Patrika Special News

Diabetes: क्या होता है ‘Dawn Phenomenon’? जानिए क्यों बिना कुछ खाए ही अचानक बढ़ जाता है ब्लड शुगर

Diabetes : क्यों बिना कुछ खाए भी सुबह-सुबह अपका शुगर लेवल बढ़ जाता है? डाइटिशियन से जानिए डायबिटीज मरीजों के लिए दिन का सबसे खतरनाक समय और इसे कंट्रोल करने के सही तरीके।

7 min read
Jun 23, 2026
Dawn Phenomenon Somogyi Effect Growth Hormone Quality Sleep
डायबिटीज का 'डॉन फिनोमोनन' क्या है?(Photo: AI Generated)

Diabetes News : आज दुनिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल को लेकर कई तरह की जानकारियां बताई जाती हैं, लेकिन जब बात डायबिटीज (Diabetes) की हो, तो हर छोटी बात मायने रखती है। भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ मीठा खाने या सही समय पर दवा न लेने से ही शुगर लेवल बिगड़ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 24 घंटों में एक ऐसा समय भी आता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए 'सबसे खतरनाक समय' माना जाता है?

मेडिकल रिर्पोटस के मुताबिक, यह खतरनाक समय कोई और नहीं बल्कि सुबह का वक्त होता है। सुबह के समय अचानक ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना एक ऐसी समस्या है, जिससे दुनिया भर के लाखों डायबिटिक मरीज जूझ रहे हैं। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को 'डॉन फिनोमोनन' (Diabetes Dawn phenomenon) कहा जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि सुबह के वक्त आखिर शरीर में ऐसा क्या होता है और आप किन आसान तरीकों से इसे मैनेज कर सकते हैं।

सुबह के समय क्यों अचानक 'आउट ऑफ कंट्रोल' होता है शुगर?

ज्यादातर मरीजों का सवाल होता है कि 'जब हमने रात से कुछ खाया ही नहीं, तो सुबह उठते ही शुगर लेवल 140 या 160 के पार कैसे पहुंच गया?' इसके पीछे हमारे शरीर का एक नेचुरल मैकेनिज्म काम करता है।

दरअसल, सुबह करीब 3:00 बजे से लेकर 8:00 बजे के बीच हमारा शरीर हमें जगाने और दिनभर के लिए एनर्जी देने की तैयारी करता है। इस प्रक्रिया में शरीर कुछ काउंटर-रेगुलेटरी हार्मोन्स रिलीज करता है, जैसे कोर्टिसोल (Cortisol), ग्रोथ हार्मोन (Growth Hormone), और ग्लूकागन (Glucagon)। ये हार्मोन्स लिवर को सिग्नल देते हैं कि वह खून में जमा ग्लूकोज को रिलीज करे ताकि शरीर को तुरंत एनर्जी मिल सके। लेकिन एक सामान्य व्यक्ति का शरीर इस ग्लूकोज को संभालने के लिए इंसुलिन बना लेता है, जबकि एक डायबिटिक मरीज का शरीर ऐसा नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि सुबह खाली पेट(Fasting) ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत ऊपर चला जाता है, जो दिल और किडनी की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।

पत्रिका की खास बातचीत डॉ. सोनल ढेमला के साथ

सामान्य तौर पर लोग मानते हैं कि मीठा खाने या रात को भारी खाने से शुगर बढ़ती है। लेकिन यह 'डॉन फिनोमोनन' (Dawn Phenomenon) क्या है और यह सुबह के वक्त ही क्यों एक्टिव होता है?

डायबिटीज मूल रूप से एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जिसमें हमारा शरीर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाता है। ऐसा होने के दो मुख्य कारण हैं या तो पैंक्रियाज (अग्न्याशय) पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता, या फिर शरीर उस इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' भी कहा जाता है। कई मामलों में ये दोनों ही परिस्थितियां एक साथ सक्रिय होती हैं।

सामान्य तौर पर, लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से फास्टिंग ब्लड शुगर (खाली पेट की जांच) करते हैं। अक्सर देखा गया है कि कई मरीजों का शुगर लेवल सुबह के समय काफी बढ़ा हुआ आता है। हम सभी जानते हैं कि रात के समय जब हम सो रहे होते हैं, तब भी हमारे शरीर में अंदरूनी मरम्मत और मेंटेनेंस का काम चल रहा होता है। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए हमारा शरीर रात के समय कोर्टिसोल, ग्रोथ हार्मोन्स, ग्लूकागन और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन्स रिलीज करता है। इन अलग-अलग हार्मोन्स के शरीर में अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्य होते हैं, जिन्हें ये रात के समय ही संचालित करते हैं। ये हार्मोन्स हमारे लिवर को रक्त में ग्लूकोज रिलीज करने का सिग्नल भेजते हैं, क्योंकि शरीर की कार्यप्रणाली के अनुसार ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।

