके अलावा इन्हें 'सेनाइल एंजियोमा' (Senile Angioma) या 'कैंपबेल डी मॉर्गन स्पॉट्स' (Campbell de Morgan spots) के नाम से भी जाना जाता है। यदि आपके या आपके किसी परिचित के शरीर पर इस तरह के लाल निशान दिख रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इस विस्तृत लेख में हम चेरी एंजियोमा से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू को वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दृष्टिकोण से समझेंगे।

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What is Cherry Angioma : चेरी एंजियोमा क्या होता है?

चेरी एंजियोमा त्वचा पर होने वाली एक बेहद आम और सामान्य (Benign) स्थिति है। यह त्वचा की सतह के ठीक नीचे स्थित छोटी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels या Capillaries) का एक सौम्य ट्यूमर या क्लस्टर (Growth) होता है। जब ये सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं एक जगह पर एकत्रित होकर फैल जाती हैं, तो त्वचा पर एक छोटे लाल बिंदु या उभार के रूप में दिखाई देने लगती हैं। चूंकि इनका रंग एकदम पके हुए चेरी फल की तरह गहरा लाल या चमकीला लाल होता है, इसलिए इन्हें 'चेरी एंजियोमा' नाम दिया गया है।

  • गैर-कैंसरयुक्त (Non-Cancerous): यह पूरी तरह से बिनाइन (Benign) होते हैं, जिसका सीधा मतलब है कि इनसे कैंसर होने का कोई खतरा नहीं होता।
  • उम्र का संबंध: हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर यह 30 वर्ष या उससे अधिक की आयु के वयस्कों में देखे जाते हैं।
  • शारीरिक स्थिति: यह शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं, लेकिन पैरों और चेहरों की तुलना में यह धड़ (Torso) यानी छाती, पीठ और पेट पर सबसे ज्यादा विकसित होते हैं।

Symptoms and Identification: चेरी एंजियोमा के लक्षण और पहचान

  • रंग : यह आमतौर पर चमकीले लाल (Bright Red) या चेरी रेड रंग के होते हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ या कुछ मामलों में इनका रंग गहरा बैंगनी, नीला या बिल्कुल काला भी प्रतीत हो सकता है।
  • आकार (Size) : शुरुआत में ये बेहद छोटे होते हैं, जैसे सुई की नोक या किसी छोटे पिन का सिर (लगभग 1 मिलीमीटर या उससे कम)। लेकिन धीरे-धीरे इनका आकार बढ़ सकता है और ये बढ़कर एक चौथाई इंच (लगभग 5 से 6 मिलीमीटर) या उससे थोड़े बड़े भी हो सकते हैं।
  • बनावट और आकार (Texture and Shape) फ्लैट (Flat): शुरुआती चरण में ये त्वचा की सतह के बिल्कुल बराबर (समतल) होते हैं, जिन्हें 'मैक्यूल्स' (Macules) कहा जाता है।
  • उभरे हुए (Raised): समय के साथ ये त्वचा से थोड़े ऊपर उठ जाते हैं और एक छोटे गुंबद (Dome-shaped) या मूंसे की तरह दिखने लगते हैं, जिन्हें 'पैप्यूल्स (Papules) कहते हैं।
  • चिकनी सतह: इनकी ऊपरी सतह आमतौर पर चिकनी होती है, लेकिन कई बार इनमें हल्की धारियां भी दिख सकती हैं।
  • संख्या (Quantity) : कुछ लोगों के शरीर पर केवल एक या दो चेरी एंजियोमा होते हैं, जबकि कुछ लोगों की त्वचा पर (विशेषकर 50 से 60 वर्ष की आयु के बाद) इनकी संख्या दर्जनों या सैकड़ों में हो सकती है।

चेरी एंजियोमा होने के मुख्य कारण (Causes of Cherry Angioma)

डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार, चेरी एंजियोमा होने का कोई एक सटीक या पुख्ता कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, व्यापक शोध और अध्ययनों के आधार पर इसके पीछे निम्नलिखित कारकों को जिम्मेदार माना जाता है।

