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शहीद दिवस 2026: 30 जनवरी 1948 से पहले भी गांधीजी पर हुए कई जानलेवा हमले, भारत-पाक विभाजन से काफी पहले शुरू हो चुकी थी हत्या की साजिश

शहीद दिवस 2026: महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने भारत-पाकिस्तान विभाजन से आहत होकर किया। यह बात नाथूराम ने खुद कबूल की है। लेकिन सच तो यह है कि गांधीजी की हत्या के प्रयास विभाजन से 13 साल पहले से ही शुरू हो गए थे। आइए जानते हैं कि उनकी हत्या के लिए कितने प्रयास किए गए थे और क्या है पूरी सच्चाई।

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Jan 30, 2026
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी।

शहीद दिवस 2026 : आज महात्मा गांधी की 78वीं शहादत दिवस (Mahatma Gandhi Death Anniversary) है। देश में इसे अब शहीद दिवस के तौर पर भी मनाया जाने लगा है। 30 जनवरी 1948 की शाम नई दिल्ली में नाथूराम विनायक गोडसे (Nathuram Vinayak Godse) ने उन्हें तीन गोलियां मारी और 'हे राम' कहते हुए गांधीजी (Gandhiji's Last Word Before Death) के प्राण पखेरू हो गए। यह बताया जाता है कि गांधीजी की हत्या भारत और पाकिस्तान के विभाजन के चलते हुई थी। लेकिन सच यह है कि जब भारत विभाजन की बात कहीं हवा में भी नहीं थी, तब भी उनकी हत्या (Mahatma Gandhi death history) के कई प्रयास किए जा चुके थे।

हत्या के बाद गांधीजी के बेटे देवदास से हुई थी गोडसे की मुलाकात

How Mahatma Gandhi was killed : गांधीजी की हत्या में नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) और उनका भाई गोपाल गोडसे (Gopal Godse) शामिल थे। गोपाल ने अपनी किताब 'गांधी वध क्यों?' में यह बताया कि नाथूराम ने महात्मा गांधी की हत्या क्यों की? दरअसल, महात्मा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे देवदास गांधी (Gandhi's Son Devdas Gandhi) संसद मार्ग स्थित पुलिस थाने पहुंचे तब उनकी मुलाकात नाथूराम गोडसे से हुई थी। गोपाल ने नाथूराम के हवाले से लिखा है कि उन्होंने देवदास गांधी को अपना परिचय देते हुए कहा था कि वह हिंदू राष्ट्र अखबार का संपादक है और जहां गांधी की हत्या जहां हुई, वहां वह भी था।

गोडसे ने गांधीजी के बेटे से बताई थी उनकी हत्या की वजह

Who killed Mahatma Gandhi : नाथूराम ने देवदास से उनके पिता की हत्या से हुई पीड़ा को लेकर दुख प्रकट किया और कहा, 'कृपया मुझपर यकीन करो। मैंने यह सब किसी दुश्मनी के चलते नहीं किया। देवदास ने पलटकर उनसे पूछा, 'फिर तुमने ऐसा क्यों किया?' इसके जवाब में नाथूराम ने कहा कि इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक है। मुझे तुम्हारे प्रति कोई द्वेष नहीं है। अब सवाल उठता है कि आखिर कौन सी राजनीति वजह है जिसके चलते नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या की?

महात्‍मा गांधी की प्रतिमा। (फोटो सोर्स: IANS)

बंटवारे के चलते नाथूराम ने की थी गांधीजी की हत्या?

Why Gandhi was assassinated : भारत और पाकिस्तान के बंटवारे में गांधीजी के हाथ होने की वजह से नाथूराम ने गांधीजी की हत्या की। नाथूराम ने कहा था, 'हम जिस देश की पूजा करते रहे, उसका कांग्रेस के महान नेता गांधी की सहमति से बंटवारा हो रहा था। यही वजह है कि मैं गुस्से से भर रहा था। मैं वर्तमान सरकार की इज्जत नहीं कर सकता था, क्योंकि उनकी नीतियां मुस्लिमों के पक्ष में थी और यह सबकुछ गांधी के चलते थी।'

'अखंड भारत का सपना पूरा होने पर ही मेरी अस्थियां बहाई जाएं'

Story of Gandhi’s assassination : नाथूराम गोडसे ने अपने वसीयत में लिखा है कि वह अखंड भारत का सपना देखते थे। भारत और पाकिस्तान के विभाजन की घटना से उनका सपना चकनाचूर हो गया। उन्होंने यह भी लिखा कि अखंड भारत का सपना जब तक पूरा न हो, तब तक मेरी अस्थियां सहेजकर रखी जाएं। अखंड भारत का सपना पूरा होने के बाद ही मेरी अस्थियां सिंधु नदी में विसर्जित की जाए।

Mahatma Gandhi

विभाजन से काफी पहले भी गांधीजी की हत्या के होते रहे प्रयास

How Many Attacks on Gandhi before his death : राजनीतिक इतिहासकार शम्सुल इस्लाम ने पत्रिका से बातचीत में कहा, 'भारत और पाकिस्तान विभाजन के चलते गांधी की हत्या नहीं हुई थी। हिन्दुत्ववादी उन्हें इसलिए मार देना चाहते थे, क्योंकि उन्होंने शूद्रों को हरिजन का नाम दिया था। वह उन्हें इसलिए मार देना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि वह मुसलमानों का भला चाहते हैं। आप देखें कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी को गोलियों से भूनने से पहले भी उनकी हत्या के लिए कम से कम पांच प्रयास किए गए थे। गांधी की हत्या का प्रयास चार बार तो उस काल में जब देश के विभाजन या पाकिस्तान के बनने की कोई संभावना ही नहीं थी।'