  • स्वस्थ व्यक्तियों में: जैसे ही लिवर ग्लूकोज रिलीज करता है, शरीर का पैंक्रियाज भी उसी अनुपात में तुरंत इंसुलिन रिलीज कर देता है, जिससे वह बढ़ा हुआ ग्लूकोज संतुलित (हैंडल) हो जाता है।
  • डायबिटिक मरीजों में: मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के शरीर में इंसुलिन या तो पर्याप्त मात्रा में रिलीज नहीं हो पाता या सही से काम नहीं करता। परिणाम यह होता है कि लिवर द्वारा रिलीज किया गया ग्लूकोज रक्त में ही जमा होने लगता है, और इसी वजह से सुबह जागने पर फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा हुआ आता है।

भारतीय घरों में सुबह की शुरुआत दूध-चीनी वाली कड़क चाय से होती है। डायबिटीज मरीजों के लिए यह कितनी नुकसानदायक है?

भारतीय घरों में सुबह की शुरुआत आमतौर पर दो चम्मच चीनी वाली चाय से ही होती है। लेकिन, यदि आप बिना चीनी की चाय (फीकी चाय) भी पीते हैं और वह अधिक मात्रा में या खाली पेट लेते हैं, तो यह आपके कोर्टिसोल (Cortisol) लेवल को बढ़ा सकती है। सुबह के समय शरीर में कोर्टिसोल का स्तर पहले से ही अधिक होता है, ऐसे में खाली पेट चाय पीने से यह और बढ़ जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल अचानक स्पाइक कर सकता है। इसके अलावा, खाली पेट चाय पीने से एसिडिटी की समस्या भी बढ़ती है। अक्सर लोग चाय के साथ बिस्कुट या नमकीन जैसी चीजें लेते हैं, जो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाकर इस समस्या को और गंभीर कर देती हैं।

क्या सिर्फ वॉक और डाइट कंट्रोल करके सुबह के इस शुगर स्पाइक को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, या इसके लिए दवाओं की टाइमिंग बदलना ही एकमात्र रास्ता है?

हर व्यक्ति के लिए डायबिटीज मैनेजमेंट की स्ट्रेटेजी अलग हो सकती है, लेकिन ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के कुछ बुनियादी नियम (Basics) इस प्रकार हैं।

  • दवा और इंसुलिन का सही समय: सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह पर अपनी किसी भी दवा या इंसुलिन की बिल्कुल सटीक खुराक (Accurate Dose) और सही समय पर लें। आवश्यकता होने पर डॉक्टर से परामर्श कर इसका समय एडजस्ट करवाएं।
  • खान-पान में बदलाव: देर रात खाना खाने (Late Night Dinner), भारी भोजन (Heavy Meals) और खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें। अपने आहार में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर और प्रोटीन को शामिल करें।
  • नियमित व्यायाम: शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और रोजाना नियमित रूप से एक्सरसाइज या वॉक करें।
  • ग्लूकोज मॉनिटर (CGM): यदि शुगर लेवल अधिक अनियंत्रित हो रहा है, तो डॉक्टर की सलाह से लगातार ग्लूकोज मीटर का इस्तेमाल करें। इससे आपको सटीक रूप से पता चल सकेगा कि किस समय आपका शुगर लेवल बढ़ (Spike) रहा है, ताकि उस आधार पर आपके डॉक्टर आपकी दवाओं की खुराक और समय को रिवाइज कर सकें।"

अक्सर मरीज शिकायत करते हैं कि वे रात को बिल्कुल कार्बोहाइड्रेट नहीं लेते, फिर भी सुबह शुगर हाई आती है। इसके पीछे क्या कारण (Hidden Factors) हो सकते हैं?

अक्सर डायबिटीज के मरीजों को यह शिकायत होती है कि रात को हल्का और बिना मीठे का भोजन करने के बावजूद सुबह खाली पेट (फास्टिंग) की रिपोर्ट में शुगर लेवल बढ़ा हुआ आता है। आमतौर पर लोग इसके पीछे केवल खान-पान को ही वजह मानते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, सुबह के समय शुगर बढ़ने के पीछे भोजन के अलावा भी कई 'हिडन रीजंस' (छिपे हुए कारण) होते हैं।