  • बढ़ती उम्र (Aging) : चेरी एंजियोमा होने का सबसे बड़ा और आम कारण बढ़ती उम्र है। सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, 30 वर्ष की आयु पार करने के बाद लगभग 50% वयस्कों में कम से कम एक चेरी एंजियोमा जरूर विकसित होता है। वहीं, 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-प पहुंचते लगभग 70-75% लोगों की त्वचा पर ये निशान पाए जाते हैं। जैसे-जैसे त्वचा की कोशिकाएं और रक्त वाहिकाएं बूढ़ी होती हैं, उनके फैलने और इस तरह के क्लस्टर बनाने की संभावना बढ़ जाती है।
  • आनुवंशिकी और पारिवारिक इतिहास (Genetics) : यदि आपके माता-पिता, दादा-दादी या परिवार के अन्य रक्त संबंधियों की त्वचा पर चेरी एंजियोमा की अधिकता रही है, तो बहुत अधिक संभावना है कि आपको भी यह समस्या होगी। हमारे जीन यह तय करते हैं कि हमारी रक्त वाहिकाएं उम्र के साथ कैसा व्यवहार करेंगी।
  • हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Changes) : शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी चेरी एंजियोमा के विकास को गति दे सकते हैं। यही कारण है कि कई महिलाओं को गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान या प्रसव के ठीक बाद अचानक शरीर पर कई नए लाल डॉट्स दिखाई देने लगते हैं। इसके अलावा, एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव को भी इससे जोड़कर देखा जाता है।
  • रासायनिक पदार्थों का प्रभाव (Chemical Exposure) : कुछ चिकित्सा शोधों में पाया गया है कि कुछ खास तरह के रसायनों, विशेष रूप से ब्रोमाइड्स (Bromides) के संपर्क में आने से चेरी एंजियोमा की संख्या में तेजी से वृद्धि हो सकती है। ब्रोमाइड्स कुछ दवाओं, औद्योगिक रसायनों और कुछ खास सप्लीमेंट्स में पाए जा सकते हैं।
  • मौसम और पर्यावरण (Climate and Environment): गर्म और अत्यधिक उमस वाले मौसम में रहने वाले लोगों या धूप के अत्यधिक संपर्क (Sun Exposure) में रहने वाले लोगों में भी त्वचा की रक्त वाहिकाओं के संवेदनशील होने की दर अधिक होती है, जो एंजियोमा को बढ़ावा दे सकती है।

Treatment Methods : चेरी एंजियोमा के आधुनिक इलाज के विकल्प

चूंकि चेरी एंजियोमा से कोई शारीरिक खतरा नहीं होता, इसलिए चिकित्सीय रूप से इनका इलाज कराना अनिवार्य नहीं है। अधिकांश लोग इनका इलाज केवल दो ही स्थितियों में करवाते हैं:

  • कॉस्मेटिक कारण (Cosmetic Reasons): जब ये चेहरे, गर्दन या हाथ जैसी दिखने वाली जगहों पर हो जाएं और दिखने में खराब लगें।
  • बार-बार चोट लगना: जब ये ऐसी जगह पर हों (जैसे बेल्ट की जगह या कॉलर के पास) जहां कपड़ों या गहनों की रगड़ से इनमें से खून निकलने लगे।
  • क्रायोथेरेपी (Cryotherapy / Freezing) : यह एक बेहद लोकप्रिय और त्वरित प्रक्रिया है। इसमें डॉक्टर एक विशेष उपकरण की मदद से चेरी एंजियोमा पर तरल नाइट्रोजन (Liquid Nitrogen) छिड़कते हैं। अत्यधिक ठंडी गैस होने के कारण यह उस हिस्से को तुरंत फ्रीज (जमा) कर देती है। फ्रीज होने के बाद वहां एक छोटा सा पपड़ीदार घाव बनता है और कुछ दिनों में वह एंजियोमा सूखकर अपने आप त्वचा से अलग हो जाता है। इसके लिए किसी सर्जरी या टांके की आवश्यकता नहीं होती।
  • इलेक्ट्रोकॉशन्स / इलेक्ट्रोसर्जरी (Electrocautery) : इस विधि में विद्युत धारा (Electric Current) का उपयोग किया जाता है। एक छोटी सुई के आकार के प्रोब के माध्यम से हल्की बिजली की तरंगें एंजियोमा पर छोड़ी जाती हैं।यह बिजली की गर्मी सीधे उन असामान्य रक्त वाहिकाओं को जलाकर नष्ट कर देती है और साथ ही खून बहने को भी रोक देती है।यह बहुत सटीक प्रक्रिया है और एक ही सेशन में एंजियोमा गायब हो जाता है।
  • लेजर सर्जरी (Laser Therapy) : यह आज के समय की सबसे आधुनिक और सटीक तकनीक है। इसमें पल्स्ड डाई लेजर (Pulsed Dye Laser PDL) या अन्य विशिष्ट स्किन लेजर्स का उपयोग किया जाता है। लेजर की केंद्रित रोशनी त्वचा के बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचाए बिना सीधे अंदर की लाल रक्त वाहिकाओं (हीमोग्लोबिन) द्वारा सोख ली जाती है। इससे वह वाहिका अंदर ही अंदर नष्ट हो जाती है। इस प्रक्रिया में दर्द न के बराबर होता है और त्वचा पर कोई दाग या निशान (Scarring) छूटने की संभावना न्यूनतम होती है। चेहरे के एंजियोमा के लिए यह सर्वोत्तम मानी जाती है।
  • शेव एक्सीजन (Shave Excision): यदि एंजियोमा का आकार काफी बड़ा और उभरा हुआ है, तो डॉक्टर इस पारंपरिक तरीके का उपयोग कर सकते हैं। इसमें त्वचा के उस हिस्से को स्थानीय एनेस्थीसिया (Local Anesthesia) देकर सुन्न किया जाता है और फिर एक विशेष सर्जिकल ब्लेड या स्केल्पल (Scalpel) की मदद से एंजियोमा को त्वचा की सतह से खुरच कर या काटकर अलग कर दिया जाता है।

डॉ.पुनीत अग्रवाल के साथ पत्रिका की खास बातचीत

क्या चेरी एंजियोमा खतरनाक होते हैं?