गांधीजी की हत्या का पहला प्रयास : उनकी कार पर फेंका गया था बम

पहली बार जून 1934 में पुणे में गांधीजी की कार को निशाना बनाकर बम फेंका गया था। बम कार से कुछ दूरी पर जा गिरा और फट गया। गांधीजी बाल बाल-बाल बच गए।

गांधीजी की हत्या का दूसरा प्रयास : पंचगनी में छुरा घोंपने की साजिश

जुलाई 1944 में ही नाथूराम गोडसे ने पंचगनी (महाराष्ट्र) में प्रार्थना सभा के दौरान गांधीजी पर हमला करने की योजना बनाई, लेकिन सुरक्षा कारणों से वह फिर से उनकी हत्या करने में विफल रह गया। नाथूराम गोडसे 15-20 युवकों के साथ प्रार्थना सभा में गांधीजी पर हमला करने पहुंचा था। यहां उन्हें छुरा घोंपने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन विफल रही।

गांधीजी की हत्या का तीसरा प्रयास: जिन्ना मुलाकात से खपा थे गोडसे

नाथूराम गोडसे ने सितंबर 1944 में सेवाग्राम (महाराष्ट्र) में एक बार गांधीजी पर हमले का और प्रयास किया। सेवाग्राम में महात्मा गांधी, ​मोहम्मद अली जिन्ना से बातचीत की तैयारी कर रहे थे। गांधीजी की इस मुलाकात का हिंदू महासभा और नाथूराम गोडसे ने काफी विरोध किया था। वह मुंबई से सेवाग्राम जा रहे थे। गोडसे ने उनका रास्ता रोकने के लिए एक समूह का नेतृत्व किया। इस बार गोडसे को एक खंजर के साथ गिरफ्तार किया गया। उसने गांधीजी को जान से मारने की धमकी दी। महात्मा गांधी ने गोडसे के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं दर्ज होने दिया। गांधीजी ने एक बार फिर उन्हें माफ कर दिया।

Mahatma Gandhi

गांधीजी की हत्या का चौथा प्रयास: उनकी ट्रेन को बनाया निशाना

महात्मा गांधी पर चौथा जानलेवा हमला जून 1946 में मुंबई से पुणे (महाराष्ट्र) के रास्ते में हुआ था। इस प्रयास में 'गांधी स्पेशल' ट्रेन को निशाना बनाया गया था। गांधी जी ट्रेन में सवार थे और नेरुल और कर्जत स्टेशनों के बीच पटरी पर पत्थर रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की गई थी।

गांधीजी की हत्या का पांचवां प्रयास: दिल्ली में गोडसे ने मारी तीन गोलियां

महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने नई दिल्ली के बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति के नाम से जाना जाता है) में 30 जनवरी 1948 को शाम 5:17.30 बजे महात्मा गांधी की हत्या की गई थी। गोडसे ने उन्हें तीन गोलियां मारी थीं।

गांधीजी की हत्या: सिर्फ 3 दिनों बाद RSS पर प्रतिबंध की घोषणा

गांधीजी की हत्या के पांच दिन बाद यानी 4 फ़रवरी 1948 को आरएसएस (Ban on RSS) पर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध लगाए जाने के पीछे जो कारण थे, उनमें कई राष्ट्र विरोधी कार्य भी शामिल थे। सरकार द्वारा आरएसएस पर प्रतिबंध लगा देने वाला आदेश में लिखा था- 'भारत सरकार ने 2 फ़रवरी को अपनी घोषणा में कहा है कि उसने उन सभी विद्वेषकारी तथा हिंसक शक्तियों को जड़, मूल से नष्ट कर देने का निश्चय किया है, जो राष्ट्र की स्वतंत्रता को ख़तरे में डालकर उसके उज्जवल नाम पर कलंक लगा रहीं हैं। उसी नीति के अनुसार चीफ़ कमिश्नरों के अधीनस्थ सब प्रदेशों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अवैध घोषित करने का निश्चय भारत सरकार ने कर लिया है। गवर्नरों के अधीन राज्यों में भी इसी ढंग की योजना जारी की जा रही है।'

Sardar Vallabhbhai Patel (Photo: IANS)

'नाथूराम RSS में थे, उसने संगठन छोड़ने की बात इसलिए की थी'

गोपाल गोडसे ने 28 जनवरी, 1994 को 'फ्रंटलाइन' को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'हम सभी भाई आरएसएस में थे। हम अपने घर में नहीं, आरएसएस में ही पले और बड़े हुए थे। नाथूराम, दत्तात्रेय, मैं ख़ुद और गोविंद। आरएसएस हमारे लिए परिवार था। नाथूराम आरएसएस में बौद्धिक कार्यवाह बन गए थे।'

Nathuram Godse with a "havan", in Uttar Pradesh's Aligarh (Photo: IANS)

गोपाल ने बताया, 'कोर्ट में दिए गए बयान में नाथूराम ने आरएसएस छोड़ने की बात कही थी। वह इसलिए क्योंकि गोलवलकर और आरएसएस गांधी की हत्या के बाद मुश्किल में फंस जाते। सच यह है कि नाथूराम ने आरएसएस नहीं छोड़ा था।'

Published on:
30 Jan 2026 06:00 am
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