  • तनाव और चिंता (Stress): फास्टिंग शुगर बढ़ने की एक बड़ी वजह मानसिक तनाव है। जब आप अत्यधिक चिंता या तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन आधी रात (मिडनाइट) से लेकर सुबह तक विशेष रूप से सक्रिय रहता है। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर यह लिवर (यकृत) को रक्त में ज्यादा ग्लूकोज रिलीज करने का सिग्नल देता है, जिससे सुबह का ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है।
  • खराब नींद और 'स्लीप एपनिया' (Sleep Issues): नींद पूरी न होना या बार-बार नींद टूटना सीधे तौर पर शुगर के स्तर को प्रभावित करता है। पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस (इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में कमी) बढ़ जाती है। इसके अलावा, जिन लोगों को 'स्लीप एपनिया' (सोते समय सांस में रुकावट आना) की बीमारी होती है, उनके शरीर में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जिससे लिवर को लगातार ग्लूकोज बनाने का मैसेज मिलता रहता है।
  • देर रात हैवी या हाई-प्रोटीन मील: भले ही आपने रात को मीठा न खाया हो, लेकिन यदि आपके डिनर में बहुत हैवी फूड या हाई-प्रोटीन (जैसे अत्यधिक दालें, पनीर या नॉनवेज) शामिल था, तो यह भी सुबह की शुगर बढ़ा सकता है। हाई-प्रोटीन और हैवी मील को पचने में लंबा समय लगता है, जिससे भोजन के कई घंटों बाद तक (यानी सुबह तक) ब्लड शुगर का स्तर लगातार ऊंचा बना रहता है।
  • सोने से पहले कैफीन, निकोटिन या दवाइयां: यदि आप सोने से ठीक पहले चाय-कॉफ़ी (कैफीन) पीते हैं, धूम्रपान (निकोटिन) करते हैं, या कुछ विशेष प्रकार की दवाइयों का सेवन करते हैं, तो इससे शरीर में एड्रेनालिन (Adrenaline) हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन लिवर को ग्लूकोज उत्पादन बढ़ाने के लिए उकसाता है।
  • रात के समय दवाओं का असर कम होना: एक व्यावहारिक कारण यह भी है कि डायबिटीज के लिए जो दवाइयां या इंसुलिन आप दिन में या शाम को लेते हैं, रात के आखिरी पहर (तड़के सुबह) तक आते-आते शरीर पर उनका प्रभाव काफी कम हो जाता है। दवाओं का असर घटने के कारण भी सुबह का फास्टिंग ग्लूकोज लेवल अनियंत्रित नजर आता है।

वर्किंग प्रोफेशनल्स जो रात की शिफ्ट में काम करते हैं या जिनका स्लीप साइकिल बदला हुआ है, वे इस 'डॉन फिनोमोनन' को कैसे मैनेज करें?

नाइट शिफ्ट में काम करने वाले डायबिटीज के मरीजों के लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। लेकिन यहां समझने वाली मुख्य बात यह है कि 'डॉन फिनोमिना' का संबंध घड़ी के समय से ज्यादा आपके शरीर की अंदरूनी जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल टाइमिंग्स (Biological Clock) से होता है। इसलिए ऐसे मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वे अपने डेली शेड्यूल को हमेशा एक समान (एकसार) रखें; अपने सोने और जागने का समय निश्चित रखें। यदि आप बार-बार अपने सोने और जागने के समय में बदलाव करते हैं, तो इससे ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप नाइट शिफ्ट के बाद दोपहर में सोकर उठ रहे हैं, तो उठते ही सबसे पहले अपना शुगर लेवल (फास्टिंग) चेक करें, चाहे वह दोपहर का समय ही क्यों न हो।

हमारे रीडर्स के लिए कोई एक ऐसी 'गोल्डन टिप' या थम्ब रूल जो सुबह के शुगर लेवल को हमेशा सुरक्षित दायरे में रख सके?

ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने का मूल मंत्र (Thumb Rule) यह है कि सबसे पहले आप अपने वजन को नियंत्रित रखें और साथ ही अपनी कमर के घेरे (नाप) पर भी विशेष ध्यान दें।

  • अपनी दवाइयां नियमित रूप से लें और तनाव-मुक्त होकर अच्छी नींद पूरी करें। शारीरिक सक्रियता भी उतनी ही जरूरी है, इसलिए रोजाना 40 से 50 मिनट की वॉक अवश्य करें, साथ ही हर बार भोजन करने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक (लाइट वॉक) की आदत डालें।
  • एक डायटीशियन के तौर पर मैं यह सलाह दूंगी कि आपके भोजन की थाली का आधा हिस्सा हमेशा सब्जियों और सलाद से भरा होना चाहिए। खाते समय सबसे पहले सलाद खाएं, उसके बाद प्रोटीन युक्त चीजें और अंत में कार्बोहाइड्रेट (कार्ब) फूड लें ।
  • अपने खाने की मात्रा को सीमित रखे। चूंकि हर व्यक्ति के शरीर की जरूरत अलग होती है, इसलिए अपनी आवश्यकता के अनुसार ही भोजन करें। आपका शारीरिक गठन (Body Build), आपकी उम्र, फिजिकल एक्टिविटी का स्तर और आपकी शारीरिक स्थिति (Physiological Condition) ये सभी कारक मिलकर यह तय करते हैं कि आपके शरीर को कितनी कैलोरी की आवश्यकता है। अपनी इस शारीरिक जरूरत को समझते हुए ही खान-पान का नियम बनाएं।
Updated on:
23 Jun 2026 12:03 pm
Published on:
23 Jun 2026 10:31 am