मेडिकल साइंस में चेरी एंजियोमा पूरी तरह से सौम्य (Benign / Non-cancerous) होते हैं। ये किसी भी प्रकार के त्वचा कैंसर (जैसे मेलानोमा या कार्सिनोमा) का संकेत नहीं होते हैं। इनसे स्वास्थ्य को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचता है। इनमें न तो कोई दर्द होता है, न खुजली होती है और न ही इनसे कोई संक्रामक बीमारी फैलती है।

चेरी एंजियोमा में सतर्क कब होना चाहिए?

भले ही चेरी एंजियोमा खतरनाक नहीं होते, लेकिन त्वचा पर दिखने वाला हर लाल या काला निशान चेरी एंजियोमा ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। आपको तुरंत किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए यदि

  • आकार में तेजी से बदलाव: यदि कोई लाल डॉट बहुत कम समय में (कुछ हफ्तों या महीनों में) तेजी से बड़ा हो रहा हो।
  • रंग का बदलना: यदि उसका रंग चमकीले लाल से बदलकर गहरा काला, गहरा भूरा या बहु-रंगीन (Multi-colored) हो रहा हो।
  • असामान्य बॉर्डर: यदि उस निशान के किनारे या बॉर्डर असमान (Irregular), कटे-फटे या धुंधले दिखाई दे रहे हों।
  • बार-बार खून आना (Bleeding): यदि कपड़े रगड़ जाने, नहाने या सामान्य रूप से छूने पर भी उस निशान से आसानी से खून बहने लगे।
  • असहजता: यदि उस विशेष स्थान पर लगातार दर्द, खुजली, जलन या मवाद (Pus) आने की समस्या हो रही हो।

क्या चेरी एंजियोमा को होने से रोका जा सकता है?

  • चेरी एंजियोमा का मुख्य संबंध आनुवंशिकी और प्राकृतिक रूप से बढ़ती उम्र से है, इसलिए इन्हें पूरी तरह से होने से रोकना (Prevention) संभव नहीं है। हालांकि, अपनी जीवनशैली और त्वचा की देखभाल में कुछ सकारात्मक बदलाव करके आप अपनी त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं और नए एंजियोमा के विकास की गति को धीमा कर सकते हैं।
  • एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें: अपने भोजन में रंग-बिरंगे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, बेरीज, खट्टे फल और नट्स शामिल करें। ये शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और त्वचा की कोशिकाओं व रक्त वाहिकाओं को असमय बूढ़ा होने से बचाते हैं।
  • पर्याप्त पानी पिएं: त्वचा को हाइड्रेटेड रखने से उसकी प्राकृतिक लोच (Elasticity) बनी रहती है और विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं।
  • धूप से सुरक्षा (Sun Protection): जब भी बाहर निकलें, कम से कम 30 या उससे अधिक एसपीएफ (SPF) वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन जरूर लगाएं। हानिकारक यूवी (UV) किरणें त्वचा के कोलेजन और रक्त वाहिकाओं को कमजोर करती हैं।
  • केमिकल एक्सपोजर से बचें: बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक सप्लीमेंट्स या संदिग्ध रसायनों वाली दवाओं का सेवन न करें।
  • नियमित स्किन चेक-अप: हर महीने शीशे के सामने अपनी त्वचा का खुद निरीक्षण करें। यदि कोई नया निशान दिखे या पुराने निशान में बदलाव आए, तो उसे अपनी डायरी या फोन में नोट करें।

क्या चेरी एंजियोमा का अचानक शरीर पर बहुत ज्यादा संख्या में दिखना किसी अंदरूनी बीमारी (जैसे लीवर या मेटाबॉलिक हेल्थ) का शुरुआती संकेत हो सकता है, या यह विशुद्ध रूप से केवल त्वचा से जुड़ी समस्या है?

