Iran US War : अमेरिकी और इजराइली हमलों में ईरान के एक दर्जन से ज्यादा शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों की जान चुकी है। इसके बावजूद ईरान लगातार जंग में विश्व की महाशक्ति अमेरिका के सामने डटा हुआ है। आइए जानते हैं कि ईरान की ओर से अमेरिका और इजराइल के जवाबी हमलों की रणनीति कौन बना रहा है।
Iran US War 2026 : अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के एक दर्जन से भी ज्यादा टॉप लीडरों को मार डाला। अमेरिका और इजराइल को यह लगा कि ईरान का नेतृत्व ध्वस्त करके वह उसे कदमों में झुका लेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस तरह की बयानबाजी कई बार की, लेकिन ईरान युद्ध को जारी रहते हुए आज एक महीना बीत चुका है। आखिर, इरान का बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होने के बावजूद भी वह युद्ध में किन नए नेताओं के बल पर मजबूती से टिका हुआ है। आइए विस्तार से जानते हैं।
ईरान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई यहां सत्ता केवल निर्वाचित नेताओं के हाथ में नहीं होती, बल्कि धार्मिक नेतृत्व, सेना और विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भी अहम भूमिका होती है। हाल के वर्षों में क्षेत्रीय संघर्ष, आंतरिक विरोध और वैश्विक दबावों के बीच कई नए और पुराने नेता उभरकर सामने आए हैं। इन नेताओं में अहमद वाहिदी, मोहसनी-एजेई, इस्माइल क़ानी, मसूद पेज़ेश्कियन, मोहम्मद बाकेर कालिबाफ और अन्य शामिल हैं। नए नेताओं और सैन्य अधिकारियों के बारे में जानने से पहले एक नजर उन नेताओं और सैन्य अधिकारियों पर डालते हैं, जिनकी अमेरिका और इजराइल के हमलों में जान चली गई।
अहमद वाहिदी ईरान के सबसे प्रभावशाली सैन्य नेताओं में से एक हैं। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख हैं और लंबे समय से ईरान की सैन्य रणनीति का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में भाग लिया और बाद में कुद्स फोर्स (Quds Force) का नेतृत्व भी किया। कुद्स फोर्स ईरान के आईआरजीसी की एक विशिष्ट और गुप्त शाखा है, जो मुख्य रूप से देश के बाहर गुप्त सैन्य अभियान, खुफिया जानकारी जुटाने और प्रॉक्सी समूहों को प्रशिक्षण व हथियार देने का काम करती है। वाहिदी की भूमिका केवल सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। आंतरिक सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में भी उनका प्रभाव दर्ज देखा गया है। इस समय टॉप लीडर्स के मारे जाने और युद्ध के लगातार जारी रहने के समय में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
मोहसनी-एजेई ईरान के मुख्य न्यायाधीश हैं। देश में उनकी छवि एक कठोर रुख अपनाने वाले नेता के रूप में है। वे पहले ईरान के खुफिया मंत्री भी रह चुके हैं और 2009 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी भूमिका विवादों में रही। मोहसनी-एजेई ने ईरान की न्यायपालिका और खुफिया तंत्र में लंबे समय तक काम किया है। सरकार के प्रति सख्त निष्ठा और विरोधियों के प्रति कठोरता को दर्शाता है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में न्यायपालिका की भूमिका और भी बढ़ गई है।
इस्माइल क़ानी कुद्स फोर्स के प्रमुख हैं, जो ईरान की बाहरी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों को संभालती है। वे अपने पूर्ववर्ती कासिम सुलेमानी के बाद इस पद पर आए और क्षेत्रीय नेटवर्क जैसे हिज़्बुल्लाह के साथ संबंध बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह अपने काम और मिशन को बहुत गोपनीय तरीकों से अंजाम देते हैं। वह सार्वजनिक रूप से कम प्रकट होते हैं।
मसूद पेज़ेश्कियन 2024 में ईरान के राष्ट्रपति बने। वे एक सुधारवादी नेता के रूप में देश में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में आर्थिक सुधार, सामाजिक बदलाव और अंतरराष्ट्रीय संवाद की वकालत की है। हालांकि, ईरान की राजनीतिक संरचना में राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित होती हैं। कई बार उन्हें सैन्य और धार्मिक नेतृत्व के साथ टकराव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, वे जनता की उम्मीदों को साथ लेकर चलने वाले के तौर पर जाने जाते हैं।
अलीरेज़ा तंगसीरी IRGC नौसेना के प्रमुख रहे हैं और फारस की खाड़ी में ईरान की रणनीतिक उपस्थिति के लिए जाने जाते हैं। उनकी भूमिका खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रही है। वे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री नियंत्रण के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं।
कालिबाफ ईरान की मजलिस (संसद) के स्पीकर हैं और पूर्व में तेहरान के मेयर और IRGC में कमांडर भी रह चुके हैं। वे ईरान के सबसे अनुभवी राजनेताओं में गिने जाते हैं और देश की नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। हाल के समय में वे अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भी सक्रिय रहे हैं।
अब्बास अराकची ईरान के विदेश मंत्री हैं और वर्षों से परमाणु वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों, रूस, चीन और अरब देशों के साथ संवाद में अहम भूमिका निभाई है। उनकी कूटनीतिक क्षमता ईरान की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अलीरेजा अराफी एक प्रमुख धर्मगुरु हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं।
वे चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवारों की छंटनी करने वाले निकाय का हिस्सा हैं, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव काफी बढ़ जाता है। वे धार्मिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सईद जलिली ईरान के प्रमुख कट्टरपंथी नेताओं में से एक हैं। वे पूर्व परमाणु वार्ताकार और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। उनका रुख पश्चिमी देशों के प्रति सख्त और समझौता विरोधी रहा है। वे ईरान की पारंपरिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ईरान की सत्ता केवल एक व्यक्ति या संस्था के हाथ में नहीं है। यहां सेना, धार्मिक नेतृत्व और निर्वाचित सरकार मिलकर सत्ता का संचालन करते हैं। इन नेताओं की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। कोई सैन्य रणनीति संभालता है, कोई न्यायपालिका, तो कोई कूटनीति। लेकिन सभी मिलकर ईरान की राजनीतिक दिशा तय करते हैं। वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में इन नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नेता देश को स्थिरता, सुधार और अंतरराष्ट्रीय संतुलन की दिशा में कैसे आगे बढ़ाते हैं।