आमतौर पर चेरी एंजियोमा का धीरे-धीरे बढ़ना केवल त्वचा की उम्र बढ़ने (Aging) की एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन, यदि शरीर पर अचानक और बहुत तेजी से (Eruptive) सैकड़ों की संख्या में ये लाल डॉट्स उभरने लगें, तो यह विशुद्ध त्वचा की समस्या नहीं रह जाती। मेडिकल साइंस के अनुसार, अचानक इनकी बाढ़ आना शरीर के अंदरूनी विकारों, विशेषकर लीवर डैमेज (जैसे सिरोसिस), गंभीर मेटाबॉलिक असंतुलन या कुछ मामलों में आंतरिक ट्यूमर (Internal Malignancies) का शुरुआती संकेत हो सकते है। इसे मेडिकल भाषा में 'इरप्टिव चेरी एंजियोमा' कहते हैं, जिसके दिखने पर तुरंत पूरी शारीरिक जांच (Full Body Checkup) करानी चाहिए।

इंटरनेट पर कई जगह लिखा है कि यह शरीर में 'टॉक्सिन्स' बढ़ने से होता है। एक विशेषज्ञ के तौर पर आप इस दावे को कितना सही मानते हैं?

इंटरनेट पर चेरी एंजियोमा को 'टॉक्सिन्स' या शरीर की गंदगी से जोड़ना पूरी तरह गलत और अवैज्ञानिक है। मेडिकल साइंस में इसका कोई प्रमाण नहीं है। यह विशुद्ध रूप से बढ़ती उम्र, आनुवंशिकी (Genetics) और हार्मोनल बदलावों के कारण रक्त वाहिकाओं के फैलने से होता है, इसका शरीर की अशुद्धियों से कोई संबंध नहीं है।

आजकल 20 से 30 साल के युवाओं में भी यह समस्या काफी देखी जा रही है। क्या हमारी खराब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस या खान-पान भी इसे कम उम्र में ट्रिगर कर रहे हैं?

वैसे तो यह बढ़ती उम्र की समस्या है, लेकिन आज के युवाओं में खराब लाइफस्टाइल, अत्यधिक मानसिक तनाव (Stress) अनहेल्दी खान-पान और धूम्रपान इसे कम उम्र में ही ट्रिगर कर रहे हैं। तनाव और प्रोसेस्ड फूड शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) और फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं। यह स्थिति त्वचा के कोलेजन को कमजोर करती है और सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को समय से पहले संवेदनशील बनाकर उनके असामान्य विकास यानी चेरी एंजियोमा को बढ़ावा देती है।

महिलाओं में गर्भावस्था (Pregnancy) या मेनोपॉज के दौरान इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं। इसके पीछे कौन से हार्मोनल बदलाव काम करते हैं और क्या डिलीवरी के बाद ये खुद ब खुद गायब भी हो सकते हैं?

गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन का स्तर बहुत तेजी से बदलता है। खासकर प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर और रक्त का प्रवाह (Blood Circulation) सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को फैला देता है, जिससे अचानक नए चेरी एंजियोमा उभर आते हैं। राहत की बात यह है कि डिलीवरी के बाद जब हार्मोन्स वापस सामान्य होते हैं, तो इनमें से कुछ एंजियोमा खुद-ब-खुद हल्के या छोटे हो सकते हैं, हालांकि सभी पूरी तरह गायब नहीं होते।

सोशल मीडिया पर लोग सेब का सिरका लगाने, लहसुन रगड़ने या खुद ही इसे सुई से फोड़ने के घरेलू नुस्खे शेयर करते हैं। एक डर्मेटोलॉजिस्ट के तौर पर आप इन तरीकों के क्या गंभीर खतरे के रुप में देखते हैं?

घरेलू नुस्खे आजमाना बेहद खतरनाक हो सकता है। चेरी एंजियोमा असल में खून की नलिकाओं का गुच्छा है। इसे सुई से फोड़ने या काटने पर अत्यधिक ब्लीडिंग हो सकती है, जिसे रोकना मुश्किल होता है। इसके अलावा सेब का सिरका या लहसुन रगड़ने से त्वचा गंभीर रूप से जल सकती है, जिससे स्थायी दाग (Scar) और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

क्या डाइट में बदलाव करके (जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ाकर) या किसी खास स्किनकेयर रूटीन (जैसे सनस्क्रीन का सही इस्तेमाल) से नए चेरी एंजियोमा को बनने से रोका जा सकता है?

डाइट और सही स्किनकेयर से नए चेरी एंजियोमा के बनने की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे विटामिन C, E और बेरीज) बढ़ाने से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है, जो रक्त वाहिकाओं को असमय कमजोर होने से बचाता है। वहीं, रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाने से त्वचा हानिकारक यूवी (UV) किरणों से बची रहती है। यूवी किरणें त्वचा के कोलेजन और महीन नसों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे एंजियोमा विकसित होने का खतरा बढ़ता है। हालांकि आनुवंशिकी (Genetics) को बदला नहीं जा सकता, लेकिन अच्छी आदतें त्वचा को लंबे समय तक सुरक्षित रखती हैं